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सैन्य सम्मान के साथ हुआ शहीद सूरज का अंतिम संस्कार
Updated Sat, 04 Nov 2017 10:26 PM IST
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कर्णप्रयाग। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए फलोटा गांव के वीर सैनिक सूरज सिंह तोपाल का शनिवार को अलकनंदा और पिंडर के संगम पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। सेना के जवानों ने 24 राउंड फायर कर शहीद को अंतिम विदाई दी। इस दौरान जैक्लाई(जम्मू एंड कश्मीर इंफैंट्री), गढ़वाल स्काउट, 9 माउंटेन, आर्टिलरी सहित अन्य यूनिटों के सैनिकों और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को श्रद्धांजलि दी। अंतिम संस्कार के दौरान जहां इंडियन आर्मी के जयकारे लगे, वहीं पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
कर्णप्रयाग ब्लॉक के फलोटा गांव निवासी नारायण सिंह और विमला देवी का इकलौता चिराग सूरज सिंह तोपाल (25) 50 राष्ट्रीय राइफल्स में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में तैनात था।
2 नवंबर को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सूरज सिंह शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर शनिवार सुबह फलोटा गांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के बाद शहीद के जयकारों के साथ पार्थिव शरीर कर्णप्रयाग पहुंचा। मंडी परिसर से संगम घाट तक शहीद सूरज तोपाल, इंडियन आर्मी के जयकारे लगे तथा लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ भी नारेबाजी की। शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था।
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शहीद के अंतिम संस्कार में 9 माउंटेन के बिग्रेडियर रोहित चौधरी, आर्टिलरी से कर्नल मनु शुक्ला, 10 जैक्लाई के मेजर सुहैल प्रह्लाद माडू, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, थराली के विधायक मगन लाल, कर्णप्रयाग के एसएस नेगी, पूर्व विधानसबा उपाध्यक्ष डॉ. एपी मैखुरी, 50 आरआर से नायब सूबेदार महेंद्र सिंह, सिपाही सुमन रावत, जिला सैनिक बोर्ड के अधिकारी कर्नल नवीन डबराल, एडीएम ईला गिरि, एसडीएम केएन गोस्वामी, तहसीलदार विपिन चंद्र पंत, राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी, बीडीओ एमपी भट्ट सहित हजारों लोग, जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी, स्वतंत्रता संग्रामी सेनानियों के आश्रित और व्यापारी मौजूद थे।
सूरज के बलिदान को नहीं भुलाया जा सकता : सीएम
सूरज की स्मृति में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लगाया पौधा
कर्णप्रयाग। शहीद सूरज सिंह तोपाल की स्मृति में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संगम घाट के समीप शिवालय के पास आंवले का एक पौधा भी लगाया। सीएम को पौधा पर्यावरण मित्र जयकृत नेगी ने उपलब्ध कराया था। इस दौरान सीएम ने कहा कि प्रदेश और देश सूरज के बलिदान को नहीं भुला सकता।
शनिवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का गैरसैंण दौरा प्रस्तावित था। ऐसे में कर्णप्रयाग ब्लॉक के फलोटा गांव के सूरज सिंह तोपाल के शहीद होने की सूचना पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शनिवार सुबह करीब 11 बजे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत गौचर हेलीपैड पहुंचे। साढ़े 11 बजे संगम घाट पर शहीद को पुष्प चक्र अर्पित किए। करीब एक घंटे तक घाट पर रहने के बाद प्रेस से बातचीत में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सूरज का बलिदान सबसे बड़ा बलिदान है।
आतंकी को ढेर कर शहीद हुआ सूरज
एक घंटे के ऑपरेशन में आतंकी ने घात लगाकर किया हमला
कर्णप्रयाग। सूरज सिंह दिलेर और बहादुर थे। शहीद होने से पहले उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया था।
शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे 50 आरआर के नायब सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी पोस्टिंग पुलवामा जिले के लेदपुरा में थी। दो 2 नवंबर को सूचना मिली कि पोस्ट से तकरीबन दो किमी आगे सांभौरा में आंतकी छिपे हैं। इसके लिए सैनिकों ने ऑपरेशन चलाया। शाम करीब सात से नौ बजे के बीच आतंकी ठिकाने की घेराबंदी की गई। इस दौरान ठिकाने में छिपे आतंकी ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। कुछ देर तक चली मुठभेड़ में एक आतंकवादी को ढेर कर दिया था। इस मुठभेड़ में सूरज को भी गोली लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वह शहीद हो गए। शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे जम्मू से सेना के हेलीकॉप्टर से उनके पार्थिव शरीर को देहरादून लाया गया। यहां से सड़क मार्ग से शनिवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। सूरज के साथ सेना में भर्ती हुए दिलबर, सहपाठी प्रदीप तोपाल और पंकज तोपाल का कहना है कि सूरज बचपन से ही बहादुर और दिलेर था।
....हे म्या सूरज अब कख बे दिखेलू तू!
