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डिमिच गांव में छाया मौण मेले का उल्लास
Updated Sat, 07 Apr 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
डिमिच गांव में शुक्रवार को पौराणिक मच्छ मौण मेले का उल्लास छाया रहा। मेले में लोक संस्कृति की अनूठा छटा देखने को मिली। लोग नाचते गाते हुए फटयाड़े और मच्छी पकड़ने के जाल लेकर बैनाल गाड पहुंचे, जहां गांव स्याणा जीत सिंह ने मेला शुरू करने की घोषणा की। इसी दौरान लोगों ने नदी में टिमरू का पाउडर डाला गया। इसके बाद लोग मछलियां पकड़ने के लिए नदी में कूद पड़े। करीब तीन घंटे तक मेले का उल्लास जारी रहा।
मेले को देखने के लिए अन्य गांव से भी लोग बैनाल गाड पहुंचे। ढोल-दमाऊ की थाप पर लोगों ने नदी से मछली पकड़ी। गांव स्याणा जीत सिंह, गीताराम, कल्याण सिंह आदि का कहना है कि मौण मेला जौनसारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। बाहर बसे कई लोग भी इस मेले में हिस्सा लेने के लिए गांव पहुंचते हैं। मेले के बाद शाम को गांव में विशेष भोज का दौर चला। हर साल गांव में मेले का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर रवि चौहान, जीत सिंह, कल्याण सिंह, चतर सिंह, इंदर सिंह, सचिन, प्रदीप, गजेंद्र, संतोष, मानूदास, रमेश, अतर सिंह, बादशाह, अमित आदि मौजूद रहे।
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डिमिच गांव में शुक्रवार को पौराणिक मच्छ मौण मेले का उल्लास छाया रहा। मेले में लोक संस्कृति की अनूठा छटा देखने को मिली। लोग नाचते गाते हुए फटयाड़े और मच्छी पकड़ने के जाल लेकर बैनाल गाड पहुंचे, जहां गांव स्याणा जीत सिंह ने मेला शुरू करने की घोषणा की। इसी दौरान लोगों ने नदी में टिमरू का पाउडर डाला गया। इसके बाद लोग मछलियां पकड़ने के लिए नदी में कूद पड़े। करीब तीन घंटे तक मेले का उल्लास जारी रहा।
मेले को देखने के लिए अन्य गांव से भी लोग बैनाल गाड पहुंचे। ढोल-दमाऊ की थाप पर लोगों ने नदी से मछली पकड़ी। गांव स्याणा जीत सिंह, गीताराम, कल्याण सिंह आदि का कहना है कि मौण मेला जौनसारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। बाहर बसे कई लोग भी इस मेले में हिस्सा लेने के लिए गांव पहुंचते हैं। मेले के बाद शाम को गांव में विशेष भोज का दौर चला। हर साल गांव में मेले का आयोजन किया जाता है। इस मौके पर रवि चौहान, जीत सिंह, कल्याण सिंह, चतर सिंह, इंदर सिंह, सचिन, प्रदीप, गजेंद्र, संतोष, मानूदास, रमेश, अतर सिंह, बादशाह, अमित आदि मौजूद रहे।
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