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जालसाजों ने अफसरों से मिलीभगत करके बेच डाली नगरनिगम, भेल की जमीनें
Updated Mon, 01 Jan 2018 12:09 AM IST
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हरिद्वार। जालसाजों ने नगर निगम, भेल और राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके न सिर्फ नगर निगम और भेल की जमीनों को कब्जा कर लिया वरन उन्हें आनन फानन में बेच भी दिया। डीएम के निर्देश पर कराई जा रही जांच में अब तमाम चौंकाने वाले पहलू उजागर हो रहे हैं। दूसरी ओर प्रकरण उजागर होने के बाद अब डीएम दीपक रावत ने पिछले कई साल में इन इलाकों में हुुई रजिस्ट्री का ब्यौरा तलब किया है। डीएम की इस कार्रवाई से अब तमाम विभागों के अफसरों में हड़कंप मचा है।
रानीपुर मोड़ से सटे इलाके भगत सिंह चौक और टिबड़ी में भेल, नगर निगम की बेशकीमती जमीन हैं। इस जमीन को कई जालसाजों ने दोनों विभागों के अफसरों और कर्मचारियों से मिलीभगत करके न सिर्फ न कब्जा किया बल्कि दस्तावेजों में हेराफेरी करके बेच भी डाला। लोगों ने इस सरकारी जमीनों पर आनन फानन में आवासीय व्यावसायिक भवन भी खड़े कर लिए।
अब डीएम के निर्देश पर कराई गई जांच में कई चौंकाने वाले पहलू उजागर हुए हैं। सूत्रों की मानें तो डीएम ने रजिस्ट्री विभाग के अफसरों से पिछले कई साल के भीतर इन जमीनों से जुड़ी रजिस्ट्री का ब्यौरा तलब किया है। ब्यौरा देने में संबंधित विभागों के अफसरों को भी पसीने छूट रहे हैं। साथ ही उन्होंने तहसील प्रशासन के अफसरों से कहा है कि वे ऐसी विवादित जमीनों से जुड़ी तमाम दाखिल खारिज पर रोक लगाएं। पिछले दिनों डीएम दीपक रावत की मौजूदगी में भेल, नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने भगत सिंह चौक और टिबड़ी का सर्वे किया था। भेल प्रशासन लगातार आरोप लगा रहा है कि कई लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा करके निर्माण कर लिया है। भेल और नगर निगम के बीच जमीनों के भूस्वामित्व को लेकर भी विवाद है। डीएम दीपक रावत ने एक माह के भीतर पैमाइश कराकर जमीनों का सीमांकन कराने का भी निर्देश दिया है।
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कब्जेदारों ने ली राजनीतिक आकाओं की शरण
सूत्रों की माने तो भेल और नगर निगम की जमीनें कब्जा कर आशियाना बनाने वाले कई लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई के चलते अब राजनीतिक आकाओं की शरण ली है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है न जाने कब प्रशासन तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दे। इतना ही नही सूत्रों की मानें तो कब्जेदारों ने भेल और नगर निगम अफसरों से भी संपर्क साधा है कि वे इस प्रकरण में उनकी मदद करें ताकि उजाड़े जाने से बचा जा सके।
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रानीपुर मोड़ से सटे इलाके भगत सिंह चौक और टिबड़ी में भेल, नगर निगम की बेशकीमती जमीन हैं। इस जमीन को कई जालसाजों ने दोनों विभागों के अफसरों और कर्मचारियों से मिलीभगत करके न सिर्फ न कब्जा किया बल्कि दस्तावेजों में हेराफेरी करके बेच भी डाला। लोगों ने इस सरकारी जमीनों पर आनन फानन में आवासीय व्यावसायिक भवन भी खड़े कर लिए।
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अब डीएम के निर्देश पर कराई गई जांच में कई चौंकाने वाले पहलू उजागर हुए हैं। सूत्रों की मानें तो डीएम ने रजिस्ट्री विभाग के अफसरों से पिछले कई साल के भीतर इन जमीनों से जुड़ी रजिस्ट्री का ब्यौरा तलब किया है। ब्यौरा देने में संबंधित विभागों के अफसरों को भी पसीने छूट रहे हैं। साथ ही उन्होंने तहसील प्रशासन के अफसरों से कहा है कि वे ऐसी विवादित जमीनों से जुड़ी तमाम दाखिल खारिज पर रोक लगाएं। पिछले दिनों डीएम दीपक रावत की मौजूदगी में भेल, नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने भगत सिंह चौक और टिबड़ी का सर्वे किया था। भेल प्रशासन लगातार आरोप लगा रहा है कि कई लोगों ने उनकी जमीन पर कब्जा करके निर्माण कर लिया है। भेल और नगर निगम के बीच जमीनों के भूस्वामित्व को लेकर भी विवाद है। डीएम दीपक रावत ने एक माह के भीतर पैमाइश कराकर जमीनों का सीमांकन कराने का भी निर्देश दिया है।
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कब्जेदारों ने ली राजनीतिक आकाओं की शरण
सूत्रों की माने तो भेल और नगर निगम की जमीनें कब्जा कर आशियाना बनाने वाले कई लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई के चलते अब राजनीतिक आकाओं की शरण ली है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है न जाने कब प्रशासन तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दे। इतना ही नही सूत्रों की मानें तो कब्जेदारों ने भेल और नगर निगम अफसरों से भी संपर्क साधा है कि वे इस प्रकरण में उनकी मदद करें ताकि उजाड़े जाने से बचा जा सके।