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मोबाइल एप से होगा बाघों का डाटा कलेक् शन

Fri, 02 Feb 2018 02:00 AM IST
Updated Fri, 02 Feb 2018 02:00 AM IST
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मोबाइल एप से होगा बाघों का डाटा कलेक्
शन
मोबाइल एप से होगा बाघों का डाटा कलेक्शन
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-- 12 बीटों में 12 बीट अधिकारी और 12 सहायक करेंगे गणना

अमर उजाला ब्यूरो
रायवाला। राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में अखिल भारतीय बाघ गणना कार्यक्रम शुरू किया गया। 20 दिनों तक रेंज की कुल 12 बीटों में प्रशिक्षित 12 बीट अधिकारी और 12 सहायकों द्वारा वन सीमा के भीतर गणना शुरू की गई है। राजाजी प्रशासन की और से हर चार सालों में की जाने वाली बाघ गणना कार्यक्रम में इस बार वन्यजीवों और वनस्पति आदि की गणना की जानी है, जिससे वन सीमा के भीतर वन्यजीवों की सख्यां के आंकलन के साथ-साथ वनस्पति उपज और प्रजातियों के आंकलन और जानकारी का संग्रह एकत्र हो सकेगा।
वृहस्पतिवार को मोतीचूर रेंज में अखिल भारतीय बाघ गणना कार्यक्रम शुरू किया गया। राजाजी प्रशासन द्वारा हर चार सालों में बाघ गणना कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके लिये प्रशिक्षित विभागीय टीम को पहली फरवरी की सुबह रवाना कर दिया गया है। रेंज अधिकारी विकास रावत ने बताया की इस बार गणना कार्यक्रम में पुरानी और नई मोबाइल तकनीक को एक साथ उपयोग किया जा रहा है। पुरानी तकनीक के तहत वन्यजीवों के पैरों के निशान, पेड़ों पर खरोच, मल मूत्र और प्रत्यक्ष रूप से देखने के आधार में गणना की जानी है। इसके अलावा इस बार टीम को स्मार्ट फोन पर एम-स्ट्राइप मोबाइल एप के जरिए विकसित साफ्टवेयर पर भी गणना के आंकड़े एकत्र किये जाएंगे।
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आधी बीटों में ही हो सकेगी मोबाइल एप से गणना
रायवाला। रेंज में सभी वीट अधिकारियों के पास स्मार्ट फोन नहीं होने के चलते करीब छह बीटों में ही मोबाइल एप के जरिये गणना हो सकेगी। शेष बीटों में पुरानी तकनीक से ही गणना कार्यक्रम चलाया जायेगा।
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इस बार वनस्पति गणना
रायवाला। वन्यजीवों के साथ-साथ गणना टीम को वन सीमा के भीतर वनस्पति की गणना भी करनी है, जिससे उस बीट के भू-स्वरूप और उपज के अलावा प्रजातियों का संग्रह भी एकत्र हो सकेंगे।


इस तरह से काम करेगा साफ्टवेयर
पहली बार वन्यप्राणियों की गणना को मोबाइल एप के माध्यम से की जाएगी। जिसमें कैमरा ट्रेप के साथ प्रत्येक चिन्ह की रिकार्डिंग फोटोग्राफ जीपीएस लोकेशन से पुष्टि हो जाएगी। वन्य प्राणियों की गणना के दौरान साफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा।
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