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प्राकृतिक जल स्रोत बचाने को अनशनकारियों के स्वाथ्य में आई गिरावट
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:39 PM IST
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श्रीनगर। मालूपानी के प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। चिकित्सकों ने अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी है, लेकिन अनशनकारियों ने मांगे पूरी नहीं होने तक अनशन जारी रखने की बात कही है।
सोमवार को प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए विकासखंड कीर्तिनगर के मालूपाणी में ग्रामीणों का अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। अनशनकारियों के स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंचे डा. विनय शर्मा ने बताया कि अनशनकारियों के वजन में करीब एक किलो की गिरावट आई है। जबकि अनशनकारी दिनेश प्रसाद लखेड़ा के शरीर से कीटोन प्लस वन निकलने शुरू हो चुके है। साथ ही अनशन पर बैठे प्रताप सिंह मियां के शरीर से भी प्लस व माइनस में कीटोन आने लगे है। चिकित्सक ने अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी है। वही अनशनकारियों ने मांग पूरी नहीं होने तक अनशन जारी रखने की बात कही । जल संस्थान यहां एक पेयजल योजना का पुनर्गठन कर रहा है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पानी ले जाया गया तो गांव वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कहा कि गंगोत्री व यमनोत्री जाने वाले तीर्थ यात्रियों के साथ ही इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए इस प्राकृतिक जल स्रोत का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि यात्री यहां पर भोजन बनाने के साथ ही गर्मी से निजात पाने के लिए स्नान भी करते है। जबकि इस स्रोत पर कुछ लोगों की कृषि भूमि भी निर्भर है। बताते है कि मार्ग के करीब 50 किमी के दायरे में कोई दूसरा प्राकृतिक जल स्रोत नहीं है। इस मौके पर पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। वहीं संस्थान का कहना है कि ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास होने के बाद ही काम शुरू करने की तैयारी की गई थी।
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सोमवार को प्राकृतिक जल स्रोत को बचाने के लिए विकासखंड कीर्तिनगर के मालूपाणी में ग्रामीणों का अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। अनशनकारियों के स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुंचे डा. विनय शर्मा ने बताया कि अनशनकारियों के वजन में करीब एक किलो की गिरावट आई है। जबकि अनशनकारी दिनेश प्रसाद लखेड़ा के शरीर से कीटोन प्लस वन निकलने शुरू हो चुके है। साथ ही अनशन पर बैठे प्रताप सिंह मियां के शरीर से भी प्लस व माइनस में कीटोन आने लगे है। चिकित्सक ने अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी है। वही अनशनकारियों ने मांग पूरी नहीं होने तक अनशन जारी रखने की बात कही । जल संस्थान यहां एक पेयजल योजना का पुनर्गठन कर रहा है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पानी ले जाया गया तो गांव वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। कहा कि गंगोत्री व यमनोत्री जाने वाले तीर्थ यात्रियों के साथ ही इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए इस प्राकृतिक जल स्रोत का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि यात्री यहां पर भोजन बनाने के साथ ही गर्मी से निजात पाने के लिए स्नान भी करते है। जबकि इस स्रोत पर कुछ लोगों की कृषि भूमि भी निर्भर है। बताते है कि मार्ग के करीब 50 किमी के दायरे में कोई दूसरा प्राकृतिक जल स्रोत नहीं है। इस मौके पर पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। वहीं संस्थान का कहना है कि ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास होने के बाद ही काम शुरू करने की तैयारी की गई थी।
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