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अकरी-बारजूला पंपिंग योजना को मिली वन भूमि की स्वीकृति
Updated Sat, 02 Sep 2017 10:04 PM IST
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श्रीनगर। विकास खंड कीर्तिनगर के 105 बस्तियों को पेयजल संकट से निजात मिल पाएगी। इन बस्तियों के लिए करीब 47 करोड़ की लागत से बनाई जाने वाली ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना को वन भूमि की स्वीकृति मिल चुकी है। अगर बजट की कमी आड़े नही आई तो 2018 तक योजना का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा।
कीर्तिनगर की कड़ाकोट, अकरी-बारजूला व डागर पट्टी के 105 बस्तियों के लोग वर्षोँ से पेयजल समस्या से जूझ रहे है। शासन की ओर से सितंबर 2015 में क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए करीब 47 करोड़ की लागत से राज्य सेक्टर में योजना स्वीकृत की गई। पेयजल निगम देवप्रयाग की ओर से योजना के लिए पाइपों की खरीद सहित निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया गया था। योजना के करीब डेढ़ सौ किलोमीटर पाइप लाइन में से 15 किमी भाग वन भूमि से गुजरने व 55 टैंकों में से 3 टैंकों का निर्माण भी वन भूमि किया जा रहा था। विभाग की ओर से निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व वन विभाग की स्वीकृति नहीं ली गई थी, जिससे योजना का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा था। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता राकेश तिवाड़ी ने बताया कि योजना पर वन भूमि की विधिवत एनओसी मिल चुकी है। अब बाद योजना पर त्वरित गति से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। बताया कि योजना पर मुख्य कार्य इंटेक वैल का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। अगर बजट समय पर मिला तो वर्ष 2018 तक योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। तिवारी ने बताया कि अभी तक योजना पर 47 करोड़ में से करीब 23 करोड़ ही मिले है। बताया कि योजना 30 हजार 629 की जनसंख्या के लिए 2045 तक डिजायन की गई है।
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कीर्तिनगर की कड़ाकोट, अकरी-बारजूला व डागर पट्टी के 105 बस्तियों के लोग वर्षोँ से पेयजल समस्या से जूझ रहे है। शासन की ओर से सितंबर 2015 में क्षेत्र के लोगों की प्यास बुझाने के लिए करीब 47 करोड़ की लागत से राज्य सेक्टर में योजना स्वीकृत की गई। पेयजल निगम देवप्रयाग की ओर से योजना के लिए पाइपों की खरीद सहित निर्माण कार्य भी शुरू करवा दिया गया था। योजना के करीब डेढ़ सौ किलोमीटर पाइप लाइन में से 15 किमी भाग वन भूमि से गुजरने व 55 टैंकों में से 3 टैंकों का निर्माण भी वन भूमि किया जा रहा था। विभाग की ओर से निर्माण कार्य शुरू करने से पूर्व वन विभाग की स्वीकृति नहीं ली गई थी, जिससे योजना का निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा था। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता राकेश तिवाड़ी ने बताया कि योजना पर वन भूमि की विधिवत एनओसी मिल चुकी है। अब बाद योजना पर त्वरित गति से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। बताया कि योजना पर मुख्य कार्य इंटेक वैल का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। अगर बजट समय पर मिला तो वर्ष 2018 तक योजना से पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। तिवारी ने बताया कि अभी तक योजना पर 47 करोड़ में से करीब 23 करोड़ ही मिले है। बताया कि योजना 30 हजार 629 की जनसंख्या के लिए 2045 तक डिजायन की गई है।
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