सूरज के शहीद होने पर फलोटा गांव में शोक की लहर
हर दिल रोया, हर आंख छलछलाई
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग।
जम्मू-कश्मीर के फलोटा गांव में शहीद हुए सूरज की मौत से उनके गांव फलोटा सहित समूचे चमोली जिले में शोक की लहर है। शुक्रवार रात गांव के हर व्यक्ति ने जागकर काटी। शनिवार सुबह सूरज के ताबूत के गांव पहुंचने पर हर दिल रोया तो हर आंख छलछला गई। सेना से सेवानिवृत्त हुए पिता ने हिम्मत जुटाते हुए बेटे की अर्थी को कंधा दिया। बुजुर्ग महिलाएं हे म्या सूरज अब कखे दिखेलू तू ( हे मेरे सूरज अब कहां से दिखेगा तू) कह-कहकर रो रही थीं।
छह साल पहले भर्ती हुए सूरज की मौत की खबर गांव में 2 नवंबर की शाम करीब आठ बजे पहुंची। शुक्रवार सुबह पूरे क्षेत्र में सूरज की शहादत की खबर पहुंच गई। खबर से पूरे क्षेत्र में जहां मातम पसर गया, वहीं फलोटा गांव में हर व्यक्ति ने शुक्रवार की रात जाग कर काटी। सूरज के पिता कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. जिसने देश रक्षा में प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन सरकार को अब जल्द आतंकवाद पर फैसला लेना होगा। शहीद की बहन शशि, पूनम, सोनम, और दीपा का कहना है कि हमने अपना भाई खोया है, लेकिन प्रधानमंत्री और देश से ये अपील करना चाहती हैं कि अब कोई बहन अपना भाई न खोए। तीन बार प्रमुख रहे और क्षेत्र के वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि 1971 के बाद क्षेत्र में किसी ने देश के लिए शहादत दी है।
सोशल मीडिया में भी शहादत को सलाम
कर्णप्रयाग। फलोटा गांव के वीर सपूत सूरज तोपाल को सोशल मीडिया में भी हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी तथा उनकी शहादत को सलाम किया है। शुक्रवार से शनिवार तक के तमाम घटनाक्रमों को लेकर कई लोगों ने सोशल मीडिया में आतंकवाद को लेकर कड़े फैसले की अपील भी सरकारों से की है।
कर्णप्रयाग बाजार रहा बंद
कर्णप्रयाग। विकासखंड के फलोटा गांव के सूरज के आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद होने पर व्यापार संघ ने भी शोक जताया। शनिवार सुबह से दोपहर तक नगर के सभी प्रमुख बाजार बंद रहे। व्यापार संघ अध्यक्ष बृजेश बिष्ट, देवी प्रसाद मैखुरी, महामंत्री उमेश खंडूड़ी सहित अन्य के नेतृत्व में अंतिम संस्कार में शामिल होकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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कर्णप्रयाग ब्लॉक के फलोटा गांव निवासी नारायण सिंह और विमला देवी का इकलौता चिराग सूरज सिंह तोपाल (25) 50 राष्ट्रीय राइफल्स में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में तैनात था।
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2 नवंबर को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सूरज सिंह शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर शनिवार सुबह फलोटा गांव पहुंचा। अंतिम दर्शन के बाद शहीद के जयकारों के साथ पार्थिव शरीर कर्णप्रयाग पहुंचा। मंडी परिसर से संगम घाट तक शहीद सूरज तोपाल, इंडियन आर्मी के जयकारे लगे तथा लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ भी नारेबाजी की। शहीद की अंतिम यात्रा में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था।
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शहीद के अंतिम संस्कार में 9 माउंटेन के बिग्रेडियर रोहित चौधरी, आर्टिलरी से कर्नल मनु शुक्ला, 10 जैक्लाई के मेजर सुहैल प्रह्लाद माडू, सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, थराली के विधायक मगन लाल, कर्णप्रयाग के एसएस नेगी, पूर्व विधानसबा उपाध्यक्ष डॉ. एपी मैखुरी, 50 आरआर से नायब सूबेदार महेंद्र सिंह, सिपाही सुमन रावत, जिला सैनिक बोर्ड के अधिकारी कर्नल नवीन डबराल, एडीएम ईला गिरि, एसडीएम केएन गोस्वामी, तहसीलदार विपिन चंद्र पंत, राजस्व निरीक्षक एसएस नेगी, बीडीओ एमपी भट्ट सहित हजारों लोग, जनप्रतिनिधि, राज्य आंदोलनकारी, स्वतंत्रता संग्रामी सेनानियों के आश्रित और व्यापारी मौजूद थे।
सूरज के बलिदान को नहीं भुलाया जा सकता : सीएम
सूरज की स्मृति में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लगाया पौधा
कर्णप्रयाग। शहीद सूरज सिंह तोपाल की स्मृति में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने संगम घाट के समीप शिवालय के पास आंवले का एक पौधा भी लगाया। सीएम को पौधा पर्यावरण मित्र जयकृत नेगी ने उपलब्ध कराया था। इस दौरान सीएम ने कहा कि प्रदेश और देश सूरज के बलिदान को नहीं भुला सकता।
