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गुरिल्लाओं की उपेक्षा का परिणाम है सीमापार से घुसपैठ की सूचनाओं का अभाव
Updated Tue, 01 Aug 2017 10:38 PM IST
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श्रीनगर। एसएसबी केंद्रीयकृत प्रशिक्षण केंद्र के सम्मुख नौकरी पेंशन की मांग के लिए गुरिल्ला संगठन का धरना 28वें दिन भी जारी रहा। संगठन ने चीन की ओर से भारत की सीमा में की जा रही अतिक्रमणकारी गतिविधियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
मंगलवार को आयोजित धरनास्थल पर संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष ब्रह्मानंद डालाकोटी ने कहा कि चीन की ओर से भारत की सीमाओं में की जा रही घुसपैठ गंभीर चिंता का विषय है। इसका मुख्य कारण गुरिल्लाओं की उपेक्षा है। कहा कि भारत-चीन सीमाओं की चौकसी के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए वर्ष 1962 के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गुरिल्ला फोर्स के गठन पर जोर दिया था। सीमावर्ती इलाकों के लोगों को इसमें शामिल कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया था। यह लोग साधारण व्यक्ति की भांति अपने गांव व घरों में रहते थे तथा स्थानीय नागरिक होने के नाते चरवाहों, लकड़हारों व घसियारे बनकर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाकर चीनी सैनिकों की गतिविधियों पर नजर रखते थे। वर्ष 2002 में यह फोर्स समाप्त कर दी गई। परिणामस्वरूप सीमा पर घुसपैठ की गतिविधियां बढ़ने लगी हैं। इस मौके पर वृजमोहन गुसाईं, कुशल सिंह पंवार, संतलाल, प्रेम सिंह, कन्हैयालाल, प्रताप सिंह, मदन सिंह, रघुवीर लाल, कल्याण सिंह, भूपेंद्र आनंद, विरेंद्र विष्ट, राजकुमारी, संगीता, लक्ष्मी, सुलोचना, विमला व सरिता आदि मौजूद थे।
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