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एनआईटी उतराखंड में सीटें घटकर हुई आधी
Updated Thu, 03 May 2018 10:56 PM IST
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संदीप थपलियाल
श्रीनगर। इंजीनियरिंग का सपना संजोए छात्रों को बड़ा झटका लगा है। भूमि चयन में देरी, स्थायी कैंपस नहीं होने और सुविधाओं का अभाव होने से एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) ने एनआईटी उत्तराखंड की सीटें आधी करने के आदेश दिए है। यहां अब बीटेक की सीटों को घटाकर 300 से 150 कर दिया गया है।
एनआईटी उत्तराखंड में अब आगामी शिक्षण सत्र से केवल 150 सीटों पर ही प्रवेश होंगे। ऐसे में अब यहां एडमिशन लेने के लिए छात्रों को जूझना पड़ेगा। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने 11वें पंचवर्षीय प्लान में 10 नए एनआईटी मंजूर किए थे, जिसमें उत्तराखंड को भी एक एनआईटी मिला। श्रीनगर में एजूकेशन हब को देखते हुए इसके आसपास एनआईटी खोलने का निर्णय लिया गया। पॉलीटेक्निक /आईटीआई के भवनों में अस्थायी रुप से वर्ष 2010-11 से एनआईटी का संचालन शुरू हुआ। शुरू में तीन ट्रेड से बीटेक प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। बाद में ट्रेड बढ़कर पांच हो गए। दो साल पूर्व से संस्थान में एमटेक और पीएचडी भी शुरू हो गई। हर साल संस्थान में सीट बढ़ती गई, लेकिन इसकी तुलना में यहां आवासीय सुविधाओं और कक्षा भवनों का विस्तार नहीं हो पाया। इसके चलते यहां हॉस्टल के एक कमरे में तीन से छह छात्रों को रहना पड़ता है। वर्तमान में यहां लगभग 1100 छात्र-छात्राएं हैं, लेकिन क्षमता मात्र 570 की है।
कोट--------
एमएचआरडी के आदेश पर बीटेक में सीट आधी कर दी गई हैं। जब सुविधाएं जुटेंगी, तो पुन: सीट 300 हो जाएंगी।
-प्रो. एसएल सोनी, निदेशक एनआईटी उत्तराखंड
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श्रीनगर। इंजीनियरिंग का सपना संजोए छात्रों को बड़ा झटका लगा है। भूमि चयन में देरी, स्थायी कैंपस नहीं होने और सुविधाओं का अभाव होने से एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) ने एनआईटी उत्तराखंड की सीटें आधी करने के आदेश दिए है। यहां अब बीटेक की सीटों को घटाकर 300 से 150 कर दिया गया है।
एनआईटी उत्तराखंड में अब आगामी शिक्षण सत्र से केवल 150 सीटों पर ही प्रवेश होंगे। ऐसे में अब यहां एडमिशन लेने के लिए छात्रों को जूझना पड़ेगा। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार ने 11वें पंचवर्षीय प्लान में 10 नए एनआईटी मंजूर किए थे, जिसमें उत्तराखंड को भी एक एनआईटी मिला। श्रीनगर में एजूकेशन हब को देखते हुए इसके आसपास एनआईटी खोलने का निर्णय लिया गया। पॉलीटेक्निक /आईटीआई के भवनों में अस्थायी रुप से वर्ष 2010-11 से एनआईटी का संचालन शुरू हुआ। शुरू में तीन ट्रेड से बीटेक प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। बाद में ट्रेड बढ़कर पांच हो गए। दो साल पूर्व से संस्थान में एमटेक और पीएचडी भी शुरू हो गई। हर साल संस्थान में सीट बढ़ती गई, लेकिन इसकी तुलना में यहां आवासीय सुविधाओं और कक्षा भवनों का विस्तार नहीं हो पाया। इसके चलते यहां हॉस्टल के एक कमरे में तीन से छह छात्रों को रहना पड़ता है। वर्तमान में यहां लगभग 1100 छात्र-छात्राएं हैं, लेकिन क्षमता मात्र 570 की है।
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कोट--------
एमएचआरडी के आदेश पर बीटेक में सीट आधी कर दी गई हैं। जब सुविधाएं जुटेंगी, तो पुन: सीट 300 हो जाएंगी।
-प्रो. एसएल सोनी, निदेशक एनआईटी उत्तराखंड