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तुंगनाथ में जीर्णशीर्ण हालत में पहुंची पौराणिक जलकुंडी
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:51 PM IST
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गोपेश्वर। तृतीय केदार तुंगनाथ में पौराणिक जलकुंडी जीर्णशीर्ण स्थिति में है। यहां छोटे-छोटे मंदिर भी संरक्षण के अभाव में टूटने की कगार पर हैं। तृतीय केदार तुंगनाथ समुद्र तल से 12073 फीट की ऊंचाई पर है। ग्रीष्मकाल में छह माह तक यहां तीर्थयात्रियों और सैलानियों की आवाजाही रहती है। इस मंदिर का संचालन श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति करती है, लेकिन यहां कई छोटे-छोटे मंदिर और जल कुंडियां हैं, जो संरक्षण के अभाव में जीर्णशीर्ण हो रही हैं।
बाल भवन के निदेशक विनोद रावत, चंद्रशेखर भट्ट और बलवंत सिंह राणा का कहना है कि प्राचीन मठ-मंदिरों के संरक्षण के लिए सरकार और मंदिर समिति को विशेष कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। पर्यटन विभाग राज्य के नए तीर्थस्थलों को पहचान दिलाने की बात कर रहा है, लेकिन पूर्व से ही ख्याति प्राप्त तीर्थस्थलों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इधर, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि जल्द ही तुंगनाथ मंदिर के मठ-मंदिरों और जलकुंडी का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
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बाल भवन के निदेशक विनोद रावत, चंद्रशेखर भट्ट और बलवंत सिंह राणा का कहना है कि प्राचीन मठ-मंदिरों के संरक्षण के लिए सरकार और मंदिर समिति को विशेष कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। पर्यटन विभाग राज्य के नए तीर्थस्थलों को पहचान दिलाने की बात कर रहा है, लेकिन पूर्व से ही ख्याति प्राप्त तीर्थस्थलों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इधर, बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि जल्द ही तुंगनाथ मंदिर के मठ-मंदिरों और जलकुंडी का जीर्णोद्धार किया जाएगा।
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