भावी पीढ़ी को तैयार करने में आंगनबाडी कार्यकर्त्री की सेवा उल्लेखनीय

Dehradun Bureau Updated Thu, 09 Nov 2017 11:54 PM IST

अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आंगनबाडी सुपरवाइर्स के पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं उल्ल्ेखनीय हैं। इसमें भावी माताओं एवं नौनिहालों की देखभाल के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया।
आंगनबाड़ी सहायिका के प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन सत्र में शांतिकुंज के व्यवस्थापक शिवप्रसाद मिश्र ने कहा कि शिशु का शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक विकास माता के गर्भ में होता है। ऐसे समय में उन्हें भावनात्मक पोषण देना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गर्भ के तीन से पांच माह तक पुंसवन संस्कार से भावी पीढ़ी में सुसंस्कार के बीज बोने चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी व सेवा भाव के साथ भावी माताओं का सहयोग काने से आने वाली पीढ़ी स्वस्थ व सुशील होगी।
शांतिकुंज चिकित्सा विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डा. गायत्री शर्मा ने गर्भ में पलने वाले बच्चे की विकास पर पावर पाइंट प्रेजेंटेशन से विस्तृत जानकारी दी। रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्वयक केदार प्रसाद दुबे कहा कि प्रशिक्षण के सीखे सूत्रों को व्यावहारिक जीवन में उतारने से परिवार के साथ समाज व राष्ट्र का विकास संभव है। दुबे ने समस्त क्रांति का आधार बाल संस्कार शाला विषय पर विस्तृत जानकारी दी। शिविर समन्वयक के अनुसार रुड़की व मंगलौर ब्लॉक के चार सौ से अधिक आंगनबाड़ी सहायिकाओं ने जीवन जीने के सूत्रों के साथ नौनिहालों व भावी माताओं के संरक्षण के विविध पहलुओं को समझा।

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