गंगा मंत्रालय जागा, अफसरों पर कार्रवाई के आदेश

Dehradun Bureau Updated Mon, 05 Jun 2017 10:39 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गंगा में खनन के खिलाफ मातृसदन के आंदोलन का फिर केंद्र के गंगा मंत्रालय ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेजकर पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम की धारा-5 सख्ती से लागू कराने के आदेश दिए हैं। साथ ही गंगा में खनन कर अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी की कार्रवाई कर रिपोर्ट भी तलब की है। गंगा मंत्रालय इस आदेश के साथ ही स्वामी शिवानंद ने 13वें दिन अपने आंदोलन को पूर्णाहूति दे दी।

सरकार ने 13 मई को गंगा में श्यामपुर और चिड़ियापुर में वन विकास निगम का खनन खोल दिया था। इसके अगले ही दिन 14 मई को मातृसदन का आंदोलन शुरू हो गया था। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के अनशन के बीच ही गंगा में बिशनपुर और भोगपुर में भी खनन खोल दिया गया। जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम की धारा-5 लागू की गई थी। तीन मई को एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट नैनीताल ने भी धारा-5 लागू कराते हुए गंगा के पांच किमी के दायरे में खनन बंद कराने के आदेश दिए थे। मातृसदन ने हाईकोर्ट की अवमानना का केस भी दायर किया है। खनन चलने के साथ ही मुख्य सचिव एस रामास्वामी, औद्योगिक विकास सचिव शैलेश बगोली, डीएम दीपक रावत, डीएफओ एचके सिंह और वन विकास निगम के डीएलएम आईपीएस रावत पर कार्रवाई की मांग को लेकर मातृसदन का आंदोलन चलता रहा। ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के 11 दिन अनशन के बाद से स्वामी शिवानंद का अनशन जारी रहा। इस दरम्यान स्वामी शिवानंद ने छह दिन तक जल का भी त्याग किया और तीन दिन मौन धारण किया।

बहरहाल अब केंद्रीय गंगा मंत्रालय ने मातृसदन के आंदोलन को संज्ञान लेते हुए सीपीसीबी और वन तथा पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिखा है। जिसमें पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम की धारा-5 लागू कराते हुए खनन पर रोक लगाने और पूर्व में जारी आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए। इस आदेश की प्रतिलिपि मिलने के बाद शाम छह बजे स्वामी शिवानंद ने जूस पीकर अनशन को पूर्णाहूति दी। इस मौके पर अरुण भदौरिया, गुलशन खत्री सहित कई गंगा भक्त मातृसदन पहुंचे। उन्होंने कहा कि एक बार फिर सत्य की जीत हुई है।

कार्रवाई हुई तो जद में आएंगे कई अधिकारी
गंगा मंत्रालय ने पत्र में काफी सख्त भाषा का इस्तेमाल किया है। पत्र के आधार पर कार्रवाई होने पर कई अधिकारी इसकी जद में आएंगे। पर्यावरण सरंक्षण अधिनियम की धारा-5 पिछले साल दिसंबर में लागू की गई थी। जिसके तहत गंगा में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए पांच किमी के दायरे में क्रशिंग पर भी रोक लगाई गई है। इसके पालने के लिए सीधे तौर पर मुख्य सचिव और डीएम व एसएसपी की जवाबदेही तय की गई है। आदेश का उल्लंघन होने पर अधिकारियों पर जुर्माने और सजा का प्रावधान भी दिया गया है।

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