{"_id":"5a888f244f1c1ba3268bac46","slug":"151889919112-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैज्ञानिकों ने पुरानी फसलों के उत्पादन पर दिया जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैज्ञानिकों ने पुरानी फसलों के उत्पादन पर दिया जोर
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ साहिया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो पूसा नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कोरूवा गांव में आयोजित कार्यशाला में काश्तकारों को विलुप्त होती पुरानी फसलों और जैव विविधता के बारे में जानकारी दी गई। काश्तकारों को फावड़ा, मेजसेलर और पुरानी फसलों की बीज किट वितरित की गई। इस मौके पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रनबीर सिंह ने किया। डॉ. कैलाश चंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु सभी प्रकार की फसलों के उपयुक्त है, लेकिन आज काश्तकार पुरानी फसलों का उत्पादन बंद करते जा रहे हैं। जिससे कई फसलों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। डॉ. एसपी अहलावत ने किसानों को सामुदायिक बीज बैंक और कृषक अधिकार संरक्षण के बारे में जानकारी दी। पादप संसाधन ब्यूरो के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह ने पुरानी फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में डॉ. दिनेश चंद्र सेमवाल, डॉ. संजय कुमार राठी ने भी विचार रखें। इस मौके पर स्याणा बुद्ध सिंह, ग्राम प्रधान सुनीता तोमर, वीरेंद्र सिंह तोमर, नरेंद्र सिंह तोमर, संतन सिंह तोमर, आनंद सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो पूसा नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को कोरूवा गांव में आयोजित कार्यशाला में काश्तकारों को विलुप्त होती पुरानी फसलों और जैव विविधता के बारे में जानकारी दी गई। काश्तकारों को फावड़ा, मेजसेलर और पुरानी फसलों की बीज किट वितरित की गई। इस मौके पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रनबीर सिंह ने किया। डॉ. कैलाश चंद्र भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड की जलवायु सभी प्रकार की फसलों के उपयुक्त है, लेकिन आज काश्तकार पुरानी फसलों का उत्पादन बंद करते जा रहे हैं। जिससे कई फसलों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। डॉ. एसपी अहलावत ने किसानों को सामुदायिक बीज बैंक और कृषक अधिकार संरक्षण के बारे में जानकारी दी। पादप संसाधन ब्यूरो के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह ने पुरानी फसलों के महत्व के बारे में जानकारी दी। कार्यशाला में डॉ. दिनेश चंद्र सेमवाल, डॉ. संजय कुमार राठी ने भी विचार रखें। इस मौके पर स्याणा बुद्ध सिंह, ग्राम प्रधान सुनीता तोमर, वीरेंद्र सिंह तोमर, नरेंद्र सिंह तोमर, संतन सिंह तोमर, आनंद सिंह तोमर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन