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खनन बंद होने से निगम उठा रहे रोजाना 13 लाख घाटा, नवंबर में शुरू होने की उम्मीद
Updated Wed, 25 Oct 2017 02:02 AM IST
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खनन शुरू न होने से प्रतिदिन 13 लाख का घाटा
-- सरकार को अब तक लग चुकी है सवा तीन करोड़ की चपत, डोईवाला में हैं खनन के छह लॉट
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। प्रदेश सरकार एक तरफ वित्तीय संकट का रोना रो रही है, वहीं मुनाफे वाले विभागों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के 25 दिनों बाद भी खनन का काम शुरू न हो पाने के कारण वन विकास निगम को प्रतिदिन 13 लाख का घाटा हो रहा है। अब तक यह घाटा सवा तीन करोड़ तक पहुंच गया है। अब वन निगम का प्रयास है कि किसी भी तरह नवंबर महीने से खनन का काम शुरू हो जाए।
जून में खनन पर रोक लगने के बाद निगम के अधिकारियों ने तौल कांटे के ठेकेदार को अपने कांटे उखाड़ने का आदेश नहीं दिया लिहाजा अक्टूबर तक उसी ठेकेदार के कांटे लगे रहे। निगम की व्यवस्थागत खामियों के चलते नौ अक्टूबर को टेंडर निकाले जाने थे, जिन पर कोर्ट की रोक लग गई। अब न्यायालय ने निगम को नए सिरे से तौल कांटो के टेंडर निकालने का निर्देश दिया है। टेंडर प्रक्रिया तीन नवंबर को शुरू होगी। छह को टेंडर खोले जाएंगे और सभी औपचारिकताओं को 11 नवंबर तक पूरा किया जाना है और उसके बाद ही खनन शुरू हो सकेगा।
डोईवाला परिक्षेत्र में वन विकास निगम के पास सौंग-एक, धन्याडी, गूलरघाटी, सौंग-दो में कालूवाला, बक्सरवाला, सौंग-तीन में धर्मूचक, जाखन-एक में रानीपोखरी, भोगपुर और जाखन-दो में माजरी ग्रांट में खनन लॉट है, जहां से लोगों को सरकारी दरों पर उप खनिज मुहैया कराया जाता है। सभी जरूरी औपचारिकताएं समय पर नहीं होने से निगम की हीलाहवाली सामने आई है, जिससे रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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खनन सामग्री न मिलने से विकास कार्य ठप
सरकारी और निजी क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्य खनन सामग्री न मिलने से पूरी तरह से ठप पडे़ हुए हैं। नगर पालिका क्षेत्र में संपर्क मार्ग, खडंजा, निर्माणाधीन हाईवे, प्रस्तावित पुल समेत तमाम सरकारी कार्यों में बाधा आ गई है। वहीं, लोगों को निजी निर्माण कार्य के लिए रेत और बजरी नहीं मिल पा रही है। इन दिनों लोग नये काम शुरू करते हैं। रेत-बजरी न मिलने से यह काम भी ठप पड़ गए हैं।
दूसरे प्रदेशों से खरीदा जा रहा है सामान
डोईवाला। जनपद के डोईवाला क्षेत्र में वन विकास निगम के स्वीकृत खनन गेट से उप खनिज की निकासी शुरू नहीं होने से वर्तमान समय में हिमालच प्रदेश और हरियाणा से उप खनिज की आमद हो रही है। भारी वाहनों से इन प्रदेशों से खनन सामग्री देहरादून पहुंचाई जा रही है। लोगों को जो खनन सामग्री स्थानीय स्तर पर 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाती है अब उसे 140 से 150 रुपये प्रति क्विंटल खरीदनी पड़ रही है।
सामग्री न मिलने से कारोबारी भी परेशान
नदियों से खनन सामग्री न मिलने से सप्लायर्स की व्यवस्थाएं और तैयारियां ठप हो गई हैं। तीन माह से बंद नदियों से खनन शुरू होने की उम्मीद कारोबारी को होती है। खनन शुरू होने में लंबा विलंब होने से कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। सरकार को खनन शुरू कराने को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए।
- प्रदीप बंगा, मारखम ग्रांट।
निर्धारित तिथि से नदियों में खनन शुरू नहीं होने का असर खनन कारोबार पर पड़ रहा है। लोग खनन सामग्री की मांग कर रहे है। कारोबारी अपने वाहनों की किश्त नहीं दे पा रहे है। खनन शुरू नहीं होने से आर्थिक समस्याएं भी कारोबारियों को उठानी पर रही है।
- हरभजन सिंह, डोईवाला।
