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सरकारों को ढुलमुल रवैया है आंदोलन की वजह

Sun, 27 Aug 2017 12:40 AM IST
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:40 AM IST
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सरकारों को ढुलमुल रवैया है आंदोलन की वजह
संदीप थपलियाल
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श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के निर्माण के मसले पर अभी तक प्रदेश सरकारों का ढुलमुल रवैया रहा है। यही वजह है कि पहले स्थानीय जनता और अब छात्रों का स्थायी कैंपस के लिए आंदोलन चल रहा है।
आंदोलन के बीच यह चर्चा चल रही है कि भूमि न मिलने पर एनआईटी उत्तर प्रदेश या मैदानी क्षेत्रों में भी शिफ्ट हो सकती है। नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि गत जुलाई माह में केंद्र सरकार के तकनीकी शिक्षा सचिव ने सुमाड़ी में भूमि अनुपयुक्त पाए जाने और इसका विकल्प न ढूंढे जाने पर एनआईटी को देहरादून शिफ्ट करने के लिए उत्तराखंड शासन के मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। ऐसे में भी यह भी अफवाह उड़ रही है कि प्रदेश के कुछ कद्दावर नेता श्यामपुर (ऋषिकेश) में जमीन तलाश रहे हैं। वर्तमान में एनआईटी के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए शहर में लोगों का और कैंपस के अंदर छात्र-छात्राओं का आंदोलन चल रहे हैं। प्रगतिशील जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी का कहना है कि पूर्व में एनआईटी को ऋषिकेश ले जाने की कोशिश की गई थी, लेकिन जनता ने इस षड्यंत्र का भंडाफोड़ कर दिया था। एनआईटी को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं की गई है।
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वर्ष 2009 में स्वीकृत एनआईटी उत्तराखंड वर्तमान में श्रीनगर स्थित पॉलीटेक्नीक व आईटीआई की परिसंपत्तियों में संचालित हो रहा है। स्थायी कैंपस का सुमाड़ी में शिलान्यास वर्ष 2014 में हुआ, लेकिन सुमाड़ी में निर्माण लागत काफी ज्यादा आने और भूमि के निर्माण कार्य के अनुपयुक्त होने का हवाला देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दो बार पत्र भेजकर अन्य विकल्प देेने के लिए कह दिया, लेकिन प्रदेश की तत्कालीन सरकार की ओर से जमीन तलाश कर नहीं दी गई। बाद में सरकार बदल गई, लेकिन फिर भी स्थिति नहीं बदली।
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मूल्या गांव के सामने सीताकोटी में 43 हेक्टेअर नापभूमि और 78 हेक्टेअर सरकारी भूमि है। अभी इसका प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है। जिला प्रशासन स्तर पर कार्रवाई चल रही है।

मायादत्त जोशी, एसडीएम श्रीनगर

उम्मीद है कि 30 सितंबर तक जमीन संबंधी फैसला हो जाएगा। यदि जमीन का मामला हल हो गया, तो चार-पांच माह में काम शुरू करा दिया जाएगा। कर्नल सुखपाल सिंह, रजिस्ट्रार एनआईटी उत्तराखंड
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