{"_id":"5a032ceb4f1c1b86698ba35c","slug":"15101576435-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अंत्वोगत्वा सीवर का गंदी पानी जाएगा गंगा नदी में ही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अंत्वोगत्वा सीवर का गंदी पानी जाएगा गंगा नदी में ही
Updated Wed, 08 Nov 2017 09:42 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
नमामि गंगे योजना के तहत क्लीन फॉर मिशन गंगा में सीवर शोधन संयंत्र केंद्र जगजीतपुर से रानीमाजरा तक 10 किमी लंबी नई नहर का निर्माण किया जा रहा है। कहा तो जा रहा है कि इससे सीवर शोधित जल तथा क्षमता से अधिक सीवर आने पर जो गंदा पानी गंगा में छोड़ा जाता है वह नहर बनने के बाद गंगा में नहीं जाएगा। जबकि धरातल पर हकीकत यह है कि नहर बनने के बाद भी सीवर शोधित गंदा पानी गंगा में ही जाएगा। नहर बनने से फर्क सिर्फ इतना पड़ेगा कि अभी सीवर का गंदा पानी 10 किमी पहले गंगा में छोड़ा जा रहा है, नहर बनने के बाद 10 किमी दूर छोड़ा जाएगा।
सीवर नहर जगजीतपुर से रानीमाजरा तक बनाई जा रही है और रानीमाजरा से सीवर का पानी कहां जाएगा, इस बारे में फिलहाल कोई योजना सिंचाई विभाग के पास नहीं है। कहा यह जा रहा है कि नहर बनने से सीवर के पानी का उपयोग किसान सिंचाई में करेंगे, इसलिए सीवर का पानी बचेगा ही नहीं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बरसात में जब चार महीने किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं होती, तबं क्या होगा। जबकि सीवर का पानी प्रतिदिन 24 घंटे जनरेट होगा। जाहिर है कि सीवर नहर बनने से भी गंदे पानी से गंगा नदी की मुक्ति होने वाली नहीं है। जिन गांवों से सीवर नहर को ले जाया जा रहा है, वहां के किसान अपने खेतों पर नलकूप व बोरिंग से सिंचाई करते हैं। अभी तो किसान खुली नहर बनाने का ही विरोध कर रहे हैं। जब सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं होगी तब सीवर का गंदा पानी कहां जाएगा इसका जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।
साढ़े नौ करोड़ लीटर पानी रोज निकलेगा
जगजीतपुर स्थित सीवर शोधन संयंत्र में 27 एमएलडी का संयंत्र पहले से है और नमामि गंगे में 68 एमएलडी का नया बनना है। इसको मिलाकर 95 एमएलडी पानी यानि 9 करोड़ 50 लाख लीटर सीवर शोधित जल प्रतिदिन होगा, जो बहुत ज्यादा है। सिंचाई में इतना पानी कंज्यूम हो जाए तो अच्छी बात है इससे ग्राउंड वाटर की बचत होगी।
विज्ञापन
- अजय कुमार अधिशासी अभियंता, अनुरक्षण शाखा गंगा, उत्तराखंड जल संस्थान हरिद्वार
सीवर नहर का पानी सिंचाई में कंज्यूम हो जाएगा
सीवर नहर का पूरा पानी सिंचाई में कंज्यूम हो जाएगा। प्लेन में हर समय सिंचाई होती रहती है, इसलिए जितना पानी होगा उतना कंज्यूम हो जाएगा इसलिए गंगा नदी में नहीं जाएगा। फिलहाल सिंचाई विभाग की रानीमाजरा तक सीवर नहर बनाने की ही योजना है। रानीमाजरा से सीवर का गंदा पानी गंगा नदी जाने से रोकने के लिए डैम आदि बनाने की अभी कोई योजना नहीं है। - एससी जोशी अधीक्षण अभियंता, सिंचाई मंडल हरिद्वार
हरिद्वार।
नमामि गंगे योजना के तहत क्लीन फॉर मिशन गंगा में सीवर शोधन संयंत्र केंद्र जगजीतपुर से रानीमाजरा तक 10 किमी लंबी नई नहर का निर्माण किया जा रहा है। कहा तो जा रहा है कि इससे सीवर शोधित जल तथा क्षमता से अधिक सीवर आने पर जो गंदा पानी गंगा में छोड़ा जाता है वह नहर बनने के बाद गंगा में नहीं जाएगा। जबकि धरातल पर हकीकत यह है कि नहर बनने के बाद भी सीवर शोधित गंदा पानी गंगा में ही जाएगा। नहर बनने से फर्क सिर्फ इतना पड़ेगा कि अभी सीवर का गंदा पानी 10 किमी पहले गंगा में छोड़ा जा रहा है, नहर बनने के बाद 10 किमी दूर छोड़ा जाएगा।
सीवर नहर जगजीतपुर से रानीमाजरा तक बनाई जा रही है और रानीमाजरा से सीवर का पानी कहां जाएगा, इस बारे में फिलहाल कोई योजना सिंचाई विभाग के पास नहीं है। कहा यह जा रहा है कि नहर बनने से सीवर के पानी का उपयोग किसान सिंचाई में करेंगे, इसलिए सीवर का पानी बचेगा ही नहीं। लेकिन वास्तविकता यह है कि बरसात में जब चार महीने किसानों को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं होती, तबं क्या होगा। जबकि सीवर का पानी प्रतिदिन 24 घंटे जनरेट होगा। जाहिर है कि सीवर नहर बनने से भी गंदे पानी से गंगा नदी की मुक्ति होने वाली नहीं है। जिन गांवों से सीवर नहर को ले जाया जा रहा है, वहां के किसान अपने खेतों पर नलकूप व बोरिंग से सिंचाई करते हैं। अभी तो किसान खुली नहर बनाने का ही विरोध कर रहे हैं। जब सिंचाई के लिए पानी की जरूरत नहीं होगी तब सीवर का गंदा पानी कहां जाएगा इसका जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।
विज्ञापन
साढ़े नौ करोड़ लीटर पानी रोज निकलेगा
जगजीतपुर स्थित सीवर शोधन संयंत्र में 27 एमएलडी का संयंत्र पहले से है और नमामि गंगे में 68 एमएलडी का नया बनना है। इसको मिलाकर 95 एमएलडी पानी यानि 9 करोड़ 50 लाख लीटर सीवर शोधित जल प्रतिदिन होगा, जो बहुत ज्यादा है। सिंचाई में इतना पानी कंज्यूम हो जाए तो अच्छी बात है इससे ग्राउंड वाटर की बचत होगी।
विज्ञापन
- अजय कुमार अधिशासी अभियंता, अनुरक्षण शाखा गंगा, उत्तराखंड जल संस्थान हरिद्वार
सीवर नहर का पानी सिंचाई में कंज्यूम हो जाएगा
सीवर नहर का पूरा पानी सिंचाई में कंज्यूम हो जाएगा। प्लेन में हर समय सिंचाई होती रहती है, इसलिए जितना पानी होगा उतना कंज्यूम हो जाएगा इसलिए गंगा नदी में नहीं जाएगा। फिलहाल सिंचाई विभाग की रानीमाजरा तक सीवर नहर बनाने की ही योजना है। रानीमाजरा से सीवर का गंदा पानी गंगा नदी जाने से रोकने के लिए डैम आदि बनाने की अभी कोई योजना नहीं है। - एससी जोशी अधीक्षण अभियंता, सिंचाई मंडल हरिद्वार