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इजी पेमेंट से राशन का भुगतान करेंगे डीलर
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इजी पेमेंट से राशन का भुगतान करेंगे डीलर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। कुछ दिन पूर्व बैंक भुगतान की पर्ची में राशन डीलरों की ओर से हेराफेरी करने के बाद गोदाम एसएमआई सक्रिय हो गए हैं। अधिकारी ने बैंक से तालमेल कर इजी पेमेंट नाम का साफ्टवेयर तैयार किया है। इस साफ्टवेयर के जरिये अब राशन डीलर ऑनलाइन भुगतान करेंगे। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इससे खाद्यान्न वितरण व भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
बैंक से भुगतान की कच्ची रसीद मिलती है जिसमें राशन डीलर घपला कर लेते थे। ऐसे ही मामला बीते दिनों ट्रांसपोर्ट नगर स्थित गोदाम में सामने आया था। जिसमें तीन डीलरों न शून्य बढ़ाकर चार लाख रुपये की चपत लगाई थी। मामला उजागर होने के बाद तीन राशन की दुकानें निरस्त भी की गई थीं। ऐसी घोटाला दोबारा न हो इसके लिए गोदाम एसएमआई हरिंदर ने बैंक की मद्द से इजी पेमेंट के नाम से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। साफ्टवेयर लागू होने के बाद जब भी राशन डीलर बैंक में पैसे जमा करने जाएगा तो उस साफ्टवेयर के जरिये बैंककर्मी उससे आवंटन के हिसाब से पैसा लेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद गोदाम के कर्मचारियों को पता चल जाएगा कि किस राशन डीलर ने कितना भुगतान किया है और इस हिसाब से उसे आवंटन किया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह प्रक्रिया लागू होने के बाद गोदाम में घपलेबाजी पर अंकुश लग सकेगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। कुछ दिन पूर्व बैंक भुगतान की पर्ची में राशन डीलरों की ओर से हेराफेरी करने के बाद गोदाम एसएमआई सक्रिय हो गए हैं। अधिकारी ने बैंक से तालमेल कर इजी पेमेंट नाम का साफ्टवेयर तैयार किया है। इस साफ्टवेयर के जरिये अब राशन डीलर ऑनलाइन भुगतान करेंगे। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि इससे खाद्यान्न वितरण व भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
बैंक से भुगतान की कच्ची रसीद मिलती है जिसमें राशन डीलर घपला कर लेते थे। ऐसे ही मामला बीते दिनों ट्रांसपोर्ट नगर स्थित गोदाम में सामने आया था। जिसमें तीन डीलरों न शून्य बढ़ाकर चार लाख रुपये की चपत लगाई थी। मामला उजागर होने के बाद तीन राशन की दुकानें निरस्त भी की गई थीं। ऐसी घोटाला दोबारा न हो इसके लिए गोदाम एसएमआई हरिंदर ने बैंक की मद्द से इजी पेमेंट के नाम से एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। साफ्टवेयर लागू होने के बाद जब भी राशन डीलर बैंक में पैसे जमा करने जाएगा तो उस साफ्टवेयर के जरिये बैंककर्मी उससे आवंटन के हिसाब से पैसा लेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद गोदाम के कर्मचारियों को पता चल जाएगा कि किस राशन डीलर ने कितना भुगतान किया है और इस हिसाब से उसे आवंटन किया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह प्रक्रिया लागू होने के बाद गोदाम में घपलेबाजी पर अंकुश लग सकेगा।
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