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शहर का रुप ले चुके श्रीकोट का हो सकेगा विकास
Updated Thu, 07 Sep 2017 09:59 PM IST
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श्रीनगर। विकास खंड खिर्सू की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत श्रीकोट गंगानाली को नगर पालिका श्रीनगर में शामिल करने का प्रस्ताव भले ही कैबिनेट में अब पास हुआ हो, लेकिन श्रीकोट को नगर का दर्जा देने की मांग एक दशक पुरानी है।
वर्तमान में यह ग्राम पंचायत पूरे नगर का रूप ले चुकी है। यहां की जनसंख्या 20 हजार पार कर चुकी है। श्रीकोट में राजकीय मेडिकल कॉलेज, एक दर्जन स्कूल, एक दर्जन होटल सहित 100 के लगभग व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं, जबकि लगभग 3 हजार आवासीय भवन हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या सफाई व्यवस्था है।
श्रीनगर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत श्रीकोट भी श्रीनगर के समान विकसित हो चुकी है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर बसे इस गांव में कई सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान हैं। वर्ष 1984 में यहां बेस अस्पताल की नींव पड़ी, जबकि वर्ष 2008 में इसे मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला। इसके अलावा, यहां निजी अस्पताल भी हैं।
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श्रीनगर एजूकेशन हब होने की वजह से श्रीकोट में चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले से आए लोग बस चुके हैं, जहां 20 साल पहले श्रीकोट गंगानाली में बड़े पैमाने पर खेती होती थी, अब यहां आलीशान भवन खड़े हैं।
श्रीकोट ने धीरे-धीरे नगर का रूप तो ले लिया, लेकिन ग्राम पंचायत होने की वजह से यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। वर्तमान में कूड़ा निस्तारण विकराल समस्या बन चुका है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला कहते हैं कि लोग गदेरों या बदरीनाथ हाईवे के किनारे कूड़ा फेंक देते हैं। गलियों में गंदगी की समस्या है। नगर पालिका में सम्मिलित होने से श्रीकोट में सफाई और स्ट्रीट लाइट का प्रबंध हो जाएगा। इसके अलावा प्रमाण पत्रों के लिए 30 किलोमीटर दूर खिर्सू नहीं जाना पड़ेगा। श्रीनगर में सारे काम हो जाएंगे।
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वर्तमान में यह ग्राम पंचायत पूरे नगर का रूप ले चुकी है। यहां की जनसंख्या 20 हजार पार कर चुकी है। श्रीकोट में राजकीय मेडिकल कॉलेज, एक दर्जन स्कूल, एक दर्जन होटल सहित 100 के लगभग व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं, जबकि लगभग 3 हजार आवासीय भवन हैं। यहां की सबसे बड़ी समस्या सफाई व्यवस्था है।
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श्रीनगर शहर से लगभग 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत श्रीकोट भी श्रीनगर के समान विकसित हो चुकी है। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर बसे इस गांव में कई सरकारी और गैर सरकारी प्रतिष्ठान हैं। वर्ष 1984 में यहां बेस अस्पताल की नींव पड़ी, जबकि वर्ष 2008 में इसे मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिला। इसके अलावा, यहां निजी अस्पताल भी हैं।
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श्रीनगर एजूकेशन हब होने की वजह से श्रीकोट में चमोली, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले से आए लोग बस चुके हैं, जहां 20 साल पहले श्रीकोट गंगानाली में बड़े पैमाने पर खेती होती थी, अब यहां आलीशान भवन खड़े हैं।
श्रीकोट ने धीरे-धीरे नगर का रूप तो ले लिया, लेकिन ग्राम पंचायत होने की वजह से यहां आवश्यक सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। वर्तमान में कूड़ा निस्तारण विकराल समस्या बन चुका है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला कहते हैं कि लोग गदेरों या बदरीनाथ हाईवे के किनारे कूड़ा फेंक देते हैं। गलियों में गंदगी की समस्या है। नगर पालिका में सम्मिलित होने से श्रीकोट में सफाई और स्ट्रीट लाइट का प्रबंध हो जाएगा। इसके अलावा प्रमाण पत्रों के लिए 30 किलोमीटर दूर खिर्सू नहीं जाना पड़ेगा। श्रीनगर में सारे काम हो जाएंगे।