{"_id":"5a3be87c4f1c1ba7668bb790","slug":"151387573110-gopeshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"....उजाड़ा घर दूसरों का खुद का सजाया होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
....उजाड़ा घर दूसरों का खुद का सजाया होगा
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
पीपलकोटी। बंड औद्योगिक, पर्यटन एवं कृषि मेले में दूसरे दिन हुए कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में विभिन्न जगहों से पहुंचे कवियों ने अपनी-अपनी कविताओं का व्याख्यान कर पलायन, रोजगार और हक-हकूकों पर परियोजनाओं की मार पर तंज कसे।
सेमलडाला मैदान में आयोजित मेले में कलश साहित्यिक संस्था से जुड़े कवियों ने कविता पाठ किया। संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने अपनी कविता जा भुला तु दूर परदेश मां, हुनर सीखी औ गढ़देश मां... के माध्यम से पहाड़ के युवाओं को रोजगार से जोड़ने का आह्वान किया। कवि मुरली दीवान ने तेजपाल निर्मोही ने हम सच्चि छिन जग्यां, अजू बी अच्छा दिन औंण वला छिन..., नितेश भंडारी ने हमरा गौं मां यु कनु रोग लग्यूं च, जे तें देखा स्वे द्वी बिस्वा पिछवड़ी पड्यूं च..., बृजेश रावत ने दादी कु हरची मोबाइल, घौर मुं होयूं कलह..., ललित गुसाईं ने ताड़ी-फाड़ी माया की, पड्यूं मैं तैं आग मां..., कल्पेश्वर भंडारी ने पक्की प्ये तैं ज्वान बोल्यां, बुड्या कच्ची मां खोल्यां..., शशि देवली ने पूछे अगर कोई कि क्या इंसान की पहचान है, पुतला है माटी का जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है..., सुनील कोठियाल ने धौली की धवलता को किसने छुपाया होगा, उजाड़ा घर दूसरों का खुद का सजाया होगा..., बहादुर सिंह भंडारी ने कश्मीर के पत्थरबाजों, बाज आओ..., दिनेश चंद्र हटवाल ने घिरकण वालो, गंगलोड़ो... जैसी कविताओं का पाठ किया।
तिमरु हमरु माया हे कांछी...
पीपलकोटी। बंड मेले के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। जहां स्कूली बच्चों ने नंदा राजजात यात्रा के साथ ही गढ़वाली गीतों की शानदार प्रस्तुति दी वहीं, गायक अनिल बिष्ट और गायिका हेमा नेगी करासी के एक के बाद एक गीतों पर दर्शन जमकर थिरके।
विज्ञापन
गायककार अनिल बिष्ट ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत जे हो खोली का गणेश, मोरी का नारेण... और जय बदरीनाथ-जय केदारनाथ.. से की। इसके बाद उन्होंने तिमरु हमरु माया हे कांछी, लागी गयो देहरादूने मां..., गिर गेंदुवा प्रीत को सुमिरो.. जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। गायिका हेमा नेगी करासी ने दस पैसा गिनुवा रे, गिरो ताल रे..., चेता की चैत्वाल्या, दादु गुरिल्ला... जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं, स्कूली छात्र-छात्राओं ने ओ भाना रंगीली भाना.., स्याली बंपाली, त्वे मिलण औलू नीती-गमशाली..., रानीखेता रामाजडोला... गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं मेले में विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने स्टॉलों से जमकर खरीदारी की। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने मेले में पहुंचकर स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस मौके पर अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, हरिदर्शन रावत, विहारी लाल बनवाल, रमेश बंडवाल, मनोज कुमार, देवी हटवाल, नरेंद्र बंडवाल, शैलेंद्र सिंह, चंद्रबल्लभ डंडरियाल, रॉबिन पंवार, राजेंद्र हटवाल, अशोक गुर्साइं और मंजू देवी आदि मौजूद थे।
सेमलडाला मैदान में आयोजित मेले में कलश साहित्यिक संस्था से जुड़े कवियों ने कविता पाठ किया। संस्था के अध्यक्ष ओम प्रकाश सेमवाल ने अपनी कविता जा भुला तु दूर परदेश मां, हुनर सीखी औ गढ़देश मां... के माध्यम से पहाड़ के युवाओं को रोजगार से जोड़ने का आह्वान किया। कवि मुरली दीवान ने तेजपाल निर्मोही ने हम सच्चि छिन जग्यां, अजू बी अच्छा दिन औंण वला छिन..., नितेश भंडारी ने हमरा गौं मां यु कनु रोग लग्यूं च, जे तें देखा स्वे द्वी बिस्वा पिछवड़ी पड्यूं च..., बृजेश रावत ने दादी कु हरची मोबाइल, घौर मुं होयूं कलह..., ललित गुसाईं ने ताड़ी-फाड़ी माया की, पड्यूं मैं तैं आग मां..., कल्पेश्वर भंडारी ने पक्की प्ये तैं ज्वान बोल्यां, बुड्या कच्ची मां खोल्यां..., शशि देवली ने पूछे अगर कोई कि क्या इंसान की पहचान है, पुतला है माटी का जरूरत रोटी, कपड़ा और मकान है..., सुनील कोठियाल ने धौली की धवलता को किसने छुपाया होगा, उजाड़ा घर दूसरों का खुद का सजाया होगा..., बहादुर सिंह भंडारी ने कश्मीर के पत्थरबाजों, बाज आओ..., दिनेश चंद्र हटवाल ने घिरकण वालो, गंगलोड़ो... जैसी कविताओं का पाठ किया।
विज्ञापन
तिमरु हमरु माया हे कांछी...
पीपलकोटी। बंड मेले के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। जहां स्कूली बच्चों ने नंदा राजजात यात्रा के साथ ही गढ़वाली गीतों की शानदार प्रस्तुति दी वहीं, गायक अनिल बिष्ट और गायिका हेमा नेगी करासी के एक के बाद एक गीतों पर दर्शन जमकर थिरके।
विज्ञापन
गायककार अनिल बिष्ट ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत जे हो खोली का गणेश, मोरी का नारेण... और जय बदरीनाथ-जय केदारनाथ.. से की। इसके बाद उन्होंने तिमरु हमरु माया हे कांछी, लागी गयो देहरादूने मां..., गिर गेंदुवा प्रीत को सुमिरो.. जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। गायिका हेमा नेगी करासी ने दस पैसा गिनुवा रे, गिरो ताल रे..., चेता की चैत्वाल्या, दादु गुरिल्ला... जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं, स्कूली छात्र-छात्राओं ने ओ भाना रंगीली भाना.., स्याली बंपाली, त्वे मिलण औलू नीती-गमशाली..., रानीखेता रामाजडोला... गीतों की प्रस्तुति दी। वहीं मेले में विभिन्न गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने स्टॉलों से जमकर खरीदारी की। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने मेले में पहुंचकर स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस मौके पर अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती, पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, हरिदर्शन रावत, विहारी लाल बनवाल, रमेश बंडवाल, मनोज कुमार, देवी हटवाल, नरेंद्र बंडवाल, शैलेंद्र सिंह, चंद्रबल्लभ डंडरियाल, रॉबिन पंवार, राजेंद्र हटवाल, अशोक गुर्साइं और मंजू देवी आदि मौजूद थे।