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149 साल बाद भी चकराता में नहीं सीवर लाइन
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:07 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
छावनी क्षेत्र में सीवर लाइन न होने के कारण घरों से निकलने वाली सीवर को सीधे गाड़-गदेरों में डाला जा रहा है। इससे बीमारियां पनपने का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने और मैले का सही ढंग से निस्तारण करने की मांग पर लोगों ने रक्षा संपदा के निदेशक को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में लोगों ने बताया कि वर्ष 1869 में छावनी परिषद चकराता बसाया गया। इसके बाद यहां पर आबादी का तेजी से विस्तार होता चला गया। लेकिन अब तक क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं बिछ सकी है। मैला निस्तारण के लिए लोगों ने खड्डों में सेप्टिक टैंक बनाए हुए हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इन टैंकों से रिसने वाला पानी जंगलों और खड्ड के पानी को दूषित कर रहा है। इन गाड-गदेरों के पानी का इस्तेमाल आगे चलकर कई लोग पीने के लिए करते हैं। जिससे बीमारियां पनपने का खतरा भी बना हुआ है।
स्थानीय निवासी पंकज जैन, डॉ. सरदार सिंह, राहुल चांदना, अमित जोशी, केशर चौहान, हरमोहन आनंद, अनिल चांदना, रविश अरोरा, प्रताप चौहान आदि का कहना है कि हर साल छावनी परिषद करोड़ों रुपये का बजट पब्लिक वेलफेयर के काम पर खर्च करता है, लेकिन आज तक सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधा की ओर परिषद का ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत सभी निकायों में सीवर लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन छावनी परिषद चकराता अब तक इस अभियान से अछूता है। परिषद के अवर अभियंता गिरीश खंडूरी ने बताया कि सीवर के लिए प्रस्ताव बना सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही सीवर बिछाने का कार्य कराया जाएगा।
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छावनी क्षेत्र में सीवर लाइन न होने के कारण घरों से निकलने वाली सीवर को सीधे गाड़-गदेरों में डाला जा रहा है। इससे बीमारियां पनपने का खतरा बना हुआ है। क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने और मैले का सही ढंग से निस्तारण करने की मांग पर लोगों ने रक्षा संपदा के निदेशक को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में लोगों ने बताया कि वर्ष 1869 में छावनी परिषद चकराता बसाया गया। इसके बाद यहां पर आबादी का तेजी से विस्तार होता चला गया। लेकिन अब तक क्षेत्र में सीवर लाइन नहीं बिछ सकी है। मैला निस्तारण के लिए लोगों ने खड्डों में सेप्टिक टैंक बनाए हुए हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। इन टैंकों से रिसने वाला पानी जंगलों और खड्ड के पानी को दूषित कर रहा है। इन गाड-गदेरों के पानी का इस्तेमाल आगे चलकर कई लोग पीने के लिए करते हैं। जिससे बीमारियां पनपने का खतरा भी बना हुआ है।
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स्थानीय निवासी पंकज जैन, डॉ. सरदार सिंह, राहुल चांदना, अमित जोशी, केशर चौहान, हरमोहन आनंद, अनिल चांदना, रविश अरोरा, प्रताप चौहान आदि का कहना है कि हर साल छावनी परिषद करोड़ों रुपये का बजट पब्लिक वेलफेयर के काम पर खर्च करता है, लेकिन आज तक सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधा की ओर परिषद का ध्यान नहीं दिया। भारत सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत सभी निकायों में सीवर लाइन बिछाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन छावनी परिषद चकराता अब तक इस अभियान से अछूता है। परिषद के अवर अभियंता गिरीश खंडूरी ने बताया कि सीवर के लिए प्रस्ताव बना सरकार को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही सीवर बिछाने का कार्य कराया जाएगा।
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