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पहली बार अफसर और नेता पहुंचे बमोटिया गांव
Updated Fri, 10 Nov 2017 10:34 PM IST
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देवाल। ब्लाक के अनुसूचित जाति बाहुल्य गांव बमोटिया में पहली बार कोई अधिकारी और नेता (ब्लाक प्रमुख) पहुंचे। भले ही ब्लाक स्तरीय अधिकारी गांव पहुंचे, लेकिन अफसरों के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने खुशी जताई साथ ही समस्याओं के निस्तारण की उम्मीदें भी उनमें जगी हैं।
बमोटिया जाने के लिए बेराधार से 10 किमी पैदल अथवा थराली ब्लाक के रतगांव से करीब चार किमी की पैदल दूरी तय कर पहुंचना पड़ता है। यहां बमोटिया गांव में बेराधार गांव के 59 अनुसूचित जाति के परिवार रहते हैं। सरकार की ओर से वर्ष 1978 में यहां भी परिवारों को भूमि के पट्टे दिए गए, लेकिन वर्ष 1990 के बाद किसी भी पट्टे का नवीनीकरण नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीणों को गांव से बेदखल होने की चिंता सता रही है। यही नहीं गांव में स्कूल है, लेकिन भवन नहीं। पानी की कोई लाइन नहीं। ग्रामीण दो किमी पैदल दूरी नापकर पानी ढोते हैं। ग्रामीण वोट डालने बेराधार आते हैं हर पांच साल में सरकार चुनते हैं लेकिन आज तक गांव में न तो नेता पहुंचे और न ही अधिकारी। शुक्रवार को पहली बार गांव में महज ब्लाक स्तरीय अधिकारी पहुंचे तो ग्रामीण खुश हो उठे। बमोटिया गांव के 73 साल के गंगा राम कहते हैं कि आज तक किसी ने गांव की सुध तक नहीं ली। वही गांव के रघुवीर सिंह, चंद्रा देवी ने बताया कि यहां पर 300 से अधिक लोग रहते हैं। लोगों ने पक्के मकान भी बनाए, लेकिन पट्टे का नवीनीकरण नहीं होने से लोगों को कई सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
बमोटिया में सरकार ने वर्ष 1978 में मोहनराम, मादोराम, गोपी राम, मदन राम आदि कई लोगों को जमीन के पट्टे दिए थे लेकिन 1990 के के बाद इसका नवीनीकरण ग्रामीणों की ओर से नहीं किया गया। कई बार इस बारे में विभाग ग्रामीणों को लिख चुका है। - टीएस बिष्ट, वन दरोगा, वन विभाग।
बमोटिया जाने के लिए बेराधार से 10 किमी पैदल अथवा थराली ब्लाक के रतगांव से करीब चार किमी की पैदल दूरी तय कर पहुंचना पड़ता है। यहां बमोटिया गांव में बेराधार गांव के 59 अनुसूचित जाति के परिवार रहते हैं। सरकार की ओर से वर्ष 1978 में यहां भी परिवारों को भूमि के पट्टे दिए गए, लेकिन वर्ष 1990 के बाद किसी भी पट्टे का नवीनीकरण नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीणों को गांव से बेदखल होने की चिंता सता रही है। यही नहीं गांव में स्कूल है, लेकिन भवन नहीं। पानी की कोई लाइन नहीं। ग्रामीण दो किमी पैदल दूरी नापकर पानी ढोते हैं। ग्रामीण वोट डालने बेराधार आते हैं हर पांच साल में सरकार चुनते हैं लेकिन आज तक गांव में न तो नेता पहुंचे और न ही अधिकारी। शुक्रवार को पहली बार गांव में महज ब्लाक स्तरीय अधिकारी पहुंचे तो ग्रामीण खुश हो उठे। बमोटिया गांव के 73 साल के गंगा राम कहते हैं कि आज तक किसी ने गांव की सुध तक नहीं ली। वही गांव के रघुवीर सिंह, चंद्रा देवी ने बताया कि यहां पर 300 से अधिक लोग रहते हैं। लोगों ने पक्के मकान भी बनाए, लेकिन पट्टे का नवीनीकरण नहीं होने से लोगों को कई सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है। प्रमुख उर्मिला बिष्ट ने कहा कि ग्रामीणों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाएगा।
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बमोटिया में सरकार ने वर्ष 1978 में मोहनराम, मादोराम, गोपी राम, मदन राम आदि कई लोगों को जमीन के पट्टे दिए थे लेकिन 1990 के के बाद इसका नवीनीकरण ग्रामीणों की ओर से नहीं किया गया। कई बार इस बारे में विभाग ग्रामीणों को लिख चुका है। - टीएस बिष्ट, वन दरोगा, वन विभाग।
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