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रामलीला मैदान से राजधानी के लिए भरी हुंकार
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:28 PM IST
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गैरसैंण। रामलीला मैदान में हुई जनसभा में वक्ताओं ने कहा कि जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाए जाने का फैसला नहीं हो जाता, तब तक गैरसैंण की लड़ाई जारी रहेगी। 20 मार्च को विधानसभा भराड़ीसैंण का घेराव किया जाएगा।
गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के केंद्रीय संरक्षक राजीव लोचन शाह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी और उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने आम लोगों से आंदोलन में भागीदारी का आह्वान किया। राजधानी संघर्ष समिति के देहरादून प्रभारी उषा भट्ट ने कहा कि भाजपा कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इनका काम जनता को बेवकूफ बनाने के सिवा कुछ नहीं है, इसलिए मातृ शक्ति और युवा शक्ति को इस आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने के लिए राज्य निर्माण आंदोलन की भांति एक जुट होकर आगे आना होगा। पूर्व डिप्टी स्पीकर डा. एपी मैखुरी ने कहा कि शांतिपूर्वक चल रहे आंदोलन को कुचलने के लिए जिस प्रकार पुलिस बल का प्रयोग कर हमले का प्रयास किया गया है, उसकी निंदा की जानी चाहिए। ब्लाक प्रमुख सुमति बिष्ट, आंदोलनकारी महेशचंद्र पांडे, गम्भीर सिंह, अल्मोड़ा के जिला पंचायत सदस्य तथा संघर्ष समिति के अल्मोड़ा प्रभारी गजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि जब तक स्थायी राजधानी गैरसैंण नहीं हो जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। 20 मार्च को विधानसभा भराड़ीसैंण का घेराव किया जाएगा। इस दौरान संतोष कबड़वाल, सुमन नेगी, कमलेश्वरी, गीता देवी, विमला देवी , प्रकाश जोशी, शिव सिंह, ललित मोहन काठियाल, नारायण सिंह रावत, हरीश पंत, एमडी चंदोला, नारायणबगड़ की ब्लाक प्रमुख अंशी नेगी, देवाल की प्रमुख उर्मिला बिष्ट, गैरसैंण ब्लाक प्रमुख सुमति विष्ट, कर्णप्रयाग के पूर्व प्रमुख राजेंद्र सगोई, मोहित डिमरी, नारायण सिंह बिष्ट, देवेंद्र बल्ली, जसवंत, कमला पंवार, सरोज शाह , पूरन सिंह नेगी, कृष्णानेगी, नंदन नेगी आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
गैरसैंण को भी शहीद करना चाह रही सरकारें
गैरसैंण। भाकपा माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड के सत्ताधीशों को याद करना चाहिए कि 1994 की 43 शहादतें जो श्रीयंत्र टापू, मसूरी, खटीमा, मुजफ्फरनगर कांड के दौरान हुई। इन आंदोलनकारियों ने राज्य के साथ-साथ गैरसैंण राजधानी के लिए भी प्राण न्योछावर किए। आज सत्ता के नशे में चूर सरकारें गैरसैंण को भी शहीद करना चाह रही है, लेकिन हम शहीदों की शहादतें बेकार नहीं जाने देंगेे, गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाकर ही दम लेंगेे।
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राज्य आंदोलन की यादें हुई ताजा
गैरसैंण। रविवार को आयोजित जनाक्रोश महारैली में महिलाओं ने ढोल दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ झुमैला और चौफुले भी गाए। साथ ही आंदोलन स्थल पर आंदोलनकारियों के लिए सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया। लोगों ने घरों से निकलकर आंदोलनकारियों की मदद की, जिससे एक बार राज्य आंदोलन की यादें ताजा हो गई। ब्यूरो
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गैरसैंण राजधानी संघर्ष समिति के केंद्रीय संरक्षक राजीव लोचन शाह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी और उत्तराखंड महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने आम लोगों से आंदोलन में भागीदारी का आह्वान किया। राजधानी संघर्ष समिति के देहरादून प्रभारी उषा भट्ट ने कहा कि भाजपा कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इनका काम जनता को बेवकूफ बनाने के सिवा कुछ नहीं है, इसलिए मातृ शक्ति और युवा शक्ति को इस आंदोलन को मुकाम तक पहुंचाने के लिए राज्य निर्माण आंदोलन की भांति एक जुट होकर आगे आना होगा। पूर्व डिप्टी स्पीकर डा. एपी मैखुरी ने कहा कि शांतिपूर्वक चल रहे आंदोलन को कुचलने के लिए जिस प्रकार पुलिस बल का प्रयोग कर हमले का प्रयास किया गया है, उसकी निंदा की जानी चाहिए। ब्लाक प्रमुख सुमति बिष्ट, आंदोलनकारी महेशचंद्र पांडे, गम्भीर सिंह, अल्मोड़ा के जिला पंचायत सदस्य तथा संघर्ष समिति के अल्मोड़ा प्रभारी गजेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि जब तक स्थायी राजधानी गैरसैंण नहीं हो जाती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। 20 मार्च को विधानसभा भराड़ीसैंण का घेराव किया जाएगा। इस दौरान संतोष कबड़वाल, सुमन नेगी, कमलेश्वरी, गीता देवी, विमला देवी , प्रकाश जोशी, शिव सिंह, ललित मोहन काठियाल, नारायण सिंह रावत, हरीश पंत, एमडी चंदोला, नारायणबगड़ की ब्लाक प्रमुख अंशी नेगी, देवाल की प्रमुख उर्मिला बिष्ट, गैरसैंण ब्लाक प्रमुख सुमति विष्ट, कर्णप्रयाग के पूर्व प्रमुख राजेंद्र सगोई, मोहित डिमरी, नारायण सिंह बिष्ट, देवेंद्र बल्ली, जसवंत, कमला पंवार, सरोज शाह , पूरन सिंह नेगी, कृष्णानेगी, नंदन नेगी आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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गैरसैंण को भी शहीद करना चाह रही सरकारें
गैरसैंण। भाकपा माले नेता इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड के सत्ताधीशों को याद करना चाहिए कि 1994 की 43 शहादतें जो श्रीयंत्र टापू, मसूरी, खटीमा, मुजफ्फरनगर कांड के दौरान हुई। इन आंदोलनकारियों ने राज्य के साथ-साथ गैरसैंण राजधानी के लिए भी प्राण न्योछावर किए। आज सत्ता के नशे में चूर सरकारें गैरसैंण को भी शहीद करना चाह रही है, लेकिन हम शहीदों की शहादतें बेकार नहीं जाने देंगेे, गैरसैंण को राज्य की स्थायी राजधानी बनाकर ही दम लेंगेे।
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राज्य आंदोलन की यादें हुई ताजा
गैरसैंण। रविवार को आयोजित जनाक्रोश महारैली में महिलाओं ने ढोल दमाऊं और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ झुमैला और चौफुले भी गाए। साथ ही आंदोलन स्थल पर आंदोलनकारियों के लिए सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया। लोगों ने घरों से निकलकर आंदोलनकारियों की मदद की, जिससे एक बार राज्य आंदोलन की यादें ताजा हो गई। ब्यूरो