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धान क्रय केंद्रों पर नही पहुंचे किसान
Updated Mon, 23 Oct 2017 10:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादराबाद।
सहकारी विभाग की ओर से संचालित क्रय केंद्रों पर किसान अब तक धान की बिक्री के लिए नहीं पहुंचे हैं, जबकि विभाग ने अपनी पूरी तैयारी कर रखी है। बताते चलें कि इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में धान की कटाई का कार्य चल रहा है जो अपने अंतिम पड़ाव में है।
अधिकतर धान खेतों से किसानों के घरों में आ चुका है। बावजूद किसान सरकार को धान नहीं बेच रहे हैं। जबकि सहकारिता विभाग की ओर से पूरे जिले में सात धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से अब तक किसी भी केंद्र पर धान की खरीद नहीं हो पाई है। जिला सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा ने बताया कि इस बार दलालों से किसानों को बचाने के लिए समितियों पर रजिस्ट्रेशन कराए गए थे, जिसके सत्यापन के लिए तहसील को भेजे गए थे। तहसील से सत्यापन के बाद किसानों की सूची समितियों को मिल चुकी है। अब धान बेचने वाला किसान को तीन दिन बाद ही धान का मूल्य उसके खाते में ई बैंकिंग या चेक से पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन अधिकतर पर बिचौलियों की भूमिका अधिक रहती थी। किसान राकेश राजपूत, प्रेम सिंह, अरविंद चौहान, धर्मपाल सिंह, हरि सिंह, चंद्रभान सैनी, अनिल चौहान, बालेश चौहान, मनोज चौहान का कहना है कि किसान नगद का हिसाब रखना चाहता है बाजार में उसे धान बेेचते ही उसका पैसा मिल जाता है
बहादराबाद।
सहकारी विभाग की ओर से संचालित क्रय केंद्रों पर किसान अब तक धान की बिक्री के लिए नहीं पहुंचे हैं, जबकि विभाग ने अपनी पूरी तैयारी कर रखी है। बताते चलें कि इस समय ग्रामीण क्षेत्रों में धान की कटाई का कार्य चल रहा है जो अपने अंतिम पड़ाव में है।
अधिकतर धान खेतों से किसानों के घरों में आ चुका है। बावजूद किसान सरकार को धान नहीं बेच रहे हैं। जबकि सहकारिता विभाग की ओर से पूरे जिले में सात धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से अब तक किसी भी केंद्र पर धान की खरीद नहीं हो पाई है। जिला सहायक निबंधक मनोज कुमार पुनेठा ने बताया कि इस बार दलालों से किसानों को बचाने के लिए समितियों पर रजिस्ट्रेशन कराए गए थे, जिसके सत्यापन के लिए तहसील को भेजे गए थे। तहसील से सत्यापन के बाद किसानों की सूची समितियों को मिल चुकी है। अब धान बेचने वाला किसान को तीन दिन बाद ही धान का मूल्य उसके खाते में ई बैंकिंग या चेक से पहुंचा दिया जाएगा। लेकिन अधिकतर पर बिचौलियों की भूमिका अधिक रहती थी। किसान राकेश राजपूत, प्रेम सिंह, अरविंद चौहान, धर्मपाल सिंह, हरि सिंह, चंद्रभान सैनी, अनिल चौहान, बालेश चौहान, मनोज चौहान का कहना है कि किसान नगद का हिसाब रखना चाहता है बाजार में उसे धान बेेचते ही उसका पैसा मिल जाता है
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