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यूडीआरपी के तहत होगा कोठियालसैंण भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट
Updated Thu, 01 Feb 2018 10:12 PM IST
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गोपेश्वर। जिले में कोठियालसैंण, बिरही, गोविंदघाट और देवलीबगड़ के भूस्खलन क्षेत्रों में जल्द ही सुधारीकरण कार्य शुरू हो जाएंगे। शासन ने यूडीआरपी (उत्तराखंड आपदा रिकवरी परियोजना) के तहत इन भूस्खलन क्षेत्रों के ट्रीटमेंट के लिए 53 करोड़ 77 लाख रुपये मंजूर किए हैं। सबसे अधिक राहत कोठियालसैंण के बाशिंदों को मिली है।
कोठियालसैंण में वर्ष 2013 की आपदा के बाद से हर वर्ष अलकनंदा से भूस्खलन हो रहा है। अलकनंदा साइड के कई परिवार अपने आवासीय भवनों को छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों में रहने लगे हैं। वर्ष 2015 में राजकीय सिंचाई खंड गोपेश्वर ने यहां भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट के लिए सात करोड़ का इस्टीमेट बनाया था, लेकिन अधिक दायरे में भूस्खलन होने से फिलहाल ट्रीटमेंट को रोक लिया गया। अब इसके ट्रीटमेंट के लिए शासन से यूडीआरपी के तहत 11 करोड़ 77 लाख की धनराशि मंजूर हुई है। अलकनंदा और बिरही नदी के संगम पर स्थित बिरही कस्बे में नदी साइड के भू-कटाव को रोकने के लिए 16 करोड़ की धनराशि मंजूर की गई है, जिससे भू-कटाव पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वार गोविंदघाट में भी अलकनंदा के कटाव को रोकने के लिए 10 करोड़ की स्वीकृति मिली है। यहां वर्ष 2013 से ही पांडुकेश्वर गांव के नीचे से नदी से भू-कटाव हो रहा है। साथ ही भोटिया जनजाति गांव देवलीबगड़ की सुरक्षा के लिए भी परियोजना के तहत 16 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर जिले के इन भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कार्य किया जा रहा है। कोठियालसैंण मोहल्ले के निचले हिस्से का ट्रीटमेंट बेहद जरुरी है। यूडीआरपी के तहत जल्द ही इन योजनाओं की निविदाएं आमंत्रित कर दी जाएंगी।
कोठियालसैंण में वर्ष 2013 की आपदा के बाद से हर वर्ष अलकनंदा से भूस्खलन हो रहा है। अलकनंदा साइड के कई परिवार अपने आवासीय भवनों को छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थानों में रहने लगे हैं। वर्ष 2015 में राजकीय सिंचाई खंड गोपेश्वर ने यहां भूस्खलन क्षेत्र के ट्रीटमेंट के लिए सात करोड़ का इस्टीमेट बनाया था, लेकिन अधिक दायरे में भूस्खलन होने से फिलहाल ट्रीटमेंट को रोक लिया गया। अब इसके ट्रीटमेंट के लिए शासन से यूडीआरपी के तहत 11 करोड़ 77 लाख की धनराशि मंजूर हुई है। अलकनंदा और बिरही नदी के संगम पर स्थित बिरही कस्बे में नदी साइड के भू-कटाव को रोकने के लिए 16 करोड़ की धनराशि मंजूर की गई है, जिससे भू-कटाव पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
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हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वार गोविंदघाट में भी अलकनंदा के कटाव को रोकने के लिए 10 करोड़ की स्वीकृति मिली है। यहां वर्ष 2013 से ही पांडुकेश्वर गांव के नीचे से नदी से भू-कटाव हो रहा है। साथ ही भोटिया जनजाति गांव देवलीबगड़ की सुरक्षा के लिए भी परियोजना के तहत 16 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। बदरीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर जिले के इन भूस्खलन जोन का ट्रीटमेंट कार्य किया जा रहा है। कोठियालसैंण मोहल्ले के निचले हिस्से का ट्रीटमेंट बेहद जरुरी है। यूडीआरपी के तहत जल्द ही इन योजनाओं की निविदाएं आमंत्रित कर दी जाएंगी।
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