दूसरे राज्यों से वाहन अधिक से अधिक 30 टन तक खनन सामग्री यहां ला रहे हैं जबकि उत्तराखंड के वाहन केवल 9 से 15 टन में स्वीकृत हैं। ऐसे में स्थानीय सप्लायर्स को भारी नुकसान हो रहा है। कारोबारियों को खनन सामग्री के लिए पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।
-- दिलीप कुमार, फतेहपुर माजरी।
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वन विकास निगम जल्द नदियों में खनन शुरू करने की प्रक्रिया कर रहा है। टेंडर की तिथि तय कर दी गई है। निगम पूरा प्रयास करेगा कि खनन के लिए निर्धारित लक्ष्य को इसी अवधि में पाया जाए। संभवत: नवंबर के पहले पखवाडे़ से खनन शुरू हो जाएगा।
-डा. दिवाकर सिन्हा, क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम।
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खनन शुरू न होने से मजदूरों के रोजगार पर संकट
रायवाला (ब्यूरो)। अक्टूबर अंत तक खनन का काम शुरू न होने के कारण मजदूरों के रोजगार पर तो संकट छा गया है। वहीं रायवाला क्षेत्र में नया आशियाना बनाने वाले लोगों काम शुरू नहीं करवा पा रहे हैं। खनन सामग्री नहीं मिलने से क्षेत्र के सैकड़ों लोग परेशानी से जूझ रहे हैं। उन्हें मजबूरन हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों से महंगे दामों पर उप खनिज खरीदना पड़ रहा है। खनन सामग्री नहीं मिलने से नए घर के निर्माण में जुटे लोग ही नहीं, मजबूर तबका भी दो-जून की रोटी के लिए परेशान हैं। इससे जुड़े कारोबारियों का रोजगार पर भी ठप हो गया है। रायवाला निवासी श्रमिक अब्बल सिंह, धीरज, चतर सिंह और राजकुमार का कहना है कि खनन सामग्री नहीं मिलने से लोग निर्माण कार्य को रोके हुए हैं। परिवार का गुजारा मजदूरी से ही चलता है, लेकिन खनन पर पाबंदी की असर अब उनके परिवार पर भी पड़ रहा है। मकान बनवा रहे धन सिंह धनै, आशीष सानथ्री, संजय पोखरियाल, बसंत कंडवाल, केएन सिंह सजवाण और कारोबारी संजय भट्ट और प्रवीन रावत आदि का कहना है कि अक्टूबर में खनन खुल जाता था, लेकिन अब तक खनन नहीं होने से दिक्कत पेश आ रही है।
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खनन शुरू न होने से प्रतिदिन 13 लाख का घाटा
-- सरकार को अब तक लग चुकी है सवा तीन करोड़ की चपत, डोईवाला में हैं खनन के छह लॉट
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। प्रदेश सरकार एक तरफ वित्तीय संकट का रोना रो रही है, वहीं मुनाफे वाले विभागों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के 25 दिनों बाद भी खनन का काम शुरू न हो पाने के कारण वन विकास निगम को प्रतिदिन 13 लाख का घाटा हो रहा है। अब तक यह घाटा सवा तीन करोड़ तक पहुंच गया है। अब वन निगम का प्रयास है कि किसी भी तरह नवंबर महीने से खनन का काम शुरू हो जाए।
जून में खनन पर रोक लगने के बाद निगम के अधिकारियों ने तौल कांटे के ठेकेदार को अपने कांटे उखाड़ने का आदेश नहीं दिया लिहाजा अक्टूबर तक उसी ठेकेदार के कांटे लगे रहे। निगम की व्यवस्थागत खामियों के चलते नौ अक्टूबर को टेंडर निकाले जाने थे, जिन पर कोर्ट की रोक लग गई। अब न्यायालय ने निगम को नए सिरे से तौल कांटो के टेंडर निकालने का निर्देश दिया है। टेंडर प्रक्रिया तीन नवंबर को शुरू होगी। छह को टेंडर खोले जाएंगे और सभी औपचारिकताओं को 11 नवंबर तक पूरा किया जाना है और उसके बाद ही खनन शुरू हो सकेगा।
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डोईवाला परिक्षेत्र में वन विकास निगम के पास सौंग-एक, धन्याडी, गूलरघाटी, सौंग-दो में कालूवाला, बक्सरवाला, सौंग-तीन में धर्मूचक, जाखन-एक में रानीपोखरी, भोगपुर और जाखन-दो में माजरी ग्रांट में खनन लॉट है, जहां से लोगों को सरकारी दरों पर उप खनिज मुहैया कराया जाता है। सभी जरूरी औपचारिकताएं समय पर नहीं होने से निगम की हीलाहवाली सामने आई है, जिससे रोजाना राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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खनन सामग्री न मिलने से विकास कार्य ठप
सरकारी और निजी क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्य खनन सामग्री न मिलने से पूरी तरह से ठप पडे़ हुए हैं। नगर पालिका क्षेत्र में संपर्क मार्ग, खडंजा, निर्माणाधीन हाईवे, प्रस्तावित पुल समेत तमाम सरकारी कार्यों में बाधा आ गई है। वहीं, लोगों को निजी निर्माण कार्य के लिए रेत और बजरी नहीं मिल पा रही है। इन दिनों लोग नये काम शुरू करते हैं। रेत-बजरी न मिलने से यह काम भी ठप पड़ गए हैं।
दूसरे प्रदेशों से खरीदा जा रहा है सामान
डोईवाला। जनपद के डोईवाला क्षेत्र में वन विकास निगम के स्वीकृत खनन गेट से उप खनिज की निकासी शुरू नहीं होने से वर्तमान समय में हिमालच प्रदेश और हरियाणा से उप खनिज की आमद हो रही है। भारी वाहनों से इन प्रदेशों से खनन सामग्री देहरादून पहुंचाई जा रही है। लोगों को जो खनन सामग्री स्थानीय स्तर पर 40 से 50 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाती है अब उसे 140 से 150 रुपये प्रति क्विंटल खरीदनी पड़ रही है।
सामग्री न मिलने से कारोबारी भी परेशान
नदियों से खनन सामग्री न मिलने से सप्लायर्स की व्यवस्थाएं और तैयारियां ठप हो गई हैं। तीन माह से बंद नदियों से खनन शुरू होने की उम्मीद कारोबारी को होती है। खनन शुरू होने में लंबा विलंब होने से कारोबारियों को नुकसान हो रहा है। सरकार को खनन शुरू कराने को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए।
- प्रदीप बंगा, मारखम ग्रांट।
निर्धारित तिथि से नदियों में खनन शुरू नहीं होने का असर खनन कारोबार पर पड़ रहा है। लोग खनन सामग्री की मांग कर रहे है। कारोबारी अपने वाहनों की किश्त नहीं दे पा रहे है। खनन शुरू नहीं होने से आर्थिक समस्याएं भी कारोबारियों को उठानी पर रही है।
- हरभजन सिंह, डोईवाला।
दूसरे राज्यों से वाहन अधिक से अधिक 30 टन तक खनन सामग्री यहां ला रहे हैं जबकि उत्तराखंड के वाहन केवल 9 से 15 टन में स्वीकृत हैं। ऐसे में स्थानीय सप्लायर्स को भारी नुकसान हो रहा है। कारोबारियों को खनन सामग्री के लिए पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।
-- दिलीप कुमार, फतेहपुर माजरी।
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वन विकास निगम जल्द नदियों में खनन शुरू करने की प्रक्रिया कर रहा है। टेंडर की तिथि तय कर दी गई है। निगम पूरा प्रयास करेगा कि खनन के लिए निर्धारित लक्ष्य को इसी अवधि में पाया जाए। संभवत: नवंबर के पहले पखवाडे़ से खनन शुरू हो जाएगा।
-डा. दिवाकर सिन्हा, क्षेत्रीय प्रबंधक, वन विकास निगम।
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खनन शुरू न होने से मजदूरों के रोजगार पर संकट
रायवाला (ब्यूरो)। अक्टूबर अंत तक खनन का काम शुरू न होने के कारण मजदूरों के रोजगार पर तो संकट छा गया है। वहीं रायवाला क्षेत्र में नया आशियाना बनाने वाले लोगों काम शुरू नहीं करवा पा रहे हैं। खनन सामग्री नहीं मिलने से क्षेत्र के सैकड़ों लोग परेशानी से जूझ रहे हैं। उन्हें मजबूरन हिमाचल प्रदेश व अन्य राज्यों से महंगे दामों पर उप खनिज खरीदना पड़ रहा है। खनन सामग्री नहीं मिलने से नए घर के निर्माण में जुटे लोग ही नहीं, मजबूर तबका भी दो-जून की रोटी के लिए परेशान हैं। इससे जुड़े कारोबारियों का रोजगार पर भी ठप हो गया है। रायवाला निवासी श्रमिक अब्बल सिंह, धीरज, चतर सिंह और राजकुमार का कहना है कि खनन सामग्री नहीं मिलने से लोग निर्माण कार्य को रोके हुए हैं। परिवार का गुजारा मजदूरी से ही चलता है, लेकिन खनन पर पाबंदी की असर अब उनके परिवार पर भी पड़ रहा है। मकान बनवा रहे धन सिंह धनै, आशीष सानथ्री, संजय पोखरियाल, बसंत कंडवाल, केएन सिंह सजवाण और कारोबारी संजय भट्ट और प्रवीन रावत आदि का कहना है कि अक्टूबर में खनन खुल जाता था, लेकिन अब तक खनन नहीं होने से दिक्कत पेश आ रही है।