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पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की बीमा धनराशि देने के दिए आदेश
Updated Tue, 27 Mar 2018 10:48 PM IST
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गोपेश्वर। जिला उपभोक्ता फोरम ने व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा क्लेम के मामले में सुनवाई करते हुए इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी मुंबई और एसबीआई की जोशीमठ शाखा को पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की धनराशि आठ फीसदी ब्याज दर के साथ भुगतान करने के आदेश दिए हैं। साथ ही पीड़ित को मानसिक और आर्थिक क्षति के रुप में 45 दिनों के भीतर दस हजार रुपये भुगतान करने को कहा है।
जोशीमठ के पल्ला गांव की सुमन देवी ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर कहा था कि 21 नवंबर 2014 को उसके पति हरीश सिंह भट्ट की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। हरीश का एसबीआई शाखा जोशीमठ में खाता था और वे इसी बैंक खाते से लेन-देन करते थे। बैंक शाखा की ओर से इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी मुंबई के माध्यम से उनका चार लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा किया गया था। हरीश की दुर्घटना में मौत होने पर पत्नी सुमन ने बीमा कंपनी से बीमा क्लेम के भुगतान के लिए आवेदन किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 24 मार्च 2015 को बीमे के दावे को इसलिए अस्वीकार कर लिया कि हरीश की मौत वाहन के नीचे आने से नहीं बल्कि वाहन से कूदने से हुई है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रदीप पंत, सदस्य रैजा चौधरी व क्रांति भट्ट ने मामले की गहनता से जांच कराने के बाद बीमा कंपनी और एसबीआई शाखा को पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की बीमा धनराशि आठ फीसदी ब्याज दर से देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के रुप में दस हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
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जोशीमठ के पल्ला गांव की सुमन देवी ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर कहा था कि 21 नवंबर 2014 को उसके पति हरीश सिंह भट्ट की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। हरीश का एसबीआई शाखा जोशीमठ में खाता था और वे इसी बैंक खाते से लेन-देन करते थे। बैंक शाखा की ओर से इंडिया जनरल इंश्योरेंस कंपनी मुंबई के माध्यम से उनका चार लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा किया गया था। हरीश की दुर्घटना में मौत होने पर पत्नी सुमन ने बीमा कंपनी से बीमा क्लेम के भुगतान के लिए आवेदन किया, लेकिन बीमा कंपनी ने 24 मार्च 2015 को बीमे के दावे को इसलिए अस्वीकार कर लिया कि हरीश की मौत वाहन के नीचे आने से नहीं बल्कि वाहन से कूदने से हुई है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रदीप पंत, सदस्य रैजा चौधरी व क्रांति भट्ट ने मामले की गहनता से जांच कराने के बाद बीमा कंपनी और एसबीआई शाखा को पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की बीमा धनराशि आठ फीसदी ब्याज दर से देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति के रुप में दस हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।
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