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रंगकर्मी की असली कमाई होती है तालियां
Updated Wed, 08 Nov 2017 10:50 PM IST
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श्रीनगर। बैकुंठ नाट्य महोत्सव की तीसरी शाम को बृज नट मंडली फरीदाबार की ओर से ‘कहानी रंगकर्मी की’ नाटक का मंचन किया गया। बृजमोहन भारद्वाज की ओर से निर्देशित इस नाटक के माध्यम दुनिया
में अपनी जगह बनाने के लिए समाज व परिवार से जूझते हुए रंगकर्मी का जीवन चित्रण किया गया। बताया गया कि रंगकर्मी की असली कमाई उसके अभिनय पर मिलनी वाली तालियां होती है।
कहानी का मुख्य पात्र बृजमोहन है, जो रंगमंच में अपनी पहचान बनाना चाहती है। वह मंच पर सोचते हुए दर्शकों के साथ संवाद करता है। वह बताता है कि मां कहती है, कि इन कामों में क्या रखा है, नाटक में तेरा भविष्य नहीं है। पापा कहते हैं कि कुछ कमाई-धमाई कर ले। यह फालतू काम छोड़ दे। फिर भी वह घर में झूठ बोलकर थियेटर में जाता है। वहां नाटक की रिहर्सल करता है। वह समाज से लड़ता रहता है। पड़ोसियों के पूछने पर झूठ बोलता है। फ्लेशबैक में उसके संघर्ष के दिन दिखाए जाते हैं, कि कैसे उसे नाटकों में काम करने के मौके मिले। किन परिस्थितियों से जूझता हुआ वह मुख्य पात्र बना। उसे घरवालों का सहयोग नहीं मिलता है। हार कर वह आत्महत्या की कोशिश करता है। इसी उधुड़ेबुन में उसे अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है। उसकी अंतरात्मा कहती है कि वह कभी रवींद्रनाथ टैगोर की एकला चलो रे की तर्ज पर अकेले संघर्ष करने का दम भरता है। आज वह हार मान रहा है। अंत में वह अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए संघर्ष करने का निर्णय लेता है। वह संकल्प लेता है कि मैं सफल कलाकार बनकर दुनिया के सामने आऊंगा। नाटक के जरिए कलाकार यह संदेश देते हैं, कि जब थियेटर अच्छा काम नहीं है, तो फिर इतने दर्शक क्यों है। इतने लोग उत्साहवर्धन क्यों कर रहे हैं। नाटक का पात्र कहता है कि हमारी कमाई दर्शकों की ताली है। नाटक में मनीष जोशी, उमंग कुगशाल, प्रिया अधिकारी, अंकित उच्छोली, अरविंद, निशा व विनय ने भूमिका निभाई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष बिपिन मैठानी, इंद्रेश मैखुरी, हिमांशु नौडिय़ाल और प्रभारी सुधांशु नौडिय़ाल आदि मौजूद थे।
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कवियों ने समाज की रूढ़िवादी परंपराओं पर कसे तंज
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों खूब गुदगुदाया। कवियों के कविताओं के माध्यम से समाज की रूढ़िवादी परंपराओं पर व्यंग्य कसे।
मेले में प्रसिद्ध कवि सुरेंद्र शर्मा ने ‘राम तो शबरी के जूठे बेर खा सकते हैं तो फिर शबरी राम के मंदिर में क्यों नहीं जा सकता’ ‘मैंने बाबा रामदेव से पूछा जब योग से सब रोग दूर होते हैं तो फिर दवाई क्यों बनाई’ जैसी रचनाएं सुनाई। फरीदाबाद के हास्य कवि सरदार मंजीत सिंह ने ‘है जलती आग सीने में नहीं डरता सिकंदर से मगर हूं बाप बेटी का डरा रहता हूं’ अंदर से कविता के माध्यम से समाज के स्थिति को उकेरा। मेरठ के शायर मेरठ पापुलरी ने तदबीर का खोटा है मुकद्र से लड़ा है दुनिया उसे कहती है कि चालाक बड़ा है सुनाया। कीर्तिनगर के कवि जयकृष्ण पैन्यूली ने सियासत की आग लगी है पानी में हमारे गांव डूबे तमाम भरी जवानी में, गैरसैंण की बस में दून के टायर हैं हम हाथ हिलाते रह गए एक नादानी में कविता के माध्यम से उत्तराखंड राज्य की अस्थिरता का बखूबी वर्णन किया। चौरास की कविता भट्ट ने सीमा पर सरसों खिल जाए कांटों को हो अंत, नीरज नैथानी ने राम रहीम के बंदे देखे इन गोरख धंधे देखे, दिल्ली के कवियत्री पद्मिनी शर्मा ने रीति रिवाज के नाम पे दर्द उठाना पड़ता है क्यों बेटियों को देश पराया जाना पड़ता है और गीतकार विष्ण सक्सेना ने तपती हुइ जमी है जलधार बांटता हूं पतझड़ के रास्तों पर मैं बहार बांटता हूं गीत सुनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने की।
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मेहंदी प्रतियोगिता में अदिति और मीनाक्षी प्रथम
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी के सातवें दिन नगर पालिका परिसर में मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमेें दो वर्गों में स्पर्धा संपन्न हुई। जूनियर वर्ग में सेंट थेरेसास कांन्वेट स्कूल की अदिति नेगी और सीनियर वर्ग में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की मीनाक्षी ने प्रथम स्थान हासिल किया।
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रेनबो ने जीती क्विज प्रतियोगिता
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित क्विज प्रतियोगिता का रिजल्ट घोषित हो गया है। सीनियर व जूनियर वर्ग की क्विज प्रतियोगिता रेनबो पब्लिक स्कूल ने जीती। प्रतियोगिता में 24 स्कूलों ने प्रतिभाग किया।
सीनियर वर्ग में रजत बहुगुणा व पारस पांडेय (रेनबो) प्रथम , रितेश पांडेय व सुमित भट्ट (सेंट थेरेसास कान्वेंट स्कूल) द्वितीय और हिमांशु गार्गी व गार्गी धनाई (देवभूमि पब्लिक स्कूल नकोट) तृतीय स्थान पर रहे।
जूनियर वर्ग में दिव्यांशु रावत व प्रांशु रावत (रेनबो) ने पहला, मानवी शर्मा व यशस्वी भट्ट (सेमफोर्ड स्कूल बेलकंडी) ने दूसरा और कार्तिकेय उनियाल व सुधांशु डिमरी (कान्वेंट) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
घुड़सवारों का प्रदर्शन
श्रीनगर। एसएसबी सीटीसी (केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र) की घुड़सवार टीम ने घुड़सवारी का प्रदर्शन किया। एसएसबी के घोड़ों ने दौड़ के साथ कलाबाजी का प्रदर्शन किया।
में अपनी जगह बनाने के लिए समाज व परिवार से जूझते हुए रंगकर्मी का जीवन चित्रण किया गया। बताया गया कि रंगकर्मी की असली कमाई उसके अभिनय पर मिलनी वाली तालियां होती है।
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कहानी का मुख्य पात्र बृजमोहन है, जो रंगमंच में अपनी पहचान बनाना चाहती है। वह मंच पर सोचते हुए दर्शकों के साथ संवाद करता है। वह बताता है कि मां कहती है, कि इन कामों में क्या रखा है, नाटक में तेरा भविष्य नहीं है। पापा कहते हैं कि कुछ कमाई-धमाई कर ले। यह फालतू काम छोड़ दे। फिर भी वह घर में झूठ बोलकर थियेटर में जाता है। वहां नाटक की रिहर्सल करता है। वह समाज से लड़ता रहता है। पड़ोसियों के पूछने पर झूठ बोलता है। फ्लेशबैक में उसके संघर्ष के दिन दिखाए जाते हैं, कि कैसे उसे नाटकों में काम करने के मौके मिले। किन परिस्थितियों से जूझता हुआ वह मुख्य पात्र बना। उसे घरवालों का सहयोग नहीं मिलता है। हार कर वह आत्महत्या की कोशिश करता है। इसी उधुड़ेबुन में उसे अंतरात्मा की आवाज सुनाई देती है। उसकी अंतरात्मा कहती है कि वह कभी रवींद्रनाथ टैगोर की एकला चलो रे की तर्ज पर अकेले संघर्ष करने का दम भरता है। आज वह हार मान रहा है। अंत में वह अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए संघर्ष करने का निर्णय लेता है। वह संकल्प लेता है कि मैं सफल कलाकार बनकर दुनिया के सामने आऊंगा। नाटक के जरिए कलाकार यह संदेश देते हैं, कि जब थियेटर अच्छा काम नहीं है, तो फिर इतने दर्शक क्यों है। इतने लोग उत्साहवर्धन क्यों कर रहे हैं। नाटक का पात्र कहता है कि हमारी कमाई दर्शकों की ताली है। नाटक में मनीष जोशी, उमंग कुगशाल, प्रिया अधिकारी, अंकित उच्छोली, अरविंद, निशा व विनय ने भूमिका निभाई। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष बिपिन मैठानी, इंद्रेश मैखुरी, हिमांशु नौडिय़ाल और प्रभारी सुधांशु नौडिय़ाल आदि मौजूद थे।
