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आगामी दो दशक प्रौद्योगिकी के केंद्र में रहेगी ऊर्जा
Updated Sat, 12 May 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश बनाने के लिए हमें प्रौद्योगिकी समृद्ध होना होगा। भविष्य हमारे सामने तमाम चुनौतियां लेकर खड़ा है। ऊर्जा स्रोतों के बेहतर प्रबंधन और उसके विकल्पों के विकास पर चिंतन से ही तमाम समस्याओं से पार पाया जा सकता है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी सचिव रविनाथ रमन ने मोहकमपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) में दूसरे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि यह बातें कही।
‘ऊर्जा के भविष्य, चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर आयोजित वैज्ञानिक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल कर और ऊर्जा संरक्षण पर जोर देकर ही विकास की कल्पना की जा सकती है। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि डॉ. आरवी जसरा ने कहा कि अगले दो दशक में भी प्रौद्योगिकी के केंद्र में ऊर्जा ही रहेगी । डॉ. जसरा ने कहा कि देश में तेजी से बढ़ते परिवहन प्रदूषण पर समय रहते अंकुश लगाना जरूरी है। नहीं तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
आईआईपी निदेशक डॉ. अंजन रे साल 1998 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करने के साथ ही इस बात पर जोर दिया कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना एक बड़ी चुनौती है।
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परिसंवाद के समन्वयक राजकुमार यादव ने कहा कि पिछले कई आयोजनों की तुलना में इस बार प्रतिभागियों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है । उन्होंने कहा कि इस परिसंवाद का मुख्य विषय ऊर्जा स्रोतों की प्राप्ति, पेट्रो रसायन, जैव ऊर्जा एवं इसके अनुप्रयोग, ग्रीन हाउस गैसेज - मूल्यवर्द्धन, ईंधन एवं उपस्कर अंर्तसंबंध, गैर पांरपरिक ऊर्जा स्रोत एवं भंडारण समेत कई अहम मुद्दे हैं। इस मौके पर अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन भी किया। अमित कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्य अतिथि ने इस दौरान आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी का भी जायजा लिया। इस अवसर पर अतिथियों ने दो नई प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया। आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में डॉ. आरवी जसरा, आईआईटी चैन्नै के प्रो. पी सेलवम, आईआईटी दिल्ली के प्रो. पी एमवी सुब्बाराव, आईआईटी दिल्ली के प्रो. केके पंत, डॉ. जीडी यादव, प्रो. एस पंत समेत कई वैज्ञानिक अपने व्याख्यान देंगे। इस अवसर पर डॉ. डी पर्वतालु, डॉ. एसजे चोपड़ा, डॉ अंजन रे, मुख्य वैज्ञानिक अमर कुमार जैन, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंशु नानोटी, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानित डॉ. शुभम पॉल, डॉ. डीसी पांडेय आदि मौजूद रहे।
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देश को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश बनाने के लिए हमें प्रौद्योगिकी समृद्ध होना होगा। भविष्य हमारे सामने तमाम चुनौतियां लेकर खड़ा है। ऊर्जा स्रोतों के बेहतर प्रबंधन और उसके विकल्पों के विकास पर चिंतन से ही तमाम समस्याओं से पार पाया जा सकता है। विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी सचिव रविनाथ रमन ने मोहकमपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) में दूसरे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि यह बातें कही।
‘ऊर्जा के भविष्य, चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर आयोजित वैज्ञानिक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि ने कहा कि ऊर्जा स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल कर और ऊर्जा संरक्षण पर जोर देकर ही विकास की कल्पना की जा सकती है। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि डॉ. आरवी जसरा ने कहा कि अगले दो दशक में भी प्रौद्योगिकी के केंद्र में ऊर्जा ही रहेगी । डॉ. जसरा ने कहा कि देश में तेजी से बढ़ते परिवहन प्रदूषण पर समय रहते अंकुश लगाना जरूरी है। नहीं तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
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आईआईपी निदेशक डॉ. अंजन रे साल 1998 में केंद्र सरकार द्वारा किए गए पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करने के साथ ही इस बात पर जोर दिया कि कार्बन उत्सर्जन को कम करना एक बड़ी चुनौती है।
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परिसंवाद के समन्वयक राजकुमार यादव ने कहा कि पिछले कई आयोजनों की तुलना में इस बार प्रतिभागियों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है । उन्होंने कहा कि इस परिसंवाद का मुख्य विषय ऊर्जा स्रोतों की प्राप्ति, पेट्रो रसायन, जैव ऊर्जा एवं इसके अनुप्रयोग, ग्रीन हाउस गैसेज - मूल्यवर्द्धन, ईंधन एवं उपस्कर अंर्तसंबंध, गैर पांरपरिक ऊर्जा स्रोत एवं भंडारण समेत कई अहम मुद्दे हैं। इस मौके पर अतिथियों ने स्मारिका का विमोचन भी किया। अमित कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्य अतिथि ने इस दौरान आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी का भी जायजा लिया। इस अवसर पर अतिथियों ने दो नई प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया। आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में डॉ. आरवी जसरा, आईआईटी चैन्नै के प्रो. पी सेलवम, आईआईटी दिल्ली के प्रो. पी एमवी सुब्बाराव, आईआईटी दिल्ली के प्रो. केके पंत, डॉ. जीडी यादव, प्रो. एस पंत समेत कई वैज्ञानिक अपने व्याख्यान देंगे। इस अवसर पर डॉ. डी पर्वतालु, डॉ. एसजे चोपड़ा, डॉ अंजन रे, मुख्य वैज्ञानिक अमर कुमार जैन, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अंशु नानोटी, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानित डॉ. शुभम पॉल, डॉ. डीसी पांडेय आदि मौजूद रहे।