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बोर्ड बैठक में 71 प्रस्ताव पारित
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:25 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, मसूरी।
नगर पालिका सभागार में बुधवार को आयोजित बोर्ड बैठक में सभी सभासदों की सहमति के बाद सभी 71 प्रस्ताव पारित हो गए। इनमें शहर के विकास कार्यों, विभिन्न भुगतानों से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में कंपनी गार्डन का किराया बढ़ाने, मसूरी झील के सुंदरीकरण और वहां पार्किंग बनाने के प्रस्ताव पर सभासदों की पालिकाध्यक्ष से तीखी नोकझोंक हुई। पालिकाध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को अगली बोर्ड बैठक में लाने की बात कही।
सभासद एवं पालिका कंपनी गार्डन समिति की अध्यक्ष जसवीर कौर, सभासद विनोद सेमवाल, रमेश भंडारी आदि ने कंपनी गार्डन और वहां स्थित फूड कोर्ट, जवाहर एक्वेरियम का किराया बढ़ाने, मसूरी झील के सुंदरीकरण एवं वहां पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी गार्डन वेलफेयर एसोसिएशन को सिर्फ प्रवेश शुल्क से ही वार्षिक 15 लाख से अधिक की आय होती है, लेकिन पालिका की आय में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। इस प्रस्ताव को लेकर सभासदों की पालिकाध्यक्ष मनमोहन मल्ल से तीखी नोकझोंक भी हुई। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि कंपनी गार्डन को वहीं की वेलफेयर एसोसिएशन को पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए दिया गया है। लिहाजा, इस विषय में और चर्चा करने की जरूरत है और उन्होंने प्रस्ताव को अगली बैठक में लाने की बात कही। सभासद कुलदीप रावत ने बिना उनकी सहमति के उनके वार्ड में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर विरोध जताया। अधिशासी अधिकारी एमएल शाह को लिखित में शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने की नीयत से उनके वार्ड में गैर जरूरी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कुछ सभासदों ने एमडीडीए द्वारा झूलाघर पर निर्माणाधीन दुकानों का मुद्दा का उठाते हुए कहा कि इन दुकानों का नियमानुसार आवंटन होना चाहिए। सभासदों ने नगरपालिका द्वारा कराए गए शरदोत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस आदि कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वालों का भुगतान करने की मांग की। बोर्ड बैठक में शरदोत्सव में व्यय धनराशि का लेखा जोखा भी रखा गया। जिसमें 32 लाख, 82, हजार 768 रुपये खर्च होना दर्शाया गया। वहीं, उत्तराखंड स्थापना दिवस कार्यक्रम में 4 लाख, 58 हजार, 76 रुपये खर्च होना दर्शाया।
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निविदा कार्य की लागत दोगुनी करने पर सवाल
बोर्ड बैठक में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मसूरी नगरपालिका एक निविदा कार्य की लागत दोगुनी करने पर भी सवाल उठे। बेकरी हिल स्थित पालिका आवास की आवश्यक मरम्मत को आमंत्रित निविदा कार्य की लागत जहां पहले 3 लाख, 54 हजार थी, वहीं इसकी लागत अब जीएसटी समेत 7 लाख, 80 हजार, 570 रुपये कर दी गई है। बोर्ड बैठक में इसकी अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने पर यह खुलासा हुआ। बता दें कि उक्त पालिका आवास नगरपालिका के एक कर्मचारी के नाम आवंटित है। सभासद कुलदीप रावत का कहना है कि पालिका ने बगैर पुराने टेंडर का काम खत्म हुए बड़ी दरों पर नई निविदा आमंत्रित की है, जो सरासर नियमानुसार गलत है। उन्होंने पालिका आवास मरम्मत कार्य के नाम पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए शासन प्रशासन से इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस बाबत जब पालिका के अधिशासी अधिकारी एमएल शाह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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मंडलायुक्त को भेजा त्याग-पत्र
पालिका सभासद शशी रावत ने नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं व घोटालों के बाद भी संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर क्षुब्ध होकर त्याग पत्र दिया है। उन्होंने गढ़वाल आयुक्त को प्रेषित पत्र में उक्त बातों का जिक्र करते हुए कहा कि जिलाधिकारी देहरादून को शपथ पत्र सहित त्याग पत्र दिया गया है जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बुधवार को हुई पालिका बोर्ड की बैठक का भी बहिष्कार किया और आगे भी बोर्ड की तमाम बैठकों और गतिविधियों का बहिष्कार किए जाने की बात कही।
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नगर पालिका सभागार में बुधवार को आयोजित बोर्ड बैठक में सभी सभासदों की सहमति के बाद सभी 71 प्रस्ताव पारित हो गए। इनमें शहर के विकास कार्यों, विभिन्न भुगतानों से संबंधित प्रस्ताव शामिल हैं। बैठक में कंपनी गार्डन का किराया बढ़ाने, मसूरी झील के सुंदरीकरण और वहां पार्किंग बनाने के प्रस्ताव पर सभासदों की पालिकाध्यक्ष से तीखी नोकझोंक हुई। पालिकाध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को अगली बोर्ड बैठक में लाने की बात कही।
सभासद एवं पालिका कंपनी गार्डन समिति की अध्यक्ष जसवीर कौर, सभासद विनोद सेमवाल, रमेश भंडारी आदि ने कंपनी गार्डन और वहां स्थित फूड कोर्ट, जवाहर एक्वेरियम का किराया बढ़ाने, मसूरी झील के सुंदरीकरण एवं वहां पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी गार्डन वेलफेयर एसोसिएशन को सिर्फ प्रवेश शुल्क से ही वार्षिक 15 लाख से अधिक की आय होती है, लेकिन पालिका की आय में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। इस प्रस्ताव को लेकर सभासदों की पालिकाध्यक्ष मनमोहन मल्ल से तीखी नोकझोंक भी हुई। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि कंपनी गार्डन को वहीं की वेलफेयर एसोसिएशन को पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए दिया गया है। लिहाजा, इस विषय में और चर्चा करने की जरूरत है और उन्होंने प्रस्ताव को अगली बैठक में लाने की बात कही। सभासद कुलदीप रावत ने बिना उनकी सहमति के उनके वार्ड में हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर विरोध जताया। अधिशासी अधिकारी एमएल शाह को लिखित में शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने की नीयत से उनके वार्ड में गैर जरूरी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। कुछ सभासदों ने एमडीडीए द्वारा झूलाघर पर निर्माणाधीन दुकानों का मुद्दा का उठाते हुए कहा कि इन दुकानों का नियमानुसार आवंटन होना चाहिए। सभासदों ने नगरपालिका द्वारा कराए गए शरदोत्सव एवं राज्य स्थापना दिवस आदि कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने वालों का भुगतान करने की मांग की। बोर्ड बैठक में शरदोत्सव में व्यय धनराशि का लेखा जोखा भी रखा गया। जिसमें 32 लाख, 82, हजार 768 रुपये खर्च होना दर्शाया गया। वहीं, उत्तराखंड स्थापना दिवस कार्यक्रम में 4 लाख, 58 हजार, 76 रुपये खर्च होना दर्शाया।
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निविदा कार्य की लागत दोगुनी करने पर सवाल
बोर्ड बैठक में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी मसूरी नगरपालिका एक निविदा कार्य की लागत दोगुनी करने पर भी सवाल उठे। बेकरी हिल स्थित पालिका आवास की आवश्यक मरम्मत को आमंत्रित निविदा कार्य की लागत जहां पहले 3 लाख, 54 हजार थी, वहीं इसकी लागत अब जीएसटी समेत 7 लाख, 80 हजार, 570 रुपये कर दी गई है। बोर्ड बैठक में इसकी अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने पर यह खुलासा हुआ। बता दें कि उक्त पालिका आवास नगरपालिका के एक कर्मचारी के नाम आवंटित है। सभासद कुलदीप रावत का कहना है कि पालिका ने बगैर पुराने टेंडर का काम खत्म हुए बड़ी दरों पर नई निविदा आमंत्रित की है, जो सरासर नियमानुसार गलत है। उन्होंने पालिका आवास मरम्मत कार्य के नाम पर चहेतों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए शासन प्रशासन से इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस बाबत जब पालिका के अधिशासी अधिकारी एमएल शाह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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मंडलायुक्त को भेजा त्याग-पत्र
पालिका सभासद शशी रावत ने नगरपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं व घोटालों के बाद भी संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर क्षुब्ध होकर त्याग पत्र दिया है। उन्होंने गढ़वाल आयुक्त को प्रेषित पत्र में उक्त बातों का जिक्र करते हुए कहा कि जिलाधिकारी देहरादून को शपथ पत्र सहित त्याग पत्र दिया गया है जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बुधवार को हुई पालिका बोर्ड की बैठक का भी बहिष्कार किया और आगे भी बोर्ड की तमाम बैठकों और गतिविधियों का बहिष्कार किए जाने की बात कही।