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शिक्षकों और संसाधनों के लिए जूझता वॉर मेमोरियल कॉलेज
Updated Mon, 30 Oct 2017 10:18 PM IST
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कर्णप्रयाग। सौ साल पहले बेहतर शैक्षणिक स्तर की परिकल्पना को लेकर स्थापित हुआ वार मेमोरियल (समर स्मारक) स्कूल आज शिक्षकों और संसाधनों से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि अंग्रेजी माध्यम में शुरू हुआ स्कूल आज जीआईसी में बदल गया। अब यहां भवन जर्जर बने हैं तो कई महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षक नहीं हैं।
नारायणबगड़ ब्लाक के कफारतीर गांव के वीर सेनानी और विक्टोरिया क्रॉस विजेता स्व. दरवान सिंह नेगी ने गुलामी के दौर में चमोली जिले के केंद्र बिंदु कर्णप्रयाग में स्कूल की स्थापना की मांग की थी। इस पर वर्ष 1918 में यहां अंग्रेजी माध्यम का स्कूल स्थापित हुआ।
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वर्ष 1943 में यह हाईस्कूल और 1958 में यह राजकीय इंटर कालेज में तब्दील हो गया। अब स्थापना के सौवे साल में प्रवेश कर रहे इस स्कूल में शिक्षकों और संसाधनों का टोटा बना है। यहां वाणिज्य विषय में यहां लंबे समय से शिक्षक नहीं हैं, जबकि हाईस्कूल में गणित, इंटर में गणित और भौतिकी विषय में भी शिक्षक नहीं हैं। यही नहीं विज्ञान प्रयोगशाला, छात्रावास मुख्य भवन जर्जर हैं तो खेल मैदान बदहाल पड़ा है। विद्यालय की पीटीए अध्यक्ष भारती मिंगवाल गणित, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान सहित कई महत्वपूर्ण विषयों में शिक्षक न होने से छात्र-छात्राएं मजबूरन अन्यत्र निजी विद्यालयों में अध्ययन करने को मजबूर हैं।
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