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गढ़वाली कथा संग्रह उदरोल पुस्तक का किया विमोचन
Updated Sun, 24 Sep 2017 10:35 PM IST
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श्रीनगर। अजीम प्रेम जी फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों एवं साहित्यकारों ने संदीप रावत की गढ़वाली कथा संग्रह उदरोल पुस्तक का विमोचन किया।
रविवार को पुस्तक विमोचन के दौरान पुस्तक के लेखक का परिचय देते हुए कलश संस्था के ओम प्रकाश सेमवाल ने कहा कि लेखक संदीप रावत ने गढ़वाली भाषा में लिखित अपनी कविताओं, गीतों व नाटकों के माध्यम से नई पीढ़ी को भाषा से जोड़कर रखने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि अब तक रावत के गढ़वाली भाषा में कई लेख प्रकाशित हो चुके है। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डा. विष्णुदत्त कुकरेती ने उदरोल कथा संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा कि कथाकार ने पुस्तक में पहाड़ के ग्रामीण समाज का यथार्थ चित्रण करते हुए विभिन्न घटनाओं एवं चरित्रों को उजागर किया है। लेखक संदीप रावत ने कहा कि लेखन की प्रेरणा उन्हें अपने ही ग्रामीण परिवेश व समाज से मिली है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के बाद शिक्षण में कहानियों की भूमिका पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता सुभाष रावत ने कहा कि कथाओं की शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस मौके पर डा. प्रीतम अपच्छयाण, उमा घिल्डियाल, जगमोहन कठैत आदि ने विचार रखे। ब्यूरो
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रविवार को पुस्तक विमोचन के दौरान पुस्तक के लेखक का परिचय देते हुए कलश संस्था के ओम प्रकाश सेमवाल ने कहा कि लेखक संदीप रावत ने गढ़वाली भाषा में लिखित अपनी कविताओं, गीतों व नाटकों के माध्यम से नई पीढ़ी को भाषा से जोड़कर रखने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि अब तक रावत के गढ़वाली भाषा में कई लेख प्रकाशित हो चुके है। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डा. विष्णुदत्त कुकरेती ने उदरोल कथा संग्रह की समीक्षा करते हुए कहा कि कथाकार ने पुस्तक में पहाड़ के ग्रामीण समाज का यथार्थ चित्रण करते हुए विभिन्न घटनाओं एवं चरित्रों को उजागर किया है। लेखक संदीप रावत ने कहा कि लेखन की प्रेरणा उन्हें अपने ही ग्रामीण परिवेश व समाज से मिली है। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के बाद शिक्षण में कहानियों की भूमिका पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें मुख्य वक्ता सुभाष रावत ने कहा कि कथाओं की शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस मौके पर डा. प्रीतम अपच्छयाण, उमा घिल्डियाल, जगमोहन कठैत आदि ने विचार रखे। ब्यूरो
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