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चंद्रग्रहण पर मंदिरों के कपाट रहे बंद, गंगा तट पर जुटे श्रद्धालु
Updated Wed, 31 Jan 2018 10:16 PM IST
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देवप्रयाग। खग्रास चंद्र ग्रहण के दौरान सिद्धपीठ चंद्रबदनी व श्री रघुनाथ मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए बंद कर दिए गए हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट विधिवत खोल दिए जाएंगे।
चंद्रबदनी मंदिर समिति के प्रबंधक डीपी भट्ट ने बताया कि बुधवार सुबह 8.18 से पहले मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए बंद कर दिए गए। बताया कि बुधवार रात्रि ग्रहण काल समाप्त होने के बाद ही नियमित आरती के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। दूसरी ओर श्री रघुनाथ मंदिर के पुजारी सोमनाथ भट्ट ने बताया कि मंदिर के कपाट वीरवार सुबह ही नियमित दर्शन व पूजन के लिए खोले जाएंगे। ग्रहण काल के दौरान संगम स्थल व रामकुंड में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहा। कई लोग ग्रहण के पुण्य काल में जप, ध्यान, दान के लिए गंगा तट पर भी जुटने शुरू हो गए। पानीपत हरियाणा से जयपाल वर्मा व नीरज कुमार ग्रहण काल में जप तप के लिए देवप्रयाग पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल में गंगा तट पर जप, दान करने का बड़ा ही महत्व है। चंद्र ग्रहण देखने के लिए यहां स्थित नक्षत्र वेधशाला में भी लोगों के लिए व्यवस्था बनाई गई है।
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चंद्रबदनी मंदिर समिति के प्रबंधक डीपी भट्ट ने बताया कि बुधवार सुबह 8.18 से पहले मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए बंद कर दिए गए। बताया कि बुधवार रात्रि ग्रहण काल समाप्त होने के बाद ही नियमित आरती के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। दूसरी ओर श्री रघुनाथ मंदिर के पुजारी सोमनाथ भट्ट ने बताया कि मंदिर के कपाट वीरवार सुबह ही नियमित दर्शन व पूजन के लिए खोले जाएंगे। ग्रहण काल के दौरान संगम स्थल व रामकुंड में गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहा। कई लोग ग्रहण के पुण्य काल में जप, ध्यान, दान के लिए गंगा तट पर भी जुटने शुरू हो गए। पानीपत हरियाणा से जयपाल वर्मा व नीरज कुमार ग्रहण काल में जप तप के लिए देवप्रयाग पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल में गंगा तट पर जप, दान करने का बड़ा ही महत्व है। चंद्र ग्रहण देखने के लिए यहां स्थित नक्षत्र वेधशाला में भी लोगों के लिए व्यवस्था बनाई गई है।
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