{"_id":"5aa198a74f1c1b8e778b465c","slug":"15205400512-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"योग है आतंकवाद के खात्मे का अचूक अस्त्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योग है आतंकवाद के खात्मे का अचूक अस्त्र
Updated Fri, 09 Mar 2018 01:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजला/ऋषिकेश।
योगी योगा चाइना संस्थान के प्रमुख व योगाचार्य मोहन भंडारी का कहना है कि भारतीय प्राचीन योग विद्या के विश्व में फैलने से दुनिया को आतंकवाद से निजात मिल सकती है। योग को अपनाने से मनुष्य को शारीरिक व दिमागी स्तर पर भी सुकून मिलता है, लिहाजा एक प्रसन्नचित व्यक्ति ही दूसरों को खुशी दे सकता है।
तीर्थनगरी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में विशेषज्ञ के तौर पर शिरकत करने वाले भारतीय मूल के योगाचार्य मोहन भंडारी को चीन में भारतीय योग पद्धति को विस्तार देने का श्रेय जाता है। योगाचार्य भंडारी का मानना है कि दुनिया में आतंकी गतिविधियों की मुख्य वजह असंतुष्टि है। योग शरीर की बजाए मन पर अधिक असरकारक होता है। मन के शांत होने से ही दिमाग सकारात्मक हो सकता है। योग को लेकर वर्तमान में दुनियाभर में वातावरण बन रहा है। भारतीय योग विद्या के अपनाने से ही दुनिया में शांति का माहौल बनेगा व आतंकवाद निरमूल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए बच्चों को योग विद्या से जोड़ने की जरूरत है।
कौन हैं मोहन भंडारी
योगाचार्य मोहन भंडारी ने वर्ष 2003 में चीन में योगी योगा चाइना नामक योग सेंटर स्थापित किया। तब वहां गिन-चुने लोग ही भारतीय योग पद्धति के बारे में जानते थे। इसके बाद उन्होंने 2004 के बाद करीब तीन-चार साल के समयांतराल में चीन में योगी योगा चाइना के नाम से चार कॉलेजों की स्थापना की। इसके बाद चीन में भारतीय योग को पहचान मिलने लगी और इसे अपनाया जाने लगा। वह वर्तमान में वहां योग के आठ सेंटर संचालित करते हैं जबकि देश में योगी योगा चाइना से संबद्ध 67 योग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। योगाचार्य मोहन भंडारी ने बताया कि प्रत्येक क्लब में योग की कक्षाएं अनिवार्यरूप से संचालित होती हैं। चीन में योग के प्रति काफी हद तक रुझान बढ़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
योगी योगा चाइना संस्थान के प्रमुख व योगाचार्य मोहन भंडारी का कहना है कि भारतीय प्राचीन योग विद्या के विश्व में फैलने से दुनिया को आतंकवाद से निजात मिल सकती है। योग को अपनाने से मनुष्य को शारीरिक व दिमागी स्तर पर भी सुकून मिलता है, लिहाजा एक प्रसन्नचित व्यक्ति ही दूसरों को खुशी दे सकता है।
तीर्थनगरी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में विशेषज्ञ के तौर पर शिरकत करने वाले भारतीय मूल के योगाचार्य मोहन भंडारी को चीन में भारतीय योग पद्धति को विस्तार देने का श्रेय जाता है। योगाचार्य भंडारी का मानना है कि दुनिया में आतंकी गतिविधियों की मुख्य वजह असंतुष्टि है। योग शरीर की बजाए मन पर अधिक असरकारक होता है। मन के शांत होने से ही दिमाग सकारात्मक हो सकता है। योग को लेकर वर्तमान में दुनियाभर में वातावरण बन रहा है। भारतीय योग विद्या के अपनाने से ही दुनिया में शांति का माहौल बनेगा व आतंकवाद निरमूल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए बच्चों को योग विद्या से जोड़ने की जरूरत है।
विज्ञापन
कौन हैं मोहन भंडारी
योगाचार्य मोहन भंडारी ने वर्ष 2003 में चीन में योगी योगा चाइना नामक योग सेंटर स्थापित किया। तब वहां गिन-चुने लोग ही भारतीय योग पद्धति के बारे में जानते थे। इसके बाद उन्होंने 2004 के बाद करीब तीन-चार साल के समयांतराल में चीन में योगी योगा चाइना के नाम से चार कॉलेजों की स्थापना की। इसके बाद चीन में भारतीय योग को पहचान मिलने लगी और इसे अपनाया जाने लगा। वह वर्तमान में वहां योग के आठ सेंटर संचालित करते हैं जबकि देश में योगी योगा चाइना से संबद्ध 67 योग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। योगाचार्य मोहन भंडारी ने बताया कि प्रत्येक क्लब में योग की कक्षाएं अनिवार्यरूप से संचालित होती हैं। चीन में योग के प्रति काफी हद तक रुझान बढ़ा है।
विज्ञापन