{"_id":"5ab683914f1c1ba4238b725f","slug":"15219109303-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हालचाल पूछने वालों के नुस्खे से कुमार साहब परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हालचाल पूछने वालों के नुस्खे से कुमार साहब परेशान
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। एचएनबी गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र में चल रहे बाल उलार नाट्य समारोह मेें मनोरंजक नाटक ‘डॉक्टर बराबर बीमार’ का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से बाल कलाकारों ने बताया कि कैसे किसी आदमी के बीमार होने पर घर-परिवार सहित मुहल्ले-गली के लोग डॉक्टर की तरह सलाह देने लगते हैं।
विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के निर्देशन में नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार शाम ऋचा गौड़ व मिताली पुनेठा के निर्देशन में प्रसिद्ध नाटककार सआदत मंटो लिखित नाटक ‘डॉक्टर बराबर बीमार’ का मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत कुमार साहब के बिस्तर में पड़े होने से होती है। दरअसल कुमार साहब बीमार हैं और डॉक्टर के पास नहीं गए। घर में जो भी दोस्त या पड़ोसी आता, वह कुछ न कुछ नुस्खे बताता। देखते-देखते उनको मुफ्त में हजारों सलाह मिल जाती है। इससे कुमार साहब को लगता है कि ऐसे में तो वह और बीमार हो जाएंगे। तंग आकर वह सबको घर से भगा देते हैं और चैन की सांस लेते हैं। इस अवसर पर डा. मनोज सुंदरियाल, डा. आशुतोष गुप्ता, डा. अजीत पंवार, डा. संजय पांडे और डा. आलोक गौतम आदि मौजूद थे।
कहानी के पात्र
कुमार साहब-अभिनव पराशर, बाबी-तरनदीप सिंह, गिजवाजी-चिराग थापा, वेदिका-अनन्या गौड़ व आरती-मिताली पुनेठा।
विज्ञापन
विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर गढ़वाल विवि के लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के निर्देशन में नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार शाम ऋचा गौड़ व मिताली पुनेठा के निर्देशन में प्रसिद्ध नाटककार सआदत मंटो लिखित नाटक ‘डॉक्टर बराबर बीमार’ का मंचन किया गया। नाटक की शुरुआत कुमार साहब के बिस्तर में पड़े होने से होती है। दरअसल कुमार साहब बीमार हैं और डॉक्टर के पास नहीं गए। घर में जो भी दोस्त या पड़ोसी आता, वह कुछ न कुछ नुस्खे बताता। देखते-देखते उनको मुफ्त में हजारों सलाह मिल जाती है। इससे कुमार साहब को लगता है कि ऐसे में तो वह और बीमार हो जाएंगे। तंग आकर वह सबको घर से भगा देते हैं और चैन की सांस लेते हैं। इस अवसर पर डा. मनोज सुंदरियाल, डा. आशुतोष गुप्ता, डा. अजीत पंवार, डा. संजय पांडे और डा. आलोक गौतम आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
कहानी के पात्र
कुमार साहब-अभिनव पराशर, बाबी-तरनदीप सिंह, गिजवाजी-चिराग थापा, वेदिका-अनन्या गौड़ व आरती-मिताली पुनेठा।