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कवियों ने समाज की रूढ़िवादी परंपराओं पर कसे तंज
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी में आयोजित अखिल भारतीय हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों खूब गुदगुदाया। कवियों के कविताओं के माध्यम से समाज की रूढ़िवादी परंपराओं पर व्यंग्य कसे।
मेले में प्रसिद्ध कवि सुरेंद्र शर्मा ने ‘राम तो शबरी के जूठे बेर खा सकते हैं तो फिर शबरी राम के मंदिर में क्यों नहीं जा सकता’ ‘मैंने बाबा रामदेव से पूछा जब योग से सब रोग दूर होते हैं तो फिर दवाई क्यों बनाई’ जैसी रचनाएं सुनाई। फरीदाबाद के हास्य कवि सरदार मंजीत सिंह ने ‘है जलती आग सीने में नहीं डरता सिकंदर से मगर हूं बाप बेटी का डरा रहता हूं’ अंदर से कविता के माध्यम से समाज के स्थिति को उकेरा। मेरठ के शायर मेरठ पापुलरी ने तदबीर का खोटा है मुकद्र से लड़ा है दुनिया उसे कहती है कि चालाक बड़ा है सुनाया। कीर्तिनगर के कवि जयकृष्ण पैन्यूली ने सियासत की आग लगी है पानी में हमारे गांव डूबे तमाम भरी जवानी में, गैरसैंण की बस में दून के टायर हैं हम हाथ हिलाते रह गए एक नादानी में कविता के माध्यम से उत्तराखंड राज्य की अस्थिरता का बखूबी वर्णन किया। चौरास की कविता भट्ट ने सीमा पर सरसों खिल जाए कांटों को हो अंत, नीरज नैथानी ने राम रहीम के बंदे देखे इन गोरख धंधे देखे, दिल्ली के कवियत्री पद्मिनी शर्मा ने रीति रिवाज के नाम पे दर्द उठाना पड़ता है क्यों बेटियों को देश पराया जाना पड़ता है और गीतकार विष्ण सक्सेना ने तपती हुइ जमी है जलधार बांटता हूं पतझड़ के रास्तों पर मैं बहार बांटता हूं गीत सुनाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने की।
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मेहंदी प्रतियोगिता में अदिति और मीनाक्षी प्रथम
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी के सातवें दिन नगर पालिका परिसर में मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमेें दो वर्गों में स्पर्धा संपन्न हुई। जूनियर वर्ग में सेंट थेरेसास कांन्वेट स्कूल की अदिति नेगी और सीनियर वर्ग में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की मीनाक्षी ने प्रथम स्थान हासिल किया।
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रेनबो ने जीती क्विज प्रतियोगिता
श्रीनगर। बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित क्विज प्रतियोगिता का रिजल्ट घोषित हो गया है। सीनियर व जूनियर वर्ग की क्विज प्रतियोगिता रेनबो पब्लिक स्कूल ने जीती। प्रतियोगिता में 24 स्कूलों ने प्रतिभाग किया।
सीनियर वर्ग में रजत बहुगुणा व पारस पांडेय (रेनबो) प्रथम , रितेश पांडेय व सुमित भट्ट (सेंट थेरेसास कान्वेंट स्कूल) द्वितीय और हिमांशु गार्गी व गार्गी धनाई (देवभूमि पब्लिक स्कूल नकोट) तृतीय स्थान पर रहे।
जूनियर वर्ग में दिव्यांशु रावत व प्रांशु रावत (रेनबो) ने पहला, मानवी शर्मा व यशस्वी भट्ट (सेमफोर्ड स्कूल बेलकंडी) ने दूसरा और कार्तिकेय उनियाल व सुधांशु डिमरी (कान्वेंट) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
घुड़सवारों का प्रदर्शन
श्रीनगर। एसएसबी सीटीसी (केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र) की घुड़सवार टीम ने घुड़सवारी का प्रदर्शन किया। एसएसबी के घोड़ों ने दौड़ के साथ कलाबाजी का प्रदर्शन किया।