शनिवार को सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का गैरसैंण दौरा प्रस्तावित था। ऐसे में कर्णप्रयाग ब्लॉक के फलोटा गांव के सूरज सिंह तोपाल के शहीद होने की सूचना पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत शहीद के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शनिवार सुबह करीब 11 बजे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत गौचर हेलीपैड पहुंचे। साढ़े 11 बजे संगम घाट पर शहीद को पुष्प चक्र अर्पित किए। करीब एक घंटे तक घाट पर रहने के बाद प्रेस से बातचीत में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सूरज का बलिदान सबसे बड़ा बलिदान है।
आतंकी को ढेर कर शहीद हुआ सूरज
एक घंटे के ऑपरेशन में आतंकी ने घात लगाकर किया हमला
कर्णप्रयाग। सूरज सिंह दिलेर और बहादुर थे। शहीद होने से पहले उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया था।
शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे 50 आरआर के नायब सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी पोस्टिंग पुलवामा जिले के लेदपुरा में थी। दो 2 नवंबर को सूचना मिली कि पोस्ट से तकरीबन दो किमी आगे सांभौरा में आंतकी छिपे हैं। इसके लिए सैनिकों ने ऑपरेशन चलाया। शाम करीब सात से नौ बजे के बीच आतंकी ठिकाने की घेराबंदी की गई। इस दौरान ठिकाने में छिपे आतंकी ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। कुछ देर तक चली मुठभेड़ में एक आतंकवादी को ढेर कर दिया था। इस मुठभेड़ में सूरज को भी गोली लगी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वह शहीद हो गए। शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे जम्मू से सेना के हेलीकॉप्टर से उनके पार्थिव शरीर को देहरादून लाया गया। यहां से सड़क मार्ग से शनिवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। सूरज के साथ सेना में भर्ती हुए दिलबर, सहपाठी प्रदीप तोपाल और पंकज तोपाल का कहना है कि सूरज बचपन से ही बहादुर और दिलेर था।
....हे म्या सूरज अब कख बे दिखेलू तू!
सूरज के शहीद होने पर फलोटा गांव में शोक की लहर
हर दिल रोया, हर आंख छलछलाई
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग।
जम्मू-कश्मीर के फलोटा गांव में शहीद हुए सूरज की मौत से उनके गांव फलोटा सहित समूचे चमोली जिले में शोक की लहर है। शुक्रवार रात गांव के हर व्यक्ति ने जागकर काटी। शनिवार सुबह सूरज के ताबूत के गांव पहुंचने पर हर दिल रोया तो हर आंख छलछला गई। सेना से सेवानिवृत्त हुए पिता ने हिम्मत जुटाते हुए बेटे की अर्थी को कंधा दिया। बुजुर्ग महिलाएं हे म्या सूरज अब कखे दिखेलू तू ( हे मेरे सूरज अब कहां से दिखेगा तू) कह-कहकर रो रही थीं।
छह साल पहले भर्ती हुए सूरज की मौत की खबर गांव में 2 नवंबर की शाम करीब आठ बजे पहुंची। शुक्रवार सुबह पूरे क्षेत्र में सूरज की शहादत की खबर पहुंच गई। खबर से पूरे क्षेत्र में जहां मातम पसर गया, वहीं फलोटा गांव में हर व्यक्ति ने शुक्रवार की रात जाग कर काटी। सूरज के पिता कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. जिसने देश रक्षा में प्राणों का बलिदान दिया, लेकिन सरकार को अब जल्द आतंकवाद पर फैसला लेना होगा। शहीद की बहन शशि, पूनम, सोनम, और दीपा का कहना है कि हमने अपना भाई खोया है, लेकिन प्रधानमंत्री और देश से ये अपील करना चाहती हैं कि अब कोई बहन अपना भाई न खोए। तीन बार प्रमुख रहे और क्षेत्र के वयोवृद्ध सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि 1971 के बाद क्षेत्र में किसी ने देश के लिए शहादत दी है।
सोशल मीडिया में भी शहादत को सलाम
कर्णप्रयाग। फलोटा गांव के वीर सपूत सूरज तोपाल को सोशल मीडिया में भी हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी तथा उनकी शहादत को सलाम किया है। शुक्रवार से शनिवार तक के तमाम घटनाक्रमों को लेकर कई लोगों ने सोशल मीडिया में आतंकवाद को लेकर कड़े फैसले की अपील भी सरकारों से की है।
कर्णप्रयाग बाजार रहा बंद
कर्णप्रयाग। विकासखंड के फलोटा गांव के सूरज के आतंकवादी मुठभेड़ में शहीद होने पर व्यापार संघ ने भी शोक जताया। शनिवार सुबह से दोपहर तक नगर के सभी प्रमुख बाजार बंद रहे। व्यापार संघ अध्यक्ष बृजेश बिष्ट, देवी प्रसाद मैखुरी, महामंत्री उमेश खंडूड़ी सहित अन्य के नेतृत्व में अंतिम संस्कार में शामिल होकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।