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सभी नदियों को मिले मानवीय अधिकार: शंकराचार्य
Updated Tue, 06 Jun 2017 09:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि देश की सभी नदियों को गंगा और यमुना की तरह मानवीय अधिकार दिए जाने चाहिए। भारत की तमाम नदियां विश्वभर में पवित्रतम हैं। इन्हीं नदियों के किनारे समस्त धर्मग्रंथ रचे गए हैं। नदियां सुरक्षित न रही तो धर्मग्रंथों की रचना मुश्किल हो जाएगी।
कनखल के जगद्गुरु आश्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि हाल ही में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला देकर गंगा और यमुना को मनुष्य की भांति जीवित माना है। यह दर्जा मिलने के बाद नदियों के संवैधानिक अधिकार और बढ़ गए हैं। गोमुख से गंगा सागर तक बहने वाली 2525 किलोमीटर लंबी गंगा नदी में एक हजार नदियां और मिलती हैं। सभी नदियां मिलकर गंगा को प्रदूषित कर रही हैं। इसी प्रकार 1376 किलोमीटर लंबी यमुना नदी दिल्ली और हरियाणा में बुरी तरह प्रदूषित हो गई है। इन दोनों नदियों पर अतीत में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। अब फिर केंद्र सरकार ने 19 हजार करोड़ रुपये की धनराशि गंगा मैया के लिए निर्धारित की है। आवश्यकता इस बात की है कि गंगा के लिए वास्तव में कोई काम शुरू हो। जब तक गंगा के जीवन मूल्यों की रक्षा करने के लिए सरकारें आगे नहीं आएंगी तब तक नदियों का भला नहीं होगा।
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जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि गंगा और यमुना की तरह देश की दर्जनों अन्य नदियां भी तीर्थों से होकर बहती हैं। उन नदियों के किनारे वर्ष भर अनेकों मेले लगते हैं। शिप्रा जैसी कुछ नदियां तो विलुप्त होने के कगार पर हैं। अतीत में इसी प्रकार पवित्र सरस्वती नदी भी लुप्त हो गई थी। यदि नदियों को बचाना है तो नदियों के संरक्षण के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि यह तभी संभव है जब संसद और विधानसभाएं कड़े कानून लागू करें। पवित्र नदियों की रक्षा के लिए सर्वाधिकार संपन्न तट रक्षा दलों का भी गठन होना चाहिए। सरकार उन सभी लोगों के मामले न्यायालय तक ले जाएं, जो मानव नदी घोषित हुई गंगा और यमुना में रसायनिक पदार्थ तथा नगर मल डाल रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया है कि भारत सरकार इस दिशा में अविलंब कदम उठाए ताकि देश की आत्मा रही पवित्र नदियां बच सकें।
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