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..पानी में ही बह गए तीस लाख
Updated Sun, 03 Sep 2017 10:27 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। सिंचाई विभाग ने इस वर्ष भी तीस लाख रुपये खर्च कर कांगड़ी गांव में तटबंध बनाए थे, लेकिन वे पानी में बह गए। इसका कारण वायरक्रेट गुणवत्ता सही नहीं होना बताया जा रहा है। वर्ष 2013 में आई आपदा से श्यामपुर कांगड़ी गांव के पास काफी भूकटाव हो गया था, तब से हर साल गंगा का पानी गांव की जमीन को लील रहा है। गंगा से सटे होने के कारण कांगड़ी गांव बाढ़ के मामले में क्षेत्र का सबसे संवेदनशील माना जाता है।
पिछले वर्ष सिंचाई विभाग की ओर से कांगड़ी गांव को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध बनाए थे, लेकिन वे बरसात के पानी को नहीं झेल सके। गांव के पास पिछले साल भी तीस लाख की लागत से वायरक्रेट तेज बहाव में बह गए। गांव को खतरा देखते हुए ग्रामीण सुंदर चौधरी, निरंजन सिंह ,गुड्डू, अशोक कुमार, मामचंद, फकीरचंद, दिवाकर, ओमप्रकाश और सुनील पाल आदि ने विधायक स्वामी यतीश्वरानंद से क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत और नए तटबंध बनाने की गुहार लगाई थी। विधायक ने सिंचाई विभाग को बरसात से पहले कांगडी गांव में क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत वह नए तटबंध बनाने के लिए प्रस्ताव भेजे थे। बावजूद इसके सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उसका संज्ञान नहीं लिया। इस वर्ष पहाड़ों मे तेज बरसात से ज्यादा पानी आने पर लाखों के तटबंध पानी में बह गए हैं । जिससे गांव को खतरा पैदा हो गया है।
विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का कहना है कि गांव को बचाने के लिए सरकार के द्वारा तटबंध पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। सिंचाई विभाग को अवगत कराने के बाद भी समय रहते हुए क्षतिग्रस्त तटबंध सही करने और रोकथाम के लिए कोई कारगर उपाय नहीं करने से तटबंध बह गए हैं। ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने एवं तटबंध निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गड्ढों में तब्दील हुआ हाईवे
श्यामपुर। चंडीघाट से चिड़ियापुर यूपी के बॉर्डर तक हरिद्वार- नजीबाबाद राजमार्ग जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गया है। ऐसे में हर रोज यहां सड़क दुर्घटना होती रहती है। हरिद्वार- नजीबाबाद मार्ग पर चंडीघाट पुल से कांगडी , गाजीवाली, श्यामपुर ,सजनपुरपीली, गैंडी खाता, चिड़ियापुर चेकपोस्ट तक बारिश के कारण गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिसमें बरसाती पानल्ी गड्ढों में भरा होने से वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं हो पाता है और ऐसे में आए दिन सड़क दुर्घटना होती रहती है।
गंगा में कटाव से कुंडी गांव को खतरा
पथरी। पुरानी कुंडी के सामने गंगा में पानी बढ़ने पर काफी भूमि गंगा में समा चुकी है। ग्रामीण अधिकारियों से लंबे समय से यहां तटबंध निर्माण की मांग करते चले आ रहे है। इसके बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से तटबंध का निर्माण कराने की मांग की है। ग्राम प्रधान सविता देवी का कहना है कि कटाव से खेती की भूमि कम होती जा रही है। सैकड़ों बीघा भूमि गंगा में समा चुकी है, जिससे कई परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गए है। उप प्रधान सुखदेवपाल और ग्राम पंचायत सदस्य यशपाल सिंह का कहना है कि कटाव के चलते गंगा का रुख गांव की ओर हो गया है। धीरे-धीरे गंगा गांव के नजदीक होती जा रही है। योगेश, गीतूराम, रविंद्र ब्रजपाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से तटबंध के निर्माण की मांग की जा चुकी है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सड़क नहीं बनने से ग्रामीण परेशान
श्यामपुर। दूधला दयालवाला गांव में पक्की सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को तीन फीट पानी से होक र स्कूल जाना पड़ता है। दुधला दयालवाला गांव की सीता देवी के घर से दादूराम की कुटिया तक डेढ़ किलोमीटर की सड़क के समीप 150 परिवार बसे हैं। यहां राजकीय प्राथमिक विद्यालय है। जहां पढ़ने के लिए बच्चों को बरसात के समय भारी परेशानी होती है। रसियाबड रेंज के जंगल का पानी भी इस सड़क पर आ जाता है। ग्रामीण बाग सिंह पवार ,प्रमोद, दीप सिंह, बलदेव सिंह,अर्जुन सिंह ,भरत सिंह, कुलदीप सिंह, श्रवण सिंह ,पदम सिंह ,हरपाल सिंह का कहना है कि वर्षों से इस सड़क को बनाने की मांग उठाते आ रहे हैं लेकिन कोई भी सुध नहीं ले रहा है। जंगल के पानी निकालने के लिए भी कोई पुलिया नहीं बनाई गई है।
फोटो समाचार
श्यामपुर।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है। सिंचाई विभाग ने इस वर्ष भी तीस लाख रुपये खर्च कर कांगड़ी गांव में तटबंध बनाए थे, लेकिन वे पानी में बह गए। इसका कारण वायरक्रेट गुणवत्ता सही नहीं होना बताया जा रहा है। वर्ष 2013 में आई आपदा से श्यामपुर कांगड़ी गांव के पास काफी भूकटाव हो गया था, तब से हर साल गंगा का पानी गांव की जमीन को लील रहा है। गंगा से सटे होने के कारण कांगड़ी गांव बाढ़ के मामले में क्षेत्र का सबसे संवेदनशील माना जाता है।
पिछले वर्ष सिंचाई विभाग की ओर से कांगड़ी गांव को बाढ़ से बचाने के लिए तटबंध बनाए थे, लेकिन वे बरसात के पानी को नहीं झेल सके। गांव के पास पिछले साल भी तीस लाख की लागत से वायरक्रेट तेज बहाव में बह गए। गांव को खतरा देखते हुए ग्रामीण सुंदर चौधरी, निरंजन सिंह ,गुड्डू, अशोक कुमार, मामचंद, फकीरचंद, दिवाकर, ओमप्रकाश और सुनील पाल आदि ने विधायक स्वामी यतीश्वरानंद से क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत और नए तटबंध बनाने की गुहार लगाई थी। विधायक ने सिंचाई विभाग को बरसात से पहले कांगडी गांव में क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत वह नए तटबंध बनाने के लिए प्रस्ताव भेजे थे। बावजूद इसके सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उसका संज्ञान नहीं लिया। इस वर्ष पहाड़ों मे तेज बरसात से ज्यादा पानी आने पर लाखों के तटबंध पानी में बह गए हैं । जिससे गांव को खतरा पैदा हो गया है।
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विधायक स्वामी यतीश्वरानंद का कहना है कि गांव को बचाने के लिए सरकार के द्वारा तटबंध पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे। सिंचाई विभाग को अवगत कराने के बाद भी समय रहते हुए क्षतिग्रस्त तटबंध सही करने और रोकथाम के लिए कोई कारगर उपाय नहीं करने से तटबंध बह गए हैं। ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने एवं तटबंध निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गड्ढों में तब्दील हुआ हाईवे
श्यामपुर। चंडीघाट से चिड़ियापुर यूपी के बॉर्डर तक हरिद्वार- नजीबाबाद राजमार्ग जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गया है। ऐसे में हर रोज यहां सड़क दुर्घटना होती रहती है। हरिद्वार- नजीबाबाद मार्ग पर चंडीघाट पुल से कांगडी , गाजीवाली, श्यामपुर ,सजनपुरपीली, गैंडी खाता, चिड़ियापुर चेकपोस्ट तक बारिश के कारण गहरे गड्ढे हो गए हैं। जिसमें बरसाती पानल्ी गड्ढों में भरा होने से वाहन चालकों को गड्ढों का अंदाजा नहीं हो पाता है और ऐसे में आए दिन सड़क दुर्घटना होती रहती है।
गंगा में कटाव से कुंडी गांव को खतरा
पथरी। पुरानी कुंडी के सामने गंगा में पानी बढ़ने पर काफी भूमि गंगा में समा चुकी है। ग्रामीण अधिकारियों से लंबे समय से यहां तटबंध निर्माण की मांग करते चले आ रहे है। इसके बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से तटबंध का निर्माण कराने की मांग की है। ग्राम प्रधान सविता देवी का कहना है कि कटाव से खेती की भूमि कम होती जा रही है। सैकड़ों बीघा भूमि गंगा में समा चुकी है, जिससे कई परिवार भूखमरी के कगार पर पहुंच गए है। उप प्रधान सुखदेवपाल और ग्राम पंचायत सदस्य यशपाल सिंह का कहना है कि कटाव के चलते गंगा का रुख गांव की ओर हो गया है। धीरे-धीरे गंगा गांव के नजदीक होती जा रही है। योगेश, गीतूराम, रविंद्र ब्रजपाल आदि ग्रामीणों का कहना है कि कई बार अधिकारियों से तटबंध के निर्माण की मांग की जा चुकी है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
सड़क नहीं बनने से ग्रामीण परेशान
श्यामपुर। दूधला दयालवाला गांव में पक्की सड़क का निर्माण नहीं होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को तीन फीट पानी से होक र स्कूल जाना पड़ता है। दुधला दयालवाला गांव की सीता देवी के घर से दादूराम की कुटिया तक डेढ़ किलोमीटर की सड़क के समीप 150 परिवार बसे हैं। यहां राजकीय प्राथमिक विद्यालय है। जहां पढ़ने के लिए बच्चों को बरसात के समय भारी परेशानी होती है। रसियाबड रेंज के जंगल का पानी भी इस सड़क पर आ जाता है। ग्रामीण बाग सिंह पवार ,प्रमोद, दीप सिंह, बलदेव सिंह,अर्जुन सिंह ,भरत सिंह, कुलदीप सिंह, श्रवण सिंह ,पदम सिंह ,हरपाल सिंह का कहना है कि वर्षों से इस सड़क को बनाने की मांग उठाते आ रहे हैं लेकिन कोई भी सुध नहीं ले रहा है। जंगल के पानी निकालने के लिए भी कोई पुलिया नहीं बनाई गई है।
फोटो समाचार