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जिगर के टुकड़े की जान बचाने के लिए मां ने दी किडनी
Updated Fri, 12 Jan 2018 02:05 AM IST
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दूरबीन विधि से किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन
-- दून निवासी मंजू देवी ने अपने 24 वर्षीय पुत्र को दी किडनी
-- एसआरएचयू के हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में हुआ इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में किडनी ट्रांसप्लांट का सफल आपरेशन किया गया। देहरादून निवासी एक महिला ने अपने पुत्र की अपनी किडनी देकर उसका जीवन बचाया है। देहरादून निवासी मंजू देवी के पुत्र शुभम की दोनो किडनियां खराब हो गई थी। अपने जिगर के टुकड़े का जीवन बचाने के लिए उसने स्वयं की किडनी दान कर दी। देहरादून के सालावाला में रहने वाली मंजू देवी ने बताया कि उसके 24 वर्षीय बेटे शुभम की एक साल अचानक तबियत खराब हो गई। हालत खराब होने से कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। लाभ नहीं होने पर हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट लेकर पहुंची।
नेफ्रोलॉजिस्ट डा. शहबाज अहमद और डा. धवल अरोड़ा ने शुभम के जरूरी परीक्षण कराए। परीक्षण से पता चला कि शुभम की दोनो किडनियां खराब हो गई हैं। पुत्र के जीवन को संकट में देखकर माता मंजू देवी ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डा. मनोज विश्वास ने बताया कि रक्त ग्रुप मिल जाने पर दूरबीन विधि से मंजू देवी की एक किडनी शुभम को ट्रांसप्लांट कर दी गई। सात से आठ घंटे की सर्जरी के बाद मां पुत्र दोनों स्वस्थ हैं। सर्जरी को सफल बनाने में डा. राजीव सरपाल, डा. बीना अस्थाना, डा. गुरजीत खुराना, डा. शिखर अग्रवाल और योगेश कालरा का योगदान रहा। कुलपति डा. विजय धस्माना ने किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली चिकित्सकों के दल को शुभकामनाएं दी है।
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-- दून निवासी मंजू देवी ने अपने 24 वर्षीय पुत्र को दी किडनी
-- एसआरएचयू के हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में हुआ इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी के हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में किडनी ट्रांसप्लांट का सफल आपरेशन किया गया। देहरादून निवासी एक महिला ने अपने पुत्र की अपनी किडनी देकर उसका जीवन बचाया है। देहरादून निवासी मंजू देवी के पुत्र शुभम की दोनो किडनियां खराब हो गई थी। अपने जिगर के टुकड़े का जीवन बचाने के लिए उसने स्वयं की किडनी दान कर दी। देहरादून के सालावाला में रहने वाली मंजू देवी ने बताया कि उसके 24 वर्षीय बेटे शुभम की एक साल अचानक तबियत खराब हो गई। हालत खराब होने से कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। लाभ नहीं होने पर हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट लेकर पहुंची।
नेफ्रोलॉजिस्ट डा. शहबाज अहमद और डा. धवल अरोड़ा ने शुभम के जरूरी परीक्षण कराए। परीक्षण से पता चला कि शुभम की दोनो किडनियां खराब हो गई हैं। पुत्र के जीवन को संकट में देखकर माता मंजू देवी ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डा. मनोज विश्वास ने बताया कि रक्त ग्रुप मिल जाने पर दूरबीन विधि से मंजू देवी की एक किडनी शुभम को ट्रांसप्लांट कर दी गई। सात से आठ घंटे की सर्जरी के बाद मां पुत्र दोनों स्वस्थ हैं। सर्जरी को सफल बनाने में डा. राजीव सरपाल, डा. बीना अस्थाना, डा. गुरजीत खुराना, डा. शिखर अग्रवाल और योगेश कालरा का योगदान रहा। कुलपति डा. विजय धस्माना ने किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली चिकित्सकों के दल को शुभकामनाएं दी है।
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