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मेडिकल कॉलेज से रिलीव हुए जूनियर डॉक्टर्स धरने पर बैठे
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:25 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज से पीएमएचएस (प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा) के लिए रिलीव किए गए जूनियर डाक्टरों ने सोमवार को बेस अस्पताल में सांकेतिक धरना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं को नहीं सुना जा रहा है।
24 जनवरी से जूनियर रेजीडेंट (जेआर) और इंटर्न डॉक्टरों ने वेतन विसंगति एवं वेतन भुगतान न होने सहित विभिन्न मांगों के लिए कार्य बहिष्कार कर दिया था। आंदोलन का समाधान न होने और जूनियर डॉक्टरों के रवैये को देखते हुए कालेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने 27 जनवरी की रात 74 जेआर को कॉलेज से रिलीव कर दिया। 28 जनवरी को उक्त डॉक्टरों ने बेस अस्पताल की ओपीडी के बाहर तंबू लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तंबू हटा दिया।
सोमवार को अस्पताल खुलने पर डॉक्टर पुन: ओपीडी के समक्ष एकत्रत हुए, जहां वह डॉक्टरों के लिए निर्धारित पार्किंग में धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। कुछ देर बाद कर्मचारी नेता केएन भट्ट सहित एक्टू नेता केपी चंदोला व योगेंद्र कांडपाल भी धरना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि कालेज प्रशासन को जूनियर डॉक्टर्स की बात सुननी चाहिए थी।
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धरना सभा में आंदोलनरत डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें रातों-रात कार्यमुक्त कर दिया गया। इधर, छात्र संगठन आइसा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल सती, नगर अध्यक्ष शिवानी पांडेय, सुबोध डंगवाल और सूरज कुमार ने बेस अस्पताल में तत्काल जेआर की तैनाती की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के सरकारी अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टर नहीं है। अब बेस अस्पताल से भी डॉक्टर हटा दिए गए।
24 जनवरी से जूनियर रेजीडेंट (जेआर) और इंटर्न डॉक्टरों ने वेतन विसंगति एवं वेतन भुगतान न होने सहित विभिन्न मांगों के लिए कार्य बहिष्कार कर दिया था। आंदोलन का समाधान न होने और जूनियर डॉक्टरों के रवैये को देखते हुए कालेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने 27 जनवरी की रात 74 जेआर को कॉलेज से रिलीव कर दिया। 28 जनवरी को उक्त डॉक्टरों ने बेस अस्पताल की ओपीडी के बाहर तंबू लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने तंबू हटा दिया।
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सोमवार को अस्पताल खुलने पर डॉक्टर पुन: ओपीडी के समक्ष एकत्रत हुए, जहां वह डॉक्टरों के लिए निर्धारित पार्किंग में धरने पर बैठ गए। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। कुछ देर बाद कर्मचारी नेता केएन भट्ट सहित एक्टू नेता केपी चंदोला व योगेंद्र कांडपाल भी धरना स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने कहा कि कालेज प्रशासन को जूनियर डॉक्टर्स की बात सुननी चाहिए थी।
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धरना सभा में आंदोलनरत डॉक्टरों ने कहा कि उनकी मांगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें रातों-रात कार्यमुक्त कर दिया गया। इधर, छात्र संगठन आइसा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतुल सती, नगर अध्यक्ष शिवानी पांडेय, सुबोध डंगवाल और सूरज कुमार ने बेस अस्पताल में तत्काल जेआर की तैनाती की मांग की है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के सरकारी अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टर नहीं है। अब बेस अस्पताल से भी डॉक्टर हटा दिए गए।