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विश्वविद्यालय की ओर से गठित समिति कर्मचारियों को नहीं स्वीकार
Updated Fri, 06 Oct 2017 10:51 PM IST
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श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के कर्मचारियों की मांग पर कुलपति ने वित्त अधिकारी के मामले में जांच कमेटी गठित की, लेकिन कमेटी गठन संबंधी पत्र पर कर्मचारियों ने आदेश की भाषा पर आपत्ति जताई है। इस संबंध में दोनों शिकायतकर्ताओं ने कुलसचिव को ज्ञापन सौंपकर नियमानुसार वित्तीय अनियमितता की जांच कराने की मांग की है।
गढ़वाल विवि के कर्मचारियों ने वित्त अधिकारी के दिल्ली विवि से सेवानिवृत्ति के बाद वेतन व पेंशन लेने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों के आंदोलन के बाद 5 अक्तूबर को कुलपति प्रो. जेएल कौल के आदेश पर प्रभारी रजिस्ट्रार ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। मामले में सोसाइटी रिवोल्यूशन अगेंस्ट करप्शन के महासचिव संतोष ममगांई और विवि के सिस्टम मैनेजर संजीव श्रीवास्तव ने लिखित शिकायती पत्र दिए थे। शुक्रवार को उन्होंने प्रभारी कुलसचिव को पुन: पत्र देते हुए आदेश पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदेश का आशय स्पष्ट नहीं है। आदेश की शैली से ऐसा प्रतीत होता है कि यह जांच समिति न होकर वेतन निर्धारण समिति है। वित्त अधिकारी के पेंशन व वेतन आहरण प्रकरण जांच का आदेश न देकर शिकायतकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मामला वेतन निर्धारण समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। समिति को निरस्त कर मानव संसाधन विकास के केंद्रीय सतर्कता अधिकारी या केंद्रीय सतर्कता आयोग से इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
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गढ़वाल विवि के कर्मचारियों ने वित्त अधिकारी के दिल्ली विवि से सेवानिवृत्ति के बाद वेतन व पेंशन लेने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों के आंदोलन के बाद 5 अक्तूबर को कुलपति प्रो. जेएल कौल के आदेश पर प्रभारी रजिस्ट्रार ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। मामले में सोसाइटी रिवोल्यूशन अगेंस्ट करप्शन के महासचिव संतोष ममगांई और विवि के सिस्टम मैनेजर संजीव श्रीवास्तव ने लिखित शिकायती पत्र दिए थे। शुक्रवार को उन्होंने प्रभारी कुलसचिव को पुन: पत्र देते हुए आदेश पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आदेश का आशय स्पष्ट नहीं है। आदेश की शैली से ऐसा प्रतीत होता है कि यह जांच समिति न होकर वेतन निर्धारण समिति है। वित्त अधिकारी के पेंशन व वेतन आहरण प्रकरण जांच का आदेश न देकर शिकायतकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मामला वेतन निर्धारण समिति के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। समिति को निरस्त कर मानव संसाधन विकास के केंद्रीय सतर्कता अधिकारी या केंद्रीय सतर्कता आयोग से इस प्रकरण की जांच कराई जाएगी।
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