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धर्मनगरी ने की क्लोजर की मंदी से उबरने की तैयारी
Updated Sat, 14 Oct 2017 10:18 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
अधिकांश बंगाली सीजन गंगा क्लोजर की भेंट चढ़ जाने के बाद अब गुजराती यात्रियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। ये यात्री दीपावली के पहले आने शुरू हुए और अगले 15 दिनों में हरिद्वार में छाए रहेंगे। कार्तिक पूर्णिमा तक अब खचाखच भीड़ होने की उम्मीद मंदी से त्रस्त नगरी लगा रही है।
गौरतलब है कि जब से दशहरे से दीपावली के बीच गंगा क्लोजर होना शुरू हुआ है, तब से विशुद्ध रूप से गंगा प्रेमी बंगाली यात्री हरिद्वार के बजाय ऋषिकेश में डेरा जमाने लगे हैं। वर्ष दर वर्ष यह संख्या हरिद्वार में घट रही है और ऋषिकेश में बढ़ रही है। इसके विपरीत गुजराती यात्रियों ने गंगा न होते हुए भी हरिद्वार छोड़ा नहीं है। इस बार छोटी दीपावली 18 अक्तूबर की रात गंगा का आगमन पूरे वेग से हो जाएगा। यद्यपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय पुरोहित महासभा को दिया गया वचन पूरी तरह निभाया और गंगा क्लोजर के समय भी हरकी पैड़ी एवं अन्य घाटों पर पर्याप्त जल बना रहा। यह और बात है कि गंगा सफाई का कोई भी काम सिंचाई विभाग के स्तर पर होता दिखाई नहीं दिया है। अलबत्ता सामाजिक संस्थाएं गंगा से कचरा और पुराने वस्त्र निकालने का अभियान चलाती रही। मंदी का शिकार हरिद्वार के व्यापारियों ने भी इस अभियान में योगदान दिया। व्यापारियों की निगाह अब धनतेरस से शुरू होने वाले त्योहारों पर है। इन त्योहारों के लिए धर्मनगरी की सभी बस्तियों को अत्यंत भव्य रूप से सजाया जा रहा है। उम्मीद है कि दीपावली का बाजार मंदी का गम भुला देगा।
उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री कैलाश केशवानी स्वीकार करते हैं कि पर्व काल के दौरान क्लोजर ने हरिद्वार का बहुत सा व्यवसाय छीन लिया है। अब गुजराती सीजन चलने के पूरे आसार हैं। गुजराती यात्री दीपावली और भैयादूज के अवसर पर यमद्वितिया मनाने मथुरा जाते हैं तथा जमुना तट पर बैठकर गुजराती भाई अपनी बहनों से तिलक कराते हैं। लाखों गुजराती मथुरा पहुंचते हैं। पिछले करीब तीन दशकों से यह गुजराती मथुरा के साथ साथ हरिद्वार भी उतनी ही संख्या में आने लगे हैं। या तो मथुरा जाने से पूर्व तीन से पांच दिन का प्रवास हरिद्वार में करते हैं अथवा भैयादूज मनाने के बाद फिर यहां पहुंच जाते हैं। गुजराती यात्रियों की बदरी केदार यात्रा भी इन दिनों चलती है। इन यात्रियों की उपस्थिति का पूरा लाभ हरिद्वार के व्यवसाय जगत को मिलता आया है। साथ ही दीपावली के बाजार जोरदार रौनक और धन बाजार को देते हैं। इन दिनों पर्व को लेकर भारी उत्साह है। ज्वालापुर से लेकर भूपतवाला तक सभी बाजार जोर दार तैयारियों में जुटे हुए है।
हरिद्वार।
अधिकांश बंगाली सीजन गंगा क्लोजर की भेंट चढ़ जाने के बाद अब गुजराती यात्रियों का आगमन प्रारंभ हो गया है। ये यात्री दीपावली के पहले आने शुरू हुए और अगले 15 दिनों में हरिद्वार में छाए रहेंगे। कार्तिक पूर्णिमा तक अब खचाखच भीड़ होने की उम्मीद मंदी से त्रस्त नगरी लगा रही है।
गौरतलब है कि जब से दशहरे से दीपावली के बीच गंगा क्लोजर होना शुरू हुआ है, तब से विशुद्ध रूप से गंगा प्रेमी बंगाली यात्री हरिद्वार के बजाय ऋषिकेश में डेरा जमाने लगे हैं। वर्ष दर वर्ष यह संख्या हरिद्वार में घट रही है और ऋषिकेश में बढ़ रही है। इसके विपरीत गुजराती यात्रियों ने गंगा न होते हुए भी हरिद्वार छोड़ा नहीं है। इस बार छोटी दीपावली 18 अक्तूबर की रात गंगा का आगमन पूरे वेग से हो जाएगा। यद्यपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय पुरोहित महासभा को दिया गया वचन पूरी तरह निभाया और गंगा क्लोजर के समय भी हरकी पैड़ी एवं अन्य घाटों पर पर्याप्त जल बना रहा। यह और बात है कि गंगा सफाई का कोई भी काम सिंचाई विभाग के स्तर पर होता दिखाई नहीं दिया है। अलबत्ता सामाजिक संस्थाएं गंगा से कचरा और पुराने वस्त्र निकालने का अभियान चलाती रही। मंदी का शिकार हरिद्वार के व्यापारियों ने भी इस अभियान में योगदान दिया। व्यापारियों की निगाह अब धनतेरस से शुरू होने वाले त्योहारों पर है। इन त्योहारों के लिए धर्मनगरी की सभी बस्तियों को अत्यंत भव्य रूप से सजाया जा रहा है। उम्मीद है कि दीपावली का बाजार मंदी का गम भुला देगा।
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उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री कैलाश केशवानी स्वीकार करते हैं कि पर्व काल के दौरान क्लोजर ने हरिद्वार का बहुत सा व्यवसाय छीन लिया है। अब गुजराती सीजन चलने के पूरे आसार हैं। गुजराती यात्री दीपावली और भैयादूज के अवसर पर यमद्वितिया मनाने मथुरा जाते हैं तथा जमुना तट पर बैठकर गुजराती भाई अपनी बहनों से तिलक कराते हैं। लाखों गुजराती मथुरा पहुंचते हैं। पिछले करीब तीन दशकों से यह गुजराती मथुरा के साथ साथ हरिद्वार भी उतनी ही संख्या में आने लगे हैं। या तो मथुरा जाने से पूर्व तीन से पांच दिन का प्रवास हरिद्वार में करते हैं अथवा भैयादूज मनाने के बाद फिर यहां पहुंच जाते हैं। गुजराती यात्रियों की बदरी केदार यात्रा भी इन दिनों चलती है। इन यात्रियों की उपस्थिति का पूरा लाभ हरिद्वार के व्यवसाय जगत को मिलता आया है। साथ ही दीपावली के बाजार जोरदार रौनक और धन बाजार को देते हैं। इन दिनों पर्व को लेकर भारी उत्साह है। ज्वालापुर से लेकर भूपतवाला तक सभी बाजार जोर दार तैयारियों में जुटे हुए है।
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