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नदियों को बचाना बड़ी चुनौती: सरदाना
Updated Fri, 22 Sep 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रुड़की (कोर) में आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण और नदियों को बचाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान नदियों कों बचाने की शपथ भी ली गई।
मुख्य वक्ता ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधि मोहित सरदाना ने नदियों की सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय नैतिकता पर भी प्रकाश डाला । कहा कि नदियां ही जीवन हैं। नदियों से जल है और जल से जीवन है। आज नदिया सूख रही हैं इसलिए हम सबको नदियों के संरक्षण के लिए आगे आना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि देश के किसान की चिंता का एक मुख्य कारण पानी भी है। पानी से किसान की आत्मा जुड़ी होती है और जब उसे पानी नहीं मिलता और उसकी फसल सूखती है तो उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है । अब समय आ गया है कि हम पानी बचाने, देश बचाने और किसानों को बचाने के लिए पेड़ लगाने पड़ेंगे।
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कार्यक्रम क शुभारंभ कोर के महानिदेशक मेजर जनरल एके चतुर्वेदी (अवकाश प्राप्त) ने कहा कि विश्व की सभी सभ्यताएं नदियों के किनारे विकसित हुई हैं, नदियां हमारी धरोहर है। उन्होंने चिंता जताई कि आज देश की बहुत सी नदियां सूख गई हैं या सूखने के कगार पर हैं। जिन नदियों में पानी बह रहा है उन पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन नदियों को बचाना हमारे सामने बड़ी चुनौती है।
सेमिनार के समन्वयक मैकेनिकल विभाग के प्रोफेसर डा. रोमेश शर्मा ने बताया कि नदियां हमारे जीवन के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। नदियों से पानी मिलता है और पानी से विभिन्न प्रकार के रोजगार संभव हैं। इस अवसर पर नवनीत जैन, कोर स्कूल ऑफ़ नमैनेजमेंट के निदेशक मेजर जनरल ओपी सोनी, डीन डा. वीके सिंह, डीन डा. वीके मेहता, डीन डा. अखिलेंद्र यादव आदि मौजूद रहे ।
हरिद्वार।
कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रुड़की (कोर) में आयोजित कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण और नदियों को बचाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान नदियों कों बचाने की शपथ भी ली गई।
मुख्य वक्ता ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधि मोहित सरदाना ने नदियों की सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय नैतिकता पर भी प्रकाश डाला । कहा कि नदियां ही जीवन हैं। नदियों से जल है और जल से जीवन है। आज नदिया सूख रही हैं इसलिए हम सबको नदियों के संरक्षण के लिए आगे आना पड़ेगा।
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उन्होंने कहा कि देश के किसान की चिंता का एक मुख्य कारण पानी भी है। पानी से किसान की आत्मा जुड़ी होती है और जब उसे पानी नहीं मिलता और उसकी फसल सूखती है तो उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ता है । अब समय आ गया है कि हम पानी बचाने, देश बचाने और किसानों को बचाने के लिए पेड़ लगाने पड़ेंगे।
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कार्यक्रम क शुभारंभ कोर के महानिदेशक मेजर जनरल एके चतुर्वेदी (अवकाश प्राप्त) ने कहा कि विश्व की सभी सभ्यताएं नदियों के किनारे विकसित हुई हैं, नदियां हमारी धरोहर है। उन्होंने चिंता जताई कि आज देश की बहुत सी नदियां सूख गई हैं या सूखने के कगार पर हैं। जिन नदियों में पानी बह रहा है उन पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन नदियों को बचाना हमारे सामने बड़ी चुनौती है।
सेमिनार के समन्वयक मैकेनिकल विभाग के प्रोफेसर डा. रोमेश शर्मा ने बताया कि नदियां हमारे जीवन के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं। नदियों से पानी मिलता है और पानी से विभिन्न प्रकार के रोजगार संभव हैं। इस अवसर पर नवनीत जैन, कोर स्कूल ऑफ़ नमैनेजमेंट के निदेशक मेजर जनरल ओपी सोनी, डीन डा. वीके सिंह, डीन डा. वीके मेहता, डीन डा. अखिलेंद्र यादव आदि मौजूद रहे ।