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हिंदी पखवाड़ा स्पर्धा में छात्र-छात्राओं ने दिखाई प्रतिभाग
Updated Fri, 06 Oct 2017 10:51 PM IST
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देवप्रयाग। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में आयोजित हिंदी पखवाड़ा में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
शुक्रवार को विजेता प्रतिभागियों को कार्यक्रम के समापन पुरस्कार किया गया। स्वरचना में रोहित कोठारी (शास्त्री प्रथम) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि आचार्य प्रथम के पंकज ने दूसरा और बालकृष्ण सेमवाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। चतुर्थ पुरस्कार प्राची नौटियाल (शास्त्री द्वितीय) को मिला। वाद-विवाद में पहला पुरस्कार पंकज को मिला। प्राची नौटियाल को दूसरा, शोभित नौटियाल को तीसरा रोहित कोठारी को चौथा स्थान मिला। शुद्ध लेखन में संदीप कोठारी ने प्रथम, श्यामदेव ने द्वितीय, नकुल ने तृतीय और पंकज ने चतुर्थ प्राप्त किया। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश चमोला ने कहा कि हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि भारतीयता की पहचान है। यह हमारी संस्कृति, भावनाओं और इतिहास की परिचायक है। संस्थान के प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बरायुडु ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति गहरा अनुराग है। कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रथम वर्ष के पंकज ने किया। इस अवसर पर न्याय विभागाध्यक्ष डा.आर. बालमुरुगन, प्रो. बनमाली बिश्वाल , डा. वीरेंद्र बर्त्वाल, डा. शैलेंद्र उनियाल, डा. अरविंद गौड़, डा. मुकेश शर्मा, डा. सुरेश शर्मा व पंकज कोटियाल आदि मौजूद थे।
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शुक्रवार को विजेता प्रतिभागियों को कार्यक्रम के समापन पुरस्कार किया गया। स्वरचना में रोहित कोठारी (शास्त्री प्रथम) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जबकि आचार्य प्रथम के पंकज ने दूसरा और बालकृष्ण सेमवाल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। चतुर्थ पुरस्कार प्राची नौटियाल (शास्त्री द्वितीय) को मिला। वाद-विवाद में पहला पुरस्कार पंकज को मिला। प्राची नौटियाल को दूसरा, शोभित नौटियाल को तीसरा रोहित कोठारी को चौथा स्थान मिला। शुद्ध लेखन में संदीप कोठारी ने प्रथम, श्यामदेव ने द्वितीय, नकुल ने तृतीय और पंकज ने चतुर्थ प्राप्त किया। इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के हिंदी एवं भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश चमोला ने कहा कि हिंदी न केवल एक भाषा है, बल्कि भारतीयता की पहचान है। यह हमारी संस्कृति, भावनाओं और इतिहास की परिचायक है। संस्थान के प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बरायुडु ने कहा कि संस्थान के विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति गहरा अनुराग है। कार्यक्रम का संचालन आचार्य प्रथम वर्ष के पंकज ने किया। इस अवसर पर न्याय विभागाध्यक्ष डा.आर. बालमुरुगन, प्रो. बनमाली बिश्वाल , डा. वीरेंद्र बर्त्वाल, डा. शैलेंद्र उनियाल, डा. अरविंद गौड़, डा. मुकेश शर्मा, डा. सुरेश शर्मा व पंकज कोटियाल आदि मौजूद थे।