{"_id":"5a904dcf4f1c1bca798bb632","slug":"151940676220-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शासन ने यूजर्स चार्जेज का ब्यौरा किया तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शासन ने यूजर्स चार्जेज का ब्यौरा किया तलब
Updated Sat, 03 Mar 2018 10:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
श्रीनगर। शासन ने राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल के यूजर्स चार्जेज का तीन साल का लेखा-जोखा तलब किया है। शासन ने कॉलेज के प्राचार्य को पत्र भेजकर वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2017-18 तक की अवधि में यूजर्स चार्जेज के रूप में जमा धनराशि का विवरण देने को कहा है।
बेस अस्पताल श्रीकोट गंगानाली में मरीजों की ओपीडी रजिस्ट्रेशन और लैब परीक्षण सहित अन्य मदों में मरीजों से प्रतिमाह औसतन लगभग 5-6 लाख रुपये यूजर्स चार्जेज (शुल्क) के रूप में जमा होते हैं। इस धनराशि का कुछ हिस्सा अस्पताल प्रबंधन इमरजेंसी की स्थिति में जरूरत को देखते हुए किसी सामग्री की खरीद पर खर्च कर सकता है, लेकिन पूर्व में कॉलेज प्रशासन ने इसको कर्मचारी के मानदेय पर खर्च कर दिया।
शासन ने इसको वित्तीय अनियमितता मानते हुए करीब ढाई साल पहले बेस अस्पताल के यूजर्स चार्जेज के उपभोग पर रोक लगा दी थी। इसके बाद संपूर्ण यूजर्स चार्जेज कोषागार में जमा होने लगा। पिछले दिनों देहरादून मेें हुई बैठक में कॉलेज के मौजूदा प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने यूजर्स चार्जेज खर्च न कर पाने की समस्या को अधिकारियों के समक्ष रखा, जिस पर शासन ने 50 फीसदी यूजर्स चार्जेज को इमरजेंसी केस के लिए अस्पताल के स्तर पर रोके जाने की सहमति दे दी।
विज्ञापन
इसी क्रम में शासन ने शुक्रवार को कॉलेज प्रशासन से तीन साल में यूजर्स चार्जेज की रूप मेें कोषागार में जमा कराई गई धनराशि का विवरण मांगा। प्राचार्य प्रो. रावत ने बताया कि शासन की ओर मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।
बेस अस्पताल श्रीकोट गंगानाली में मरीजों की ओपीडी रजिस्ट्रेशन और लैब परीक्षण सहित अन्य मदों में मरीजों से प्रतिमाह औसतन लगभग 5-6 लाख रुपये यूजर्स चार्जेज (शुल्क) के रूप में जमा होते हैं। इस धनराशि का कुछ हिस्सा अस्पताल प्रबंधन इमरजेंसी की स्थिति में जरूरत को देखते हुए किसी सामग्री की खरीद पर खर्च कर सकता है, लेकिन पूर्व में कॉलेज प्रशासन ने इसको कर्मचारी के मानदेय पर खर्च कर दिया।
विज्ञापन
शासन ने इसको वित्तीय अनियमितता मानते हुए करीब ढाई साल पहले बेस अस्पताल के यूजर्स चार्जेज के उपभोग पर रोक लगा दी थी। इसके बाद संपूर्ण यूजर्स चार्जेज कोषागार में जमा होने लगा। पिछले दिनों देहरादून मेें हुई बैठक में कॉलेज के मौजूदा प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने यूजर्स चार्जेज खर्च न कर पाने की समस्या को अधिकारियों के समक्ष रखा, जिस पर शासन ने 50 फीसदी यूजर्स चार्जेज को इमरजेंसी केस के लिए अस्पताल के स्तर पर रोके जाने की सहमति दे दी।
विज्ञापन
इसी क्रम में शासन ने शुक्रवार को कॉलेज प्रशासन से तीन साल में यूजर्स चार्जेज की रूप मेें कोषागार में जमा कराई गई धनराशि का विवरण मांगा। प्राचार्य प्रो. रावत ने बताया कि शासन की ओर मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।