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गैरसैंण को 18 साल से रखा हा शए पर
Updated Thu, 22 Feb 2018 10:49 PM IST
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गैरसैंण। सात दिसंबर से शुरू हुए स्थायी राजधानी निर्माण का आंदोलन जिले के विभिन्न स्थानों पर हो रहा है। कुलसारी, थराली, देवाल, कर्णप्रयाग सहित कई स्थानों पर लोगों ने संघर्ष समिति का गठन कर राजधानी गैरसैंण को बनाए जाने के लिए रणनीति बनानी शुरू की है। यही नहीं कुमाऊं के रवि भारती पिछले 19 फरवरी से आमरण अनशन पर हैं, तो चौखुटिया के जिला पंचायत सदस्य गजेंद्र सिंह बिष्ट ने यहां पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया है।
आंदोलन के लिए संघर्ष समिति बनाने वाले सुरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि गैरसैंण राजधानी मांग नहीं पहाड़ की दरकार है के नारे के साथ आज पूरे प्रदेश में फैल रहा है। लेकिन 18 सालों से राजनीति के ठेकेदारों ने राजधानी के मसले को हाशिए पर रखा। समिति के नव निर्वाचित अध्यक्ष नारायण सिंह का कहना है कि पहाड़ में पलायन, रोजगार सहित सुविधाओं का टोटा अलग प्रदेश बनने के बाद भी दूर नहीं हो पाया। ब्लकि अपना प्रदेश बनने के बाद हालात और भी खराब हो गए। अविभाजित प्रदेश में यहां स्कूलों में मास्टर और अस्प्तालों में डॉक्टर थे लेकिन अलग प्रदेश बनने के बाद पहाड़ी जनपदों के सभी विभाग अधिकारी और कर्मचारी विहीन है। जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूरन सिंह नेगी का कहना है कि राज्य गठन के वक्त न्यायालय कुमाऊं और राजधानी गढ़वाल में बनाने की बात हुई थी। लेकिन प्रदेश की सरकारों ने 18 सालों तक राजधानी का मसला लटका रखा है। राजधानी निर्माण के लिए अनशन पर बैठे कुमाऊं के रवि भारती ने कहा कि गैरसैंण की राजधानी पहाड़ की दरकार है। राजधानी के लिए अब एक और राज्य आंदोलन की भांति आंदोलन किया जाएगा। एक फरवरी से सात फरवरी तक आमरण अनशन कर चुके राज्य आंदोलनकारी हरीश पंत ने कहा कि यदि सरकार मामले में कार्रवाई नहीं करती तो राजधानी निर्माण के लिए पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
आंदोलन के लिए संघर्ष समिति बनाने वाले सुरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि गैरसैंण राजधानी मांग नहीं पहाड़ की दरकार है के नारे के साथ आज पूरे प्रदेश में फैल रहा है। लेकिन 18 सालों से राजनीति के ठेकेदारों ने राजधानी के मसले को हाशिए पर रखा। समिति के नव निर्वाचित अध्यक्ष नारायण सिंह का कहना है कि पहाड़ में पलायन, रोजगार सहित सुविधाओं का टोटा अलग प्रदेश बनने के बाद भी दूर नहीं हो पाया। ब्लकि अपना प्रदेश बनने के बाद हालात और भी खराब हो गए। अविभाजित प्रदेश में यहां स्कूलों में मास्टर और अस्प्तालों में डॉक्टर थे लेकिन अलग प्रदेश बनने के बाद पहाड़ी जनपदों के सभी विभाग अधिकारी और कर्मचारी विहीन है। जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूरन सिंह नेगी का कहना है कि राज्य गठन के वक्त न्यायालय कुमाऊं और राजधानी गढ़वाल में बनाने की बात हुई थी। लेकिन प्रदेश की सरकारों ने 18 सालों तक राजधानी का मसला लटका रखा है। राजधानी निर्माण के लिए अनशन पर बैठे कुमाऊं के रवि भारती ने कहा कि गैरसैंण की राजधानी पहाड़ की दरकार है। राजधानी के लिए अब एक और राज्य आंदोलन की भांति आंदोलन किया जाएगा। एक फरवरी से सात फरवरी तक आमरण अनशन कर चुके राज्य आंदोलनकारी हरीश पंत ने कहा कि यदि सरकार मामले में कार्रवाई नहीं करती तो राजधानी निर्माण के लिए पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा।
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