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तीन बस्तियों में गहराया पेयजल संकट, एक सप्ताह से आपूर्ति ठप
Updated Tue, 12 Dec 2017 10:34 PM IST
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कीर्तिनगर। एक सप्ताह से योजना पर पेयजल आपूर्ति ठप होने से कमांद, खोला, पहलगांव व गुजरोखान के ग्रामीण प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जल संस्थान से गुहार लगाने के बाद भी योजना पर पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हो पा रही है।
विकासखंड कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत खोला कड़ाकोट की चार बस्तियों में एक सप्ताह से पेयजल संकट बना हुआ हैै। ग्रामीण एक किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीण बलवीर सिंह कैंतुरा ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले बनी खोला-कंमाद पेयजल योजना दयनीय स्थिति में है। योजना पर जल संस्थान की ओर से करीब दो साल पहले आपदा मद में कार्य भी करवाया गया था। बावजूद इसके आए दिन ग्रामीणों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान धर्म लाल व ग्रामीण देव सिंह, सतीश कैंतुरा व सुरेंद्र सिंह कठैत ने समस्या पर आक्रोश जताते हुए योजना के पुनर्गठन की मांग की है। कहा कि समस्या के बारे में जल संस्थान सहित विधायक को कई बार अवगत करवाया गया, किंतु कार्रवाई नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आशीष भट्ट का कहना है कि एकल पेयजल योजना होने से इसके रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। ग्रामीणों को चाहिए कि योजना के पुनर्गठन के लिए पेयजल निगम को प्रस्ताव भेजे।
विकासखंड कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत खोला कड़ाकोट की चार बस्तियों में एक सप्ताह से पेयजल संकट बना हुआ हैै। ग्रामीण एक किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी ढोकर प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीण बलवीर सिंह कैंतुरा ने बताया कि करीब 20 वर्ष पहले बनी खोला-कंमाद पेयजल योजना दयनीय स्थिति में है। योजना पर जल संस्थान की ओर से करीब दो साल पहले आपदा मद में कार्य भी करवाया गया था। बावजूद इसके आए दिन ग्रामीणों को पेयजल समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान धर्म लाल व ग्रामीण देव सिंह, सतीश कैंतुरा व सुरेंद्र सिंह कठैत ने समस्या पर आक्रोश जताते हुए योजना के पुनर्गठन की मांग की है। कहा कि समस्या के बारे में जल संस्थान सहित विधायक को कई बार अवगत करवाया गया, किंतु कार्रवाई नहीं हो पा रही है। दूसरी ओर जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आशीष भट्ट का कहना है कि एकल पेयजल योजना होने से इसके रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है। ग्रामीणों को चाहिए कि योजना के पुनर्गठन के लिए पेयजल निगम को प्रस्ताव भेजे।
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