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सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया पेयजल योजनाओं पर काम
Updated Fri, 22 Sep 2017 10:03 PM IST
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कर्णप्रयाग। आदिबदरी तहसील में चार से अधिक गांवों की तीन हजार की आबादी के लिए स्वीकृत पेयजल योजनाओं का काम सर्वे से आगे नहीं बढ़ पाया। पेयजल योजनाएं नहीं बनने से ग्रामीण प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि एक योजना में महज एक लाख और दूसरी योजना में पैसा ही नहीं मिला, जिसके चलते योजनाओं पर काम शुरू नहीं हो पाया।
आदिबदरी तहसील के दूरस्थ गांव पिंडवाली की करीब दो हजार आबादी है। यहां दशकों पुरानी ब्लाक की एकल पेयजल योजना जर्जर है, जिससे गांव में पानी की पूर्ति नहीं हो रही। लिहाजा ग्रामीण दो से तीन किमी दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी भरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2014-15 में यहां पेयजल योजना की स्वीकृति मिली, जिस पर पेयजल निगम ने गांव में सर्वे कर पेयजल समिति का गठन किया, लेकिन इसके बाद से योजना पर काम नहीं शुरू हुआ। यही हाल पयां, पैम्था और पावा गांवों का भी है। यहां बहुल ग्राम पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति की जाती है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कलम कोहली का कहना है कि योजना में पयां, पैम्था और पावा गांव अंतिम हैं, लिहाजा यहां तक पानी ही नहीं पहुंचता। यहां वर्ष 2014-15 में नई पेयजल योजना स्वीकृत हुई, लेकिन सर्वे के बाद कार्रवाई थम गई। ऐसे में तीनों गांवों की करीब एक हजार से अधिक आबादी पेयजल को तरस रही है। दूसरी ओर जल निगम के अधिशासी अभियंता आरसी मिश्रा ने बताया कि पयां, पैम्था और पावा गांव के लिए जिला योजना में स्वीकृति मिली है और एक लाख रुपये रिलीज किए गए हैं, जिसमें नई लाइन का निर्माण संभव नहीं है। वहीं पिंडवाली के लिए पेयजल योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन योजना पर वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। योजनाओं पर वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्रवाई हो पाएगी।
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आदिबदरी तहसील के दूरस्थ गांव पिंडवाली की करीब दो हजार आबादी है। यहां दशकों पुरानी ब्लाक की एकल पेयजल योजना जर्जर है, जिससे गांव में पानी की पूर्ति नहीं हो रही। लिहाजा ग्रामीण दो से तीन किमी दूर प्राकृतिक स्रोत से पानी भरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2014-15 में यहां पेयजल योजना की स्वीकृति मिली, जिस पर पेयजल निगम ने गांव में सर्वे कर पेयजल समिति का गठन किया, लेकिन इसके बाद से योजना पर काम नहीं शुरू हुआ। यही हाल पयां, पैम्था और पावा गांवों का भी है। यहां बहुल ग्राम पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति की जाती है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कलम कोहली का कहना है कि योजना में पयां, पैम्था और पावा गांव अंतिम हैं, लिहाजा यहां तक पानी ही नहीं पहुंचता। यहां वर्ष 2014-15 में नई पेयजल योजना स्वीकृत हुई, लेकिन सर्वे के बाद कार्रवाई थम गई। ऐसे में तीनों गांवों की करीब एक हजार से अधिक आबादी पेयजल को तरस रही है। दूसरी ओर जल निगम के अधिशासी अभियंता आरसी मिश्रा ने बताया कि पयां, पैम्था और पावा गांव के लिए जिला योजना में स्वीकृति मिली है और एक लाख रुपये रिलीज किए गए हैं, जिसमें नई लाइन का निर्माण संभव नहीं है। वहीं पिंडवाली के लिए पेयजल योजना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया, लेकिन योजना पर वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पाई है। योजनाओं पर वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्रवाई हो पाएगी।
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