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संस्कृत के विकास के लिए व्यवहार की भाषा बनाना जरूरी
Updated Tue, 27 Feb 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
मुनिकीरेती कैलासगेट स्थित समिति के पुस्तकालय परिसर में संस्कृत छात्र सेवा समिति का 10 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर सोमवार को संपन्न हो गया। शिविर के दौरान लोगों को संस्कृत से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया गया।
संभाषण शिविर में संस्कृत छात्र सेवा समिति के अध्यक्ष कैलास व्यास ने संस्कृत को व्यवहार में लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषायी विकास के लिए संस्कृत आधारित कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है। भाषा से ही संस्कृत का विकास संभव है।
संस्कृत छात्र सेवा समिति के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य जितेंद्र भट्ट ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। उत्तराखंड में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त संस्कृत को आगे बढ़ाने का सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। जनार्दन कैरवान ने कहा कि सरकार संस्कृत के विकास को लेकर लापरवाह बनी हुई है, जिसके कारण राज्य में भाषायी विकास थम गया है। इस अवसर पर राजेश शर्मा, सुभाष डोभाल, शांति मैठानी, पुरुषोत्तम कोठारी, सर्वेश तिवाड़ी, देवेंद्र भट्ट, विश्वजीत बहुगुणा, राकेश नौटियाल आदि मौजूद थे।
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मुनिकीरेती कैलासगेट स्थित समिति के पुस्तकालय परिसर में संस्कृत छात्र सेवा समिति का 10 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर सोमवार को संपन्न हो गया। शिविर के दौरान लोगों को संस्कृत से जुड़ी रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित किया गया।
संभाषण शिविर में संस्कृत छात्र सेवा समिति के अध्यक्ष कैलास व्यास ने संस्कृत को व्यवहार में लाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भाषायी विकास के लिए संस्कृत आधारित कार्यक्रमों का आयोजन जरूरी है। भाषा से ही संस्कृत का विकास संभव है।
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संस्कृत छात्र सेवा समिति के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य जितेंद्र भट्ट ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। उत्तराखंड में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त संस्कृत को आगे बढ़ाने का सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए। जनार्दन कैरवान ने कहा कि सरकार संस्कृत के विकास को लेकर लापरवाह बनी हुई है, जिसके कारण राज्य में भाषायी विकास थम गया है। इस अवसर पर राजेश शर्मा, सुभाष डोभाल, शांति मैठानी, पुरुषोत्तम कोठारी, सर्वेश तिवाड़ी, देवेंद्र भट्ट, विश्वजीत बहुगुणा, राकेश नौटियाल आदि मौजूद थे।
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