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जैविक शौचालयों में ताले लटके, पर्यटक श्रद्घालु परेशान
Updated Mon, 05 Feb 2018 01:36 AM IST
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जैविक शौचालयों में लटके ताले, सैलानी परेशान
-- निशुल्क शौचालय में सुविधा नहीं मिलने से पैसे चुका रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
बीएचईएल (भेल) की मदद से चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित रोडवेज बस स्टेंड पर 15 लाख की लागत से बने निशुल्क जैविक शौचालयों में ताले लटके हैं। सौंदर्य प्रसाधन की सुविधा नहीं मिलने से हर रोज हजारों सैलानियों को शौच, यूरिनल आदि के लिए आसपास बने दूसरे शौचालयों में पैसे चुकाने को विवश होना पड़ रहा है।
गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन की पहल पर चारधाम बीटीसी स्थित पर्यटन अतिथि गृह के समीप भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) के सहयोग से जैविक शौचालय का निर्माण किया गया था, जिसका उद्देश्य देश-विदेश से हर रोज यहां आने वाले पर्यटकों व तीर्थाटकों को सौंदर्य प्रसाधन की निशुल्क सुविधा देना था। फेडरेशन ऑफ इंडिया चेंबर ऑफ इंडस्ट्री ने इसके रख रखाव की जिम्मेदारी पंचतत्व कंपनी को सौंपी है, लेकिन कंपनी इसका ठीक से संचालन नहीं कर पा रही है। बीते करीब एक सप्ताह से जैविक शौचालयों में ताले लटके हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
जैविक शौचालयों को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। एक दिन में शौचालय का इस्तेमाल 250 लोग ही कर सकते हैं। इतनी संख्या में सुबह सबेरे लोग शौचालयों का उपयोग कर लेते हैं, इसके बाद शौचालयों को बंद कर दिया जाता है। इसकी वजह बैक्टीरिया का संरक्षण है। भविष्य में शौचालय की क्षमता बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा।
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- सिद्धार्थ शर्मा, डायरेक्टर पंचतत्व कंपनी, दिल्ली
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-- निशुल्क शौचालय में सुविधा नहीं मिलने से पैसे चुका रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
बीएचईएल (भेल) की मदद से चारधाम यात्रा बस ट्रांजिट कंपाउंड स्थित रोडवेज बस स्टेंड पर 15 लाख की लागत से बने निशुल्क जैविक शौचालयों में ताले लटके हैं। सौंदर्य प्रसाधन की सुविधा नहीं मिलने से हर रोज हजारों सैलानियों को शौच, यूरिनल आदि के लिए आसपास बने दूसरे शौचालयों में पैसे चुकाने को विवश होना पड़ रहा है।
गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन की पहल पर चारधाम बीटीसी स्थित पर्यटन अतिथि गृह के समीप भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) के सहयोग से जैविक शौचालय का निर्माण किया गया था, जिसका उद्देश्य देश-विदेश से हर रोज यहां आने वाले पर्यटकों व तीर्थाटकों को सौंदर्य प्रसाधन की निशुल्क सुविधा देना था। फेडरेशन ऑफ इंडिया चेंबर ऑफ इंडस्ट्री ने इसके रख रखाव की जिम्मेदारी पंचतत्व कंपनी को सौंपी है, लेकिन कंपनी इसका ठीक से संचालन नहीं कर पा रही है। बीते करीब एक सप्ताह से जैविक शौचालयों में ताले लटके हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
जैविक शौचालयों को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। एक दिन में शौचालय का इस्तेमाल 250 लोग ही कर सकते हैं। इतनी संख्या में सुबह सबेरे लोग शौचालयों का उपयोग कर लेते हैं, इसके बाद शौचालयों को बंद कर दिया जाता है। इसकी वजह बैक्टीरिया का संरक्षण है। भविष्य में शौचालय की क्षमता बढ़ाने पर कार्य किया जाएगा।
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- सिद्धार्थ शर्मा, डायरेक्टर पंचतत्व कंपनी, दिल्ली