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12 साल से अधर में पॉलीटैक्निक औरडायट के छात्रावास
Updated Fri, 08 Dec 2017 10:41 PM IST
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गौचर। नगर में संचालित राजकीय पॉलीटेक्निक और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के छात्रावासों का निर्माण 12 साल से अधर में लटका है। शासन की ओर से जारी करोड़ों की धनराशि को निर्माणदायी विभाग खर्च कर चुका है लेकिन भवन अभी तक आधा-अधूरा ही बना है। ऐसे में इन संस्थानों में पढ़ने वाले दुर्गम क्षेत्रों के प्रशिक्षणार्थियों को बाजार में महंगे दामों पर किराए पर कमरा लेना पड़ रहा है।
वर्ष 2004-05 में राजकीय पॉलिटेक्निक में छात्राओं के लिए 48 बिस्तर के छात्रावास की स्वीकृति मिली। तब उत्तर प्रदेश निर्माण निगम की श्रीनगर इकाई को 1 करोड़ 67 लाख की स्वीकृति मिली। निगम ने यहां काम शुरू किया और वर्ष 2008 में ढांचा ही तैयार हो पाया। निगम ने बजट खत्म होने की बात कहते हुए काम बंद कर दिया, लेकिन बजट नहीं मिला और काम अभी तक अधूरा पड़ा है। वहीं वर्ष 2004-05 में डायट में 100 बिस्तर के छात्रावास के लिए 3 करोड़ 83 लाख मिले, लेकिन निर्माणदायी उप्र. निर्माण निगम को महज 40 लाख जारी हो पाए। ऐसे में दोनों भवन तब से अधूरे पड़े हैं। पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य देवेंद्र यादव और डायट के प्राचार्य के. सिंह का कहना है कि अधूरे निर्माण से जहां प्रशिक्षणार्थियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है, वहीं परिसर में अधूरे निर्माण मुसीबत का सबब बन रहे हैं। निर्माण निगम के सहायक अभियंता महादेव बहुगुणा ने बताया कि धनराशि मिलने पर काम पूरा कर दिया जाएगा।
वर्ष 2004-05 में राजकीय पॉलिटेक्निक में छात्राओं के लिए 48 बिस्तर के छात्रावास की स्वीकृति मिली। तब उत्तर प्रदेश निर्माण निगम की श्रीनगर इकाई को 1 करोड़ 67 लाख की स्वीकृति मिली। निगम ने यहां काम शुरू किया और वर्ष 2008 में ढांचा ही तैयार हो पाया। निगम ने बजट खत्म होने की बात कहते हुए काम बंद कर दिया, लेकिन बजट नहीं मिला और काम अभी तक अधूरा पड़ा है। वहीं वर्ष 2004-05 में डायट में 100 बिस्तर के छात्रावास के लिए 3 करोड़ 83 लाख मिले, लेकिन निर्माणदायी उप्र. निर्माण निगम को महज 40 लाख जारी हो पाए। ऐसे में दोनों भवन तब से अधूरे पड़े हैं। पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य देवेंद्र यादव और डायट के प्राचार्य के. सिंह का कहना है कि अधूरे निर्माण से जहां प्रशिक्षणार्थियों को सुविधा नहीं मिल पा रही है, वहीं परिसर में अधूरे निर्माण मुसीबत का सबब बन रहे हैं। निर्माण निगम के सहायक अभियंता महादेव बहुगुणा ने बताया कि धनराशि मिलने पर काम पूरा कर दिया जाएगा।
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