{"_id":"5aa19e424f1c1ba6768b4638","slug":"15205414861-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिकों ने दी ट्रेंच विधि से गन्ना बुआई की सलाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिकों ने दी ट्रेंच विधि से गन्ना बुआई की सलाह
Updated Fri, 09 Mar 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिकों ने काश्तकारों को ट्रेंच विधि से वसंत कालीन गन्ना की बुआई की सलाह दी है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि इस विधि से गन्ने की बुआई कर काश्तकार कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि दून घाटी क्षेत्र में वसंत कालीन गन्ने की बुआई चल रही है। जो 70-80 प्रतिशत भू-भाग में की जाती है। ऐसे में इस नवीनतम विधि को अपना काश्तकार मालामाल बन सकते हैं। कहा ट्रेंच विधि से गन्ना बोने के लिए सबसे पहले गहरी जुताई कर खेत समतल करने की जरूरत होती है। इसके बाद जुताई से पूर्व हल्की सिंचाई की जाती है। स्वस्थ बीज के दो आंख के टुकड़ों को काटने के बाद 100 लीटर पानी में 200 ग्राम कार्बोडाजिम कवकनाशी मिलाकर उसमें 20 मिनट तक टुकड़े डुबाए रखने चाहिए। जिसके बाद बीज को खेत में बोना चाहिए। बुआई के बाद दीमक या अंकुर बेधक कीट के नियंत्रण के लिए 1000 लीटर पानी में 6.25 लीटर क्लोरपायरी फास या 600 मिली पानी में क्लोर एंट्रीनिप्रोल का छिड़काव करने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि काश्तकारों को इस विधि को बेहतर ढंग से समझने के लिए केंद्र की सहायता ले सकते हैं।
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिकों ने काश्तकारों को ट्रेंच विधि से वसंत कालीन गन्ना की बुआई की सलाह दी है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि इस विधि से गन्ने की बुआई कर काश्तकार कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
उन्होंने बताया कि दून घाटी क्षेत्र में वसंत कालीन गन्ने की बुआई चल रही है। जो 70-80 प्रतिशत भू-भाग में की जाती है। ऐसे में इस नवीनतम विधि को अपना काश्तकार मालामाल बन सकते हैं। कहा ट्रेंच विधि से गन्ना बोने के लिए सबसे पहले गहरी जुताई कर खेत समतल करने की जरूरत होती है। इसके बाद जुताई से पूर्व हल्की सिंचाई की जाती है। स्वस्थ बीज के दो आंख के टुकड़ों को काटने के बाद 100 लीटर पानी में 200 ग्राम कार्बोडाजिम कवकनाशी मिलाकर उसमें 20 मिनट तक टुकड़े डुबाए रखने चाहिए। जिसके बाद बीज को खेत में बोना चाहिए। बुआई के बाद दीमक या अंकुर बेधक कीट के नियंत्रण के लिए 1000 लीटर पानी में 6.25 लीटर क्लोरपायरी फास या 600 मिली पानी में क्लोर एंट्रीनिप्रोल का छिड़काव करने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि काश्तकारों को इस विधि को बेहतर ढंग से समझने के लिए केंद्र की सहायता ले सकते हैं।
विज्ञापन