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बारिश से मुरझाई फसलों में आएगी जान
Updated Thu, 22 Mar 2018 01:43 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ विकासनगर।
लंबे समय से बारिश की राह देख रहे काश्तकारों के लिए बारिश नेमत बन बरसी है। बारिश मुरझाई फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगी। बीते दो माह से बारिश न होने से खेतों की नमी पूरी तरह से गायब हो चुकी थी। काश्तकारों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही थी।
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि मैदानी अंचलों में बारिश गेहूं, राजमा, लहसुन और प्यास की फसल के लिए नेमन बन बरसी है। आम और लीची के लिए भी बारिश खासा लाभदायक साबित होगी। बारिश होने के बाद अब काश्तकार भिंडी, फरासबीन और मूंग की बुआई कर सकते हैं।
पहाड़ी अंचलों में हुई बारिश से खेतों में नई जान आएगी। जौनसार बावर में 80 प्रतिशत सिंचाई बारिश पर निर्भर है। ऐसे में बारिश से सेब, पुलम, खुमानी, अखरोट, शिमला मिर्च, टमाटर की फसलों को खासा लाभ मिलेगा। इन दिनों सेब, पुलम और खुमानी में फ्लावरिंग हो रही है। ऐसे में बारिश से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी। जिससे फ्लावरिंग में तेजी आएगी। मालूम हो कि अब तक बारिश न होने से जौनसार बावर क्षेत्र में काश्तकारों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही थी। फसलों की सही ढंग से ग्रोथ नहीं हो पा रही थी। काश्तकारों को अपनी फसले औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही थी।
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ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद
साहिया/त्यूनी। बारिश से जहां काश्तकारों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है। वहीं ओलावृष्टि से साहिया और त्यूनी के कुछ इलाकों में फसलों को नुकसान का अनुमान है। बुधवार सुबह बारिश के साथ कुनैन, रोटा, हमराड़, झबराड़, त्यूना, कोटी, मंगताड़, साहिया, अलसी, सकनी, कनबुआ, ककाड़ी, किमोठा, उपरोली, समाल्टा, पानुवा, मलेथा, दातनू, पाटा, हाजा-दसऊ, बोहा, खमरोली, शिबऊ, बिनऊ बंतऊ, रिखाड़, कोटी, कोठा तारली, नराया, लोरली, अस्टाड़, डकियारना, जामुवा, अस्टी, मलेथा, दुनवा समेत दो दर्जन गांव में पांच मिनट तक ओलावृष्टि हुई। जिससे गेहूं, जौ, मसूर, मटर की फसलों को नुकसान का अनुमान है। काश्तकार मोहर सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, संसार सिंह आदि का कहना है कि उन्होंने रवि की फसलों के लिए कृषि ऋण लिया हुआ है। पहले बारिश न होने से आधे से अधिक फसल सूखे की भेंट चढ़ गई। वहीं रही सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में पटवारी से जांच-रिपोर्ट मांगी गई है।
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लंबे समय से बारिश की राह देख रहे काश्तकारों के लिए बारिश नेमत बन बरसी है। बारिश मुरझाई फसलों के लिए संजीवनी का काम करेगी। बीते दो माह से बारिश न होने से खेतों की नमी पूरी तरह से गायब हो चुकी थी। काश्तकारों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही थी।
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एसएस सिंह ने बताया कि मैदानी अंचलों में बारिश गेहूं, राजमा, लहसुन और प्यास की फसल के लिए नेमन बन बरसी है। आम और लीची के लिए भी बारिश खासा लाभदायक साबित होगी। बारिश होने के बाद अब काश्तकार भिंडी, फरासबीन और मूंग की बुआई कर सकते हैं।
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पहाड़ी अंचलों में हुई बारिश से खेतों में नई जान आएगी। जौनसार बावर में 80 प्रतिशत सिंचाई बारिश पर निर्भर है। ऐसे में बारिश से सेब, पुलम, खुमानी, अखरोट, शिमला मिर्च, टमाटर की फसलों को खासा लाभ मिलेगा। इन दिनों सेब, पुलम और खुमानी में फ्लावरिंग हो रही है। ऐसे में बारिश से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहेगी। जिससे फ्लावरिंग में तेजी आएगी। मालूम हो कि अब तक बारिश न होने से जौनसार बावर क्षेत्र में काश्तकारों को सूखे की मार झेलनी पड़ रही थी। फसलों की सही ढंग से ग्रोथ नहीं हो पा रही थी। काश्तकारों को अपनी फसले औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही थी।
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ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद
साहिया/त्यूनी। बारिश से जहां काश्तकारों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है। वहीं ओलावृष्टि से साहिया और त्यूनी के कुछ इलाकों में फसलों को नुकसान का अनुमान है। बुधवार सुबह बारिश के साथ कुनैन, रोटा, हमराड़, झबराड़, त्यूना, कोटी, मंगताड़, साहिया, अलसी, सकनी, कनबुआ, ककाड़ी, किमोठा, उपरोली, समाल्टा, पानुवा, मलेथा, दातनू, पाटा, हाजा-दसऊ, बोहा, खमरोली, शिबऊ, बिनऊ बंतऊ, रिखाड़, कोटी, कोठा तारली, नराया, लोरली, अस्टाड़, डकियारना, जामुवा, अस्टी, मलेथा, दुनवा समेत दो दर्जन गांव में पांच मिनट तक ओलावृष्टि हुई। जिससे गेहूं, जौ, मसूर, मटर की फसलों को नुकसान का अनुमान है। काश्तकार मोहर सिंह चौहान, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह पंवार, संसार सिंह आदि का कहना है कि उन्होंने रवि की फसलों के लिए कृषि ऋण लिया हुआ है। पहले बारिश न होने से आधे से अधिक फसल सूखे की भेंट चढ़ गई। वहीं रही सही कसर ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी ने बताया कि मामले में पटवारी से जांच-रिपोर्ट मांगी गई है।