{"_id":"59416bfb4f1c1b73288b4814","slug":"149745973315-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरदा की पार्टी का काफल पहाड़ से गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरदा की पार्टी का काफल पहाड़ से गायब
Updated Wed, 14 Jun 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
हरदा की पार्टी का काफल पहाड़ से गायब
मनीष चंद्र भट्ट
पौड़ी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) की काफल पार्टी से चर्चा में आया औषधीय गुणों से भरपूर यह जंगली फल इस बार पहाड़ से गायब है। उद्यान विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव का नतीजा मान रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से भी इसके संरक्षण के कुछ खास प्रयास नहीं किए गए हैं।
गढ़वाल मंडल मुख्यालय की बात करें तो यहां पौड़ी और उसके आसपास अदवाणी, खिर्सू, टेका, प्रेमनगर व गडोलिया आदि के जंगलों में काफल प्रचुर मात्रा में होता था। आमतौर पर काफल मई तक पूरी तरह पक जाता है। मई-जून की छुट्टियों में गांव के बच्चे पौड़ी, श्रीनगर आदि शहर-कस्बों के बाजारों में काफल बेचते नजर आते थे। छुट्टियों में उनके लिए यह कुछ पैसे कमाने का जरिया भी होता था, लेकिन इस बार यहां के बाजारों में काफल नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, औषधीय गुणों वाले काफल फल पर भी ग्लोबल वार्मिंग का असर पड़ा है तो कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, काफल की सीड ब्रीडिंग एक साल छोड़कर अच्छी होती है, लेकिन इस बार काफल बिल्कुल खत्म होने से उद्यान विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। पौड़ी के पुराने उद्यान विशेषज्ञ जसपाल सिंह नेगी ने बताया कि मई अंत तक काफल पूरी तरह पक जाता था। इस बार जो थोड़ा बहुत काफल पेड़ों में लगे थे, वे मई की शुरुआत में ओलावृष्टि के चलते नष्ट हो गए हैं। उद्यान विभाग से सेवानिवृत्त एडीओ अनिरुद्ध सिंह नेगी ने बताया कि अप्रैल के आखिरी में पेड़ों पर काफल बनने और मई अंत तक पूरी तरह पक जाते थे। जंगलों में आग लगने, मौसम चक्र गड़बड़ाने और सरकारी स्तर पर काफल के संरक्षण की कोई योजना न होने को वह इसके लुप्त होने के कगार पर आने की वजह मानते हैं। वन विभाग के रेंजर आशीष डिमरी ने बताया कि विभाग औषधीय पौधों के संरक्षण की योजना के तहत काफल के पौधे लगाता है। साथ ही इन पौधों का संरक्षण भी किया जाता था।
काफल के औषधीय गुण
दून अस्पताल के आयुर्वेदिक फिजिशियन डा. जेएन नौटियाल ने बताया कि पेट की बीमारियों और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफल बहुत उपयोगी है। गुठली समेत खाने में यह कब्ज को ठीक करने में काफी फायदेमंद है। इसी तरह, रक्त में हिमोग्लोबिन बढ़ाने, शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम करने और हृदय संबंधी बीमारियों में भी इसका इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनीष चंद्र भट्ट
पौड़ी।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) की काफल पार्टी से चर्चा में आया औषधीय गुणों से भरपूर यह जंगली फल इस बार पहाड़ से गायब है। उद्यान विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव का नतीजा मान रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से भी इसके संरक्षण के कुछ खास प्रयास नहीं किए गए हैं।
गढ़वाल मंडल मुख्यालय की बात करें तो यहां पौड़ी और उसके आसपास अदवाणी, खिर्सू, टेका, प्रेमनगर व गडोलिया आदि के जंगलों में काफल प्रचुर मात्रा में होता था। आमतौर पर काफल मई तक पूरी तरह पक जाता है। मई-जून की छुट्टियों में गांव के बच्चे पौड़ी, श्रीनगर आदि शहर-कस्बों के बाजारों में काफल बेचते नजर आते थे। छुट्टियों में उनके लिए यह कुछ पैसे कमाने का जरिया भी होता था, लेकिन इस बार यहां के बाजारों में काफल नजर नहीं आ रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, औषधीय गुणों वाले काफल फल पर भी ग्लोबल वार्मिंग का असर पड़ा है तो कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, काफल की सीड ब्रीडिंग एक साल छोड़कर अच्छी होती है, लेकिन इस बार काफल बिल्कुल खत्म होने से उद्यान विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। पौड़ी के पुराने उद्यान विशेषज्ञ जसपाल सिंह नेगी ने बताया कि मई अंत तक काफल पूरी तरह पक जाता था। इस बार जो थोड़ा बहुत काफल पेड़ों में लगे थे, वे मई की शुरुआत में ओलावृष्टि के चलते नष्ट हो गए हैं। उद्यान विभाग से सेवानिवृत्त एडीओ अनिरुद्ध सिंह नेगी ने बताया कि अप्रैल के आखिरी में पेड़ों पर काफल बनने और मई अंत तक पूरी तरह पक जाते थे। जंगलों में आग लगने, मौसम चक्र गड़बड़ाने और सरकारी स्तर पर काफल के संरक्षण की कोई योजना न होने को वह इसके लुप्त होने के कगार पर आने की वजह मानते हैं। वन विभाग के रेंजर आशीष डिमरी ने बताया कि विभाग औषधीय पौधों के संरक्षण की योजना के तहत काफल के पौधे लगाता है। साथ ही इन पौधों का संरक्षण भी किया जाता था।
विज्ञापन
काफल के औषधीय गुण
दून अस्पताल के आयुर्वेदिक फिजिशियन डा. जेएन नौटियाल ने बताया कि पेट की बीमारियों और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में काफल बहुत उपयोगी है। गुठली समेत खाने में यह कब्ज को ठीक करने में काफी फायदेमंद है। इसी तरह, रक्त में हिमोग्लोबिन बढ़ाने, शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम करने और हृदय संबंधी बीमारियों में भी इसका इस्तेमाल फायदेमंद माना जाता है।
विज्